नई दिल्ली। कश्मीर की घाटी में लगातार हो रही बर्फबारी से जहां परिवहन के अन्य साधनों को ठंड से जकड लिया है, वहीं बर्फ का सीना चीरती हुई रेलगाड़ी रोज धड़ाधड़ बढ़ती चली जाती है। कश्मीर घाटी में हो रही भयंकर बर्फबारी में जब बिजली आपूर्ति और इंटरनेट सेवा तक ठप हो चुका था उस वक्त भी रेल गाड़ी बारामूला से काजीगुंड के बीच प्रतिदिन 6000 लोगों की यात्रा सुखद बना रहा थ
नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली प्रजनन पर्यटन (reproductive tourism) में यूरोप और अमेरिका को मात दे रहा है। यूरोप व अमेरिका से सात पांच गुना सस्ते दर पर यहां किराए की कोख (surrogate mother) उपलब्ध है। यही नहीं, फ्रांस सहित अन्य कैथोलिक देशों में ivf (टेस्टयूब बेबी) व सरोगेसी (किराए की कोख) पर प्रतिबंध की वजह से भी दिल्ली बेहतर विकल्प है। यही वजह है कि यहां किराए
नई दिल्ली। छुट्टी पर परिवार के साथ कहीं जाना रोमांचक अनुभव कराता, लेकिन क्यों ने इस रोमांच को अध्यात्म की शांति प्रदान किया जाए! आखिर आप भारतीय हैं और किसी ने किसी रूप में आध्यात्म आपमें रचा-बसा है!
´जादू है नशा है, मदहोशियां इसको भुलाके अब जाएं कहां´ यहाँ आकर कुछ ऐसा ही लगता है। मखमली-अनछुई हरियाली भरी वादियां, पेड़ पौधों के बीच किलकारियां भरते-अठखेलियां करते वन्य जीव, पंक्षियों के चहकने की सुरीली आवाज यहाँ आने वालों को मदहोश कर देती है। बर्फ से भरी दूर-दूर तक फैली पर्वत श्रंखलाएं और शान्त वातावरण लोगों के मन को पहली बार में ही भा जाता है।
जहां तक नज़र जाए हिमालय पर्वत श्रंखला की ऊंची-नीची चोटियां और उनके ऊपर जमकर पिघल चुकी बर्फ के निशान। चट्टानों पर खड़े चीड़ और देवदार के हरे-भरे पेड़ किसी के भी मन को अपनी ओर खींचते नज़र आते हैं। रात्रि हो या सुबह-सायं ठण्डी हवा के झोंके तन बदन को बेहद सुकून देते हैं। हम बात कर रहे हैं हिमांचल प्रदेश के धर्मशाला से 9 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मशहूर पर्यटक स्थल मैकलोडगञ
`हुस्न पहाड़ों का या कहना कि बारह महिने यहाँ मौसम जाड़ों का´ यहाँ के बारे में कुछ ऐसा ही कहा जा सकता है। गर्मियों में भी यहाँ की पहाड़ियां 8 से 10 फुट तक मोटी बर्फ से लदी देखी जा सकती हैं। मई और जून के महीने में आप यहाँ आकर दूर-दूर तक फैली ठण्डी सफेद बर्फ की चादर पर स्केटिंग कर सकते हैं। बर्फ के गोले बनाकर एक-दूसरे पर फेंक सकते हैं। जी हां हम बात कर रहे हैं `र
पथरीली मिट्टी की भीनी-भीनी सोन्धी महक, दूर-दूर तक फैली कोमल-मनमोहक हरियाली के बीच मन मचलाने वाली रंगीन शाम किसे पसन्द नहीं होगी। हम बात कर रहे हैं `खज्जियार´ की। चीड़ और देवदार के ऊंचे-लम्बे हरे-भरे पेडों के बीच बसा खज्जियार दुनिया के 160 मिनी स्विटजरलेण्ड में से एक है। यहाँ आकर सैलानियों को आत्मिक शान्ति और सुकून मिलता है। अप्रैल के बाद मई की झुलसाने वाली ग
राजधानी दिल्ली में आग बरसाते जून के महीने में पहाड़ी वादियों की ठण्डक तन और मन को बेहद सुकून देती है। आप भी कहीं पहाड़ों में कुछ दिन खो जाने जाने की बात सोच रहे हैं तो आपके लिए मनाली एक अच्छी जगह साबित हो सकती है। आप एडवेंचर के शौकीन हैं तो आपके लिए यहाँ ट्रैकिंग, माउण्टेनियरिंग, स्कीइंग, पैरा ग्लाइडिंग का भी मजा यहां मिलेगा। यदि आप ठण्डे और शान्त माहौल
दिल्ली-एनसीआर का तापमान रोजाना बढ़ रहा है। स्कूलों की छुटि्टयां हो चुकी हैं। खुद भी कहीं घूमने जाने का मन कर रहा है तो मौका अच्छा है। यदि समय कम है या ज्यादा दूर नहीं जाना चाहते तो आप शिमला को अपनी गर्मियों की राजधानी बना सकते हैं। यहाँ वह सब सहूलियतें मिलेंगीं जो आपको पसन्द हों। यहाँ और आस पास ऐसे दर्जनों स्थल हैं जहां आपका मन जरूर लगेगा। यहाँ का अधिकतम तापमान भी
नई दिल्ली। दिल्ली देश की राजधानी है। यह यमुना किनारे स्थित है। आज से पहले भी सभी सभ्य व्यक्तियों ने इसे राजधानी मानकर सुशोभित किया। यह नगर राज वैभव, कला-कौशल तथा विद्या-बुद्धि आदि बातों में अग्रसर रहा है। यहां की ऊंची-ऊंची तथा ऐतिहासिक इमारतों से पता चलता है कि यह शहर कई बार बना, कई बार उजड़ा है।
इतिहास
कैलाश मानसरोवर को शिव का निवास स्थान माना जाता है। मानसरोवर के पास स्थित कैलाश पर्वत पर भोले नाम का धाम है। यहीं देवों के देव महादेव विराजते हैं। ईश्वर की साक्षात कृपा ही है कि यहां ॐ पर्वत और नाग पर्वत स्थित है। ॐ पर्वत ॐ के आकार का है, जो साक्षात ओंकार की अनुभूति कराता हैा वहीं नाग पर्वत नाग के आकार का है। कैलाश मानसरोवर यात्रा में जब श्रद्धालु यम द्व
सत्येंद्र त्रिपाठी, देहरादून से लौटकर। पौराणिक, प्राचीन आदि अनादि तीर्थस्थल स्वयंभू शिवलिंग टपकेश्वर महादेव श्री गुरु द्रोणाचार्य जी की तपस्थली द्रोण गुफा, देहरादून में स्थित है। पौराणिक श्री टपकेश्वर महादेव मंदिर, आदि अ
कैलाश पर्वत को भगवान शिव का धाम माना जाता है। कैलाश मानसरोवर तक पहुंचने की यात्रा में आस्था, आध्यात्मिकता और रोमांच का अद्भुत संगम मिलता हैा कैलास मानसरोवर यात्रा में हुई अनुभूति का शब्दों में वर्णन नहीं किया जा सकता। कैलाश पर्वत की परिक्रमा के दौरान मन दिव्यता से जुड़ जाता है। यह यात्रा बेशक लंबी और काफी कठिन मार्गो से होकर गुजरती है, लेकिन यह मन को आनंदित
नई दिल्ली। हिन्दुओं के लिए चार धाम की यात्रा शुरू हो चुकी है। राजधानी दिल्ली से चार धाम की यात्रा के लिए भारतीय रेल खानपान एवं पर्यटन निगम(आईआरसीटीसी) ने विशेष पैकेज की शुरुआत की है। बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की 11 दिन व 12 रातों की यह यात्रा एसी बसों में पूरी होगी। इस टूर पैकेज की अधिक जानकारी व इसे बुक करने के लिए
शिरडी से लौटकर। शिरडी के साईं बाबा के दर्शन के लिए दिल्लीवासियों को न अब गाड़ियों में आरक्षित टिकट बुक कराने का झंझट है और न ही वहां पहुंचकर होटल ढूंढ़ने की सिरदर्दी। भारतीय रेल खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) ने साईंधाम दर्शन के
भारत के प्राचीनतम मन्दिरों में से अतिप्राचीन और पुराणों में वर्णित 51 शक्तिपीठों में से भी अतिप्राचीन आद्यशक्ति पीठ दिल्ली के महरौली में स्थित आद्यशक्तिपीठ योगमाया पीठ मन्दिर है। यह मन्दिर जहां भारतीय प्राचीन विरासत को अपने अन्दर समेटे हुए वहीं श्रद्धालुओं के लिए श्रद्धा एवं आस्था का भी
जब किसी गांव की स्थापना की जाती है तो गांव की सुख-समृद्धि और सुरक्षा के लिए स्थानीय लोग भूमिया देवता की मन्दिर की स्थापना करते हैं, जो गांव के शुरूआत यानी जहां गांव का प्रवेश द्वार होता है। वहीं इस देवता की मन्दिर की स्थापना करते हैं। लोगों की ऐसी मान्यता है कि भूमिया देव गांव पर आने वाले हर विपत्ति,आपदा एवं विपत्ति से उनकी रक्षा करते हैं। ऐसा ही एक भूमिया देव का
कामाख्या मंदिर नीलाचल पर्वत या कामगिरी पर्वत पर गुवाहाटी शहर में पहाड़ी की ऊंची चोटी पर स्थित है, अनेक धार्मिक स्थलों में से एक है, जो असम राज्य के समृद्ध ऐतिहासिक विवरण की कहानी स्वयं कहता है। कामाख्या मंदिर का निर्माणकामा
पूर्व में बिहार और अब झारंखड में स्थित बैजनाथ धाम, जिसे देवघर यानी देवों का घर कहा जाता है। वह 51 शक्तिपीठों और द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक है। वास्तव में शक्तिपीठ या ज्योतिर्लिंग उस स्थल के लिए प्रयोग किया जाता है जिसका कोई पौराणिक महत्व हो, जहां तपस्या, योग-साध्ना आदि की गई हो। ऐसे पौराणिक, घार्मिक और पवित्र स्थलों में से एक है देवघर, जहां सालों भर श्रद्धाल
पुरी (उड़ीसा) में प्रत्येक वर्ष होने वाला भगवान जगन्नाथ जी का रथ यात्रा उत्सव विश्व का प्रसिद्ध व भव्य उत्सव माना जाता है। इस रथ यात्रा के दर्शन के लिए देश-विदेशों से लाखों लोग यहां एकत्रित होते हैं। यह रथ यात्रा प्रत्येक वर्ष आषाढ़ शुक्ल द्वितीय तिथि को निकाली जाती है।
नई दिल्ली। गर्मी की छुट्टियां शुरू होने वाली हैं। देश के पर्यटन स्थलों पर होने वाली भीड़ से बचने के लिए विदेश यात्रा का कार्यक्रम बनाने वालों के लिए मकाऊ एक पसंदीदा जगह है, लेकिन वहां तक सीधी उड़ान नहीं होने के कारण यात्रियां को हांगकांग से मकाऊ तक वाया रोड सामान ले जाने में कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एयर इंडिया ने यात्रियो
सुन्दर, मनोहारी एवं अप्रतिम प्राकृतिक सौन्दर्य के दीदार के शौकीन लोगों के लिए स्विटजरलैंड सर्वथा उपयुक्त पर्यटन स्थल है जहां पोर-पोर में धरा एवं अम्बर की खूबसूरती समाई हुई है।वर्ष 2010 में दो लाख भारतीयों ने अपनी छुट्टिया स्विटजरलैंड में बिताई थी।
रासविहारी, संयुक्त अरब अमीरात से लौटकर। रस अल खेमा, कभी नाम भी नहीं सुना था। मेरी ही तरह बहुत सारे भारतीयों ने इसका नाम नहीं सुना है। इसलिए जब मेरे एक दोस्त ने रस अल खेमा आने का न्यौता दिया तो शुरू में कुछ समझ ही नहीं पाया। बाद में उसने
ब्रिटिश महिलाओं का नाम दुनिया के सबसे अशिष्ट पर्यटकों में दर्ज किया गया है। समाचार पत्र "द डेली एक्सप्रेस" के अनुसार ब्रिटेन की महिलाएं पूरी दुनिया में छुट्टियों के दौरान अपने बुरे बर्ताव, असहज पहनावे और शराब पीने की लत को लेकर बदनाम हैं।
मुम्बई से लगभग 2,640 मील दूर, दक्षिण-पश्चिमी हिन्द महासागर में स्थित मॉरीशस आज भी भारतीय छवि प्रस्तुत करता हुआ प्रतीत होता है। यद्यपि इस तत्कालीन ब्रिटिश उपनिवेश में करीब 175 साल पहले भारतीय नागरि