तसलीमा को उस रात सेक्‍स सुख के साथ मिला था यौन रोग!

उस रात भी घर लौटकर, रूद्र मेरी मिन्नतें करता रहा, सुनो रानी बहू थोड़ी सहज हो जाओ। अपने को इतना सख्त मत रखो। अपनी देह को जरा नरम करो।रूद्र उस रात भी प्रशस्त किए गए राह में फिर दाखिल हुआ। अंधेरे कमरे में आंखें मून्दे-मून्दे  और अंधेरा महसूस करते हुए जब मै रूद्र की दी हुई पीड़ा अपने अंग-अंग में समो रही थी अचानक....अचानक एक सुखद अहसास! मेरे सिर से पांव तक, बिजली का करंट दौड़ गया। उस विद्युत की कौंध से रूद्र की पीठ पर मैने दसों उंगलियां गड़ा दी। मै हांफने लगी। हांफते-हांफते मैने पूछा क्या हुआ? रूद्र ने कोई जवाब नहीं दिया। मेरी सोना, मेरी माणिक, मेरी रानी बहू कहते हुए वह मुझ पर झुक आया। उस रात उसने एक बार नहीं बल्कि कई-कई बार मुझे तीखे सुख ने विभोर कर दिया। इस सुखद पीड़ा से मेरी नस-नस अवश होती रही। मै गहरे सुख-महासुख में आकुल-व्याकुल होती रही

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सिफलिस की बीमारी

खुजली कहां हो रही है?

कोई जवाब देने के बजाए रूद्र बत्ती बुझाकर लेट गया। मै भी उसकी बगल में लेट गई। उसके सीने पर हाथ रखकर, मैने कहा, कहीं कोई कैबिस तो नज़र नहीं आया है-
कहां? हुआ है
उस जगह पर!
किस जगह पर?
फेनिस में हुआ है।
कहां?
फेनिस मे़!
डेटाल क्यों लगाया?
डेटाल लगाना अच्छा होता है।
डेटाल लगाने को किसी डॉक्टर ने कहा है? ना-
मल्हलम किसने दी? किसी डॉक्टर ने?
नहीं खुद खरीदी है। यह मलहम क्या असर करेगी?

पता नहीं-
फिर  लगा क्यों रहे हो?
कैबिस हुआ हो? तो पायेथि्रन लगानी चाहिए। क्या बेहद खुजली होती है?

हां खुजली तो भयंकर होती है। दाने भी निकले हैं।

छोटा दाना है? दबाने से पानी निकलता है?

खास छोटा भी नहीं है।

बड़ा दाना तो निकलना नहीं चाहिए। दाना बड़ा क्यों होने लगा? खासा बड़ा ही है।
डॉक्टरी उत्साह से मै उठ बैठी मैने बत्ती जला कर कहा, उंहूं देखूं तो किस किस्म का है।

रूद्र ने लूंगी खिसका कर नीचे की। उसकी रोहेदार देह, नीचे के हिस्से में और ज्यादा रोमिल थी। घने-घने रोम के नीचे, एक सर्द पुरुषांग! पुरुषांग के सिरे पर एक लाल फूल! इस सुहाग सेज पर मेरी पहली रात के लिए किसी ने किसी किस्म के फूल भी नहीं बिछाए थे। न गुलाब, न गेन्दा, न जवा, न जूही। रूद्र के पुरुषांग का फूल ही मेरी सुहागरात बन गया।

ऐसे फूलदार पुरुषांग मैने ढेरों देखे थे। पुरुषांग पर उभरा ये घाव बेहद जाना पहचाना था । अस्पताल में यौन विभाग के आउटडोर में, पुरुष रोगी अपनी लुंगी खिसकाकर ठीक इसी किस्म के घाव दिखाते हैं । जिस घाव को यौन रोग के डॉक्टर सिफलिस का घाव बताते हैं। रूद्र का घाव भी सिफिलिस के घाव जैसा ही नज़र आ रहा था।
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बेवफा पति

'वहां क्यों जाते हो? तुम तो मुझसे प्यार करते हो न?'

'हूं प्यार तो करता ही हूं।'

'मुझसे प्यार करते हो तो किसी दूसरी को कैसे छू पाए? इतने दिनों से तुम मुझ से झूठ बोलते रहे। तुम कहते रहे मेरे अलावा तुमने किसी को स्पर्श नहीं किया। तुम्हे अन्दाजा है, अभी भी मुझे इन बातों पर यकीन नहीं हो रहा है?'

मुझे यह विश्वास करने में बेहद तकलीफ हो रही थी कि रूद्र जैसे मेरे संग सोया था, वैसे ही किसी दूसरी औरत के साथ भी सोता रहा है। जिस तरह उसने मेरे होंठ, छाती चूमे हैं, उसी तरह और भी किसी को चूमता रहा है। हां, मुझे यह विश्वास करने में सच ही असहनीय कष्ट हो रहा था कि रूद्र और भी किसी औरत की गहराईयों में उतरा है। मुझे लगा जैसे मेरी नाव बीच दरिया में डूब गई। मै डूबती जा रही हूं। मुझ पर आसमान टूट पड़ा है। मेरी दुनिया टूट-फूटकर, टुकड़े-टुकड़े होकर बिखर गई हैं और वे टुकड़े लुढ़कते-पुढ़कते समुन्दर में गर्क होते जा रहे हैं।

तसलीमा नसरीन
(आत्‍मकथा: खंड-दो: उत्‍ताल हवा ) साभार: वाणी प्रकाशन 
      

नोट-तसलीमा ने घरवालों को बिना बताए रूद्र से शादी की थी ।  एक बार वह दोस्‍तों के साथ पिकनिक पर गई थी । लौटते वक्‍त वहां से निकलकर रुद्र के घर चली गई थी । वहीं उनकी सुहागरात हुई । सुहागरात को पहली बार शारीरिक संपर्क के दौरान उन्‍हें बेहद तकलीफ से गुजरना पड़ा था, यह आप पढ़ चुके हैं ।

यह अंश सुहागरात के बाद दूसरी रात का है। उस रात पहली बार तसलीमा को शारीरिक संबंध के दौरान चरम सुख हासिल हुआ , लेकिन साथ ही रूद्र से उन्‍हें 'सिफलिस ' जैसा भयंकर यौन रोग भी मिल गया । तसलीमा से पहले और उसके बाद भी रुद्र के संबंध कोठे की औरतों से थे, जहां से यह बीमारी उसे लगी थी। सुहाग की सेज पर ही उसने यह बीमारी तसलीमा को दे दी थी । बाद में इसकी वजह से तसलीमा को लंबी परेशानियों से जूझना पड़ा था । वह यह बात अपने घरवालों को भी नहीं बता सकती थी और न ही साथी डॉक्‍टरों से या  मयमनसिंह स्थित अपने अस्‍पताल में इलाज करा सकती थी । इससे भेद खुलने का खतरा था । वह एक बार फिर से घरवालों को बिना बताए रुद्र के पास ढाका शहर चली गई । और उसी के साथ जाकर अपना इलाज कराया था। 

तसलीमा नसरीन की आत्‍मकथा के महत्‍वपूर्ण खंड को यहां पढें:

तसलीमा नसरीन की वो सुहागरात!

तसलीमा की पहली शादी बड़ी अजीब थी!

तसलीमा नसरीन, पहला प्‍यार, पहली मुलाकात

अकेली लड़की और जीभ लपलपाते पुरुष

तसलीमा नसरीन: मामा के बाद चाचा ने भी किया यौन शोषण

तसलीमा नसरीन: बचपन में यौन शोषण

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