अहमदाबाद । 21वीं सदी में बदलाव की बयार से अब गांव भी अछूते नहीं रह गए हैं, देश की सत्ता जहां महिलाओं के हाथ में है। मध्य गुजरात की सिस्वा समेत आधा दर्जन पंचायतों की कमान शिक्षित युवा लड़कियों को सौंपने का फैसला कर ग्रामीणों ने पंचायत राज के इतिहास में एक नया अध्याय लिख दिया है।
सरकार की समरस ग्राम पंचायत योजना के तहत अब सिस्वा को विकास के लिए 5 लाख का विशेष अनुदान मिलेगा। श्वेत क्रांति का जनक गुजरात का आणंद जिला लोकतंत्र की एक नई इबारत लिखने जा रहा है। यहां सिस्वा गांव के लोगों ने इस बार ग्राम पंचायत शिक्षित युवा लड़कियों को सौंपने का फैसला कर पंचायत राज में एक इतिहास कायम कर दिया है। सिस्वा पंचायत का कामकाज अब गांव की 18 से 22 वर्ष की शिक्षित लड़कियां संभालेंगी। गुजरात की दस हजार 509 ग्राम पंचायतों के लिए दिसंबर के अंतिम सप्ताह में चुनाव होने हैं। बोरसद तहसील के सिस्वा गांव के लोगों ने हिनल पटेल को अपना सरपंच चुन लिया है, जबकि 11 अन्य शिक्षित लड़कियों को वार्ड सदस्य के रूप में चुन लिया गया है।
यह सभी लड़कियां अविवाहित हैं तथा 18 से 22 वर्ष के उम्र की हैं। इसीलिए गांव वालों ने इनका चुनाव चिन्ह भी डोली रखा है। पूर्व सरंपच शैलेष पटेल बताते हैं कि चूंकि इन सभी लड़कियों को एक न एक दिन ब्याह कर ससुराल जाना है इसलिए डोली को ही चिन्ह चुना गया। चुनाव अधिकारी को गांव वालों ने फैक्स कर जब अपना फैसला सुनाया तो एक बारगी उन्हें विश्वास नहीं हुआ।
सिस्वा पंचायत का चुनाव 29 दिसंबर को होना है, 15 दिसंबर को नामांकन की अंतिम तारीख है, जबकि नाम वापसी की तिथि 17 दिसंबर रखी गई है। बोरसद के तहसीलदार डीए त्रिवेदी बताते हैं कि यदि ऐसा हो जाता है तो देश की पंचायतों के लिए यह एक उदाहरण बन जाएगा। साफ सफाई के लिए सिस्वा को पहले राष्ट्रपति पुरस्कार मिल चुका है, पिछले तीन कार्यकाल से हिनल की मां वैशाली पटेल सरपंच हैं, जबकि पिता शैलेष भाई भी सरपंच रह चुके हैं। सरपंच पद की प्रत्याशी हिनल पटेल हाल ही में बैंगलोर से बीएससी नर्सिग करके लौटी हैं। वह गांव में सबको शिक्षित करना चाहती हैं तथा गांव का विकास करके नई पीढी का दम दिखाना चाहती हैं। मुख्यमंत्री मोदी हिनल के प्रेरणास्रोत हैं और वह उन्हीं की तरह गांव को बेहतर शासन देना चाहती हैं।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री मोदी निर्विरोध निर्वाचित होने वाली पंचायतों को समरस योजना के तहत तीन लाख का विशेष अनुदान देते हैं। यदि महिला या दलित सरपंच चुना जाता है तो यह राशि पांच लाख रुपए होती है। राज्य में वर्तमान में 3500 समरस पंचायतें हैं जिनकी संख्या 6 हजार का अनुमान है। राज्य के चुनाव आयुक्त केसी कपूर का कहना है कि गुजरात सरकार की पहल से राज्य की युवा पीढी में सेवा भावना उमड़ रही है। सिस्वा समेत करीब आधा दर्जन पंचायतों में शिक्षित लड़कियों ने आगे आकर पंचायत का कामकाज संभालने की जिम्मेदारी उठाई है। देश के इतिहास में ऐसा पहली बार होगा कि पूरी पंचायत बेटियों के हवाले होगी।
साभार: दैनिक जागरण