नई दिल्ली। भारतीय फूड सैफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी (fssai) के सर्वे में यह चौकाने वाला खुलासा हुआ है। गंभीर बात यह है कि विभिन्न राज्यों से मिले दूध के कुल सैंपलों में से 103 सैंपलों में डिटर्जेंट पाउडर पाया गया जो स्वास्थ्य के लिए बहुत घातक है।
इससे पहले भी एक रिपोर्ट आई थी जिसमें कहा गया था कि जिस पोली पैक में दूध की आपूर्ति हो रही है वह भी इसे जहरीला बना रहा है। पिछले दिनों एक संस्था ने 12 बडी कंपनियों के दूध का सैंपल लिया था। इनमें से एक भी कंपनी का दूध स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं था। जांच में इन कंपनियों के दूध में मानक से अधिक बैक्टीरिया पाए गए, जो दूध की पौष्टिकता को नष्ट करने के लिए पर्याप्त थे। इन कंपनियों के आधा लीटर दूध के पैकेट में मानक से करीब 10 गुना अधिक पैथाजीन, टोटल प्लेट काउंट, कोलिफार्म जैसे माइक्रोबायोलॉजिकल तत्व पाए गए, जो पेट के लिए बहुत नुकसानदायक है।
बाजार तक पहुंचते-पहुंचते दूध हो जाता है बैक्टीरिया प्रभावित
कंपनियों के प्लांट में पैकिंग के बाद बाजार तक पहुंचते-पहुंचते दूध में माइक्रोबायोलॉजिकल तत्व उत्पन्न हो जाते हैं। दूध के पैकेट को प्लांट से उपभोक्ता तक पहुंचने में कम से कम छह घंटे लग जाता है। संरक्षण के दोयम दर्ज़ की प्रक्रिया के कारण तब तक दूध में बैक्टीरिया उत्पन्न हो जाता है। दूध को हमेशा -8 डिग्री सेंटीग्रेड पर संरक्षित किया जाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं होने के कारण दूध पैथाजीन, टोटल प्लेट काउंट, कोलिफार्म जैसे बैक्टीरिया के प्रभाव में आ जाता है। पैथाजीन, टोटल प्लेट काउंट व कोलिफार्म की वजह से पेट में दर्द, अपच, उल्टी, दस्त होने के साथ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो जाती है।
मिलावटी दूध
पोली पैक दूध के अलावा बडे पैमाने पर लोग मिलावटी दूध भी पी रहे हैं। इससे स्थाई रूप से पेट व किडनी की समस्या उत्पन्न हो सकती है। दिल्ली मेडिकल काउंसिल के सदस्य डॉ॰ अनिल बंसल के मुताबिक राजधानी दिल्ली में मिलने वाले दूध में बडे पैमाने पर मिलावट की ख़बर आती रहती है। मिलावटखोर दूध में यूरिया और चूना जैसे तत्व मिला देते हैं, जो बेहद नुकसानदायक हैं। यह पेट ख़राब होने से लेकर किडनी तक को प्रभावित कर सकता है।
यूरिया की अधिकता किडनी को करता है प्रभावित
डॉ॰ अनिल बंसल के अनुसार हमारा शरीर यूरिया उत्पादित करता है। यह शरीर का बेकार पदार्थ है, जिसे किडनी शरीर से बाहर निकालता है। यूरिया मिश्रित दूध पीने की वजह से शरीर में यूरिया की मात्रा बढ जाएगी, जो लंबी अवधि में किडनी को भी फेल कर सकता है।
चूना लाएगा स्थाई दस्त की समस्या
दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन, जनकपुरी शाखा के पूर्व अध्यक्ष व बाल रोग विशेषज्ञ डॉ॰ राकेश महाजन के अनुसार, दूध में मिलावट करने के लिए बडे पैमाने पर चूना का प्रयोग भी किया जाता है। चूना मिला दूध पीने के कारण उल्टी, दस्त, अपच, एलर्जी जैसी समस्याएं स्थाई रूप से पकड सकती है। मिलावटी दूध की वजह से शरीर में पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम , प्रोटीन, विटामिन आदि की कमी हो जाती है, जिससे बच्चों का सही विकास नहीं होता और महिलाओं की हडि्डियां कमजोर हो जाती हैं।
जयपुर गोल्डन अस्पताल के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट डॉ॰ कैलाश सिंगला के अनुसार हैवी मेटल की वजह से गैस्ट्राइटिस, कोलाइटिस, अल्सरेटिव कोलाइटिस,अपच, डायरिया, कैल्शियम की कमी जैसी बीमारी के शिकार लोग हो रहे हैं।
बचाव के उपाय
अच्छे से उबालें: कच्चे दूध को 45 डिग्री संटीग्रेड पर कम से कम 20 मिनट तक उबालना चाहिए। इससे दूध के अंदर की बैक्टीरिया, फंगस, यीस्ट व कोलिफार्म समाप्त हो जाता है। लेकिन पैकेट बंद दूध इस कदर जहरीला हो जाता है कि 20 मिनट तक इसे उबालने पर इसकी पोषकता भी नष्ट हो जाती है। दूध में मौजूद बीटा लैक्टोग्लोबिन नामक प्रोटीन के समाप्त होने के कारण प्रोटीन की कमी शरीर में बनी रहती है। कैल्शियम फॉस्फेट की मात्रा भी अधिक उबालने से प्रभावित होती है, लेकिन इस सबके बावजूद दूध को उबालकर ही पीना चाहिए, क्योंकि इससे 80 फीसदी तक बैक्टीरिया नष्ट हो जाता है।
घर में रखें लैक्टोमीटर
हर घर में लैक्टोमीटर जरूर होना चाहिए। इससे मिलावटी व असली दूध का फर्क पता चल जाता है। लैक्टोमीर की जांच से मिलावटी दूध पीने की समस्या से बचा जा सकता है।
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