पति-बच्चे से अलग, अपने दिल की आवाज भी सुनें महिलाएं

HouseWife.jpg

नई दिल्ली। अपने पति और बच्चे से अलग अपने दिल की आवाज भी सुनें महिलाएं। घर परिवार की फिक्र और जांच व उपचार के मामले में निष्क्रियता बरतने के कारण महिलाएं दिल की बीमारी की शीघ्र शिकार होती है। इस लापरवाही का ही नतीजा है कि हर साल हृदय संबंधी बीमारी से पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं की मौत ज्यादा होती हैं।

33 फीसदी महिलाएं ही कराती हैं सर्ज़री
हर्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ॰ के के अग्रवाल कहते हैं कि नेशनल कोलीशन फॉर वुमन विद हार्ट डिसीज के आंकडों के अनुसार, हृदय रोग से प्रभावित 33 फीसदी महिलाएं ही एंजियोप्लास्टी, स्टेंटस और बाइपास सर्ज़री करवाती हैं। 28 फीसदी एंप्लांटेबिल डेफिब्रिलेटर्स और 36 फीसदी ओपन हार्ट सर्ज़री कराती हैं।

कोलेस्ट्रॉल, रक्तचाप व मोटापा पुरुषों से अलग होता है महिलाओं में
एस्कॉर्ट अस्पताल के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ॰ विनय सांघी के अनुसार, हाई कोलेस्ट्रॉल, उच्च रक्तचाप और मोटापा पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अलग होता है। ये तीनों महिलाओं में हृदय संबंधी बीमारी में बडी भूमिका अदा करते हैं। यही नहीं, ब्लड प्रेशर का बढना और ब्लड ग्लुकोज का असंतुलित होना भी महिलाओं में पुरुषों से अधिक होता है।

महिलाएं क्यों हैं हृदय की बीमारी के प्रति अधिक संवेदनशील (heart disease in women facts)
* पुरुषों की अपेक्षा मानसिक तनाव और अवसाद का असर महिलाओं के हृदय पर अधिक पड़ता है
* धूम्रपान का असर भी पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं पर ज्यादा होता है
* मीनापॉज से पूर्व एस्ट्रोजन के स्तर में कमी का कारण भी हृदय रोग बढाने में सहायक है
*  महिलाओं में अक्सर सीने में दर्द की शिकायत होती है, हालांकि हर दर्द हृदय रोग का संकेतक नहीं है। लेकिन समय पर इसकी जांच जरूरी है
*  नाक, कंधे, कमर के ऊपर या पेट में असहजता, सांस लेने में दिक्कत, उल्टी होना, पसीना आना, हल्केपन का अहसास, थकावट महसूस होना महिलाओं में बीमारी के आम लक्षण हैं
* एंडोथेलियल डिस्फेक्शन महिलाओं में आम है, जिसमें धमनी की लाइनिंग सही तरीके से  रक्त के बहाव को विस्तारित नहीं करती। इससे अकस्मात मौत का ख़तरा रहता है।
* कोरोनरी आर्टरी डिसीज का आम तौर पर लिया जाने वाला उपचार एंजियोप्लास्टी और स्टैंटिंग है, लेकिन यह महिलाओं के लिए बढि़या विकल्प नहीं है।
* कोरोनरी आर्टरी डिसीज के लिए परंपरागत जांच जैसे एंजियोग्राम, ट्रेडमिल टेस्टिंग आदि महिलाओं में पूरी तरह से खरे नहीं उतरते हैं।