एचआईवी का पता लगते ही, सेक्स से मुंह फेर लेते हैं स्त्री पुरुष

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नई दिल्ली। एचआईवी एड्स का पता लगते ही स्त्री पुरुष का सेक्स के प्रति रुझान में गिरावट आ जाता है। वह इस कदर अवसाद से घिर जाते हैं कि सेक्‍स से उन्‍हें अरुचि हो जाती है और वह इससे मुंह फेर लेते हैं। एचआईवी एडस की जानकारी मिलते ही महिला और पुरुष दोनों के यौन व्‍यवहार में गिरावट आती है, लेकिन पुरुष कुछ ज्‍यादा ही अवसाद में घिरते हैं।

पीडि़तों का यौन व्यवहार पूरी तरह से बदल जाता है और sex से वह दूरी बनाना शुरू कर देते हैं। विशेषज्ञों की राय है कि दंपत्ति में से किसी एक को hiv aids होने पर कंडोम लगाकर सुरक्षित संभोग किया जा सकता है। यदि पति पत्‍नी दोनों को एचआईवी हो चुका है तो वे बिना condoms के भी सेक्‍स कर सकते हैं। सेक्‍स के प्रति व्‍यवहार में गिरावट स्‍वाभाविक है, लेकिन इससे जीने की इच्‍छा न होने का पता चलता है। इसलिए जरूरी है कि सही उपचार के साथ खुश रहा जाए।

Hiv Aids symptoms की जानकारी मिलते ही यौन व्‍यवहार में गिरावट
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (icmr) का राष्ट्रीय प्रजनन स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान द्वारा मुंबई के 407 hiv aids positive व्यक्तियों पर अध्ययन किया गया। गर्भनिरोधक विधियों के उपयोग की जानकारी, उनके यौन व्यवहार का रुख और उनमें कंडोम के उपयोग को बढावा देने के लिए इन सभी का साक्षात्कार किया गया। इस साक्षात्कार में यह सामने आया कि खुद के एचआईवी से पीडि़त होने की जानकारी होते ही 50 फीसदी महिलाएं और 64 फीसदी पुरुष सेक्स से मुंह मोड लेते हैं। इनके यौन व्यवहार में गिरावट आ जाती है।

छुपाने से भी बाज नहीं आते
इस साक्षात्कार में भाग लेने वालों में कुल 368 विवाहित जोडे में से 35 फीसदी ऐसे थे, जिनमें दोनों को एचआईवी था। 21 फीसदी ऐसे थे, जिनके केवल एक साथी को एचआईवी था जबकि 44 फीसदी ऐसे थे, जिन्होंने अपने साथी से अपने एचआईवी पीडि़त होने की बात पूरी तरह से छुपाई। ऐसे लोग अपने साथी के लिए हमेशा जोखिम भरा होते हैं और उन्हें कभी भी यह जानलेवा बीमारी दे सकते हैं।

कंडोम के उपयोग को लेकर दोहरा व्‍यवहार
एचआईवी पीडि़तों में 53 फीसदी ने माना कि वह बिना condoms संभोग करने का जोखिम कभी नहीं लेते। जबकि 32 फीसदी ऐसे थे, जो एचआईवी का इलाज तो करा रहे थे, लेकिन यौन संबंध बनाने में कंडोम का उपयोग बिल्कुल नहीं करते थे। ऐसे लोगों ने अपने साथी को भी यह जानलेवा बीमारी दे दिया। इन लोगों से जब पूछा गया कि आप एचआईवी के बारे में जानते-समझते हुए कंडोम का उपयोग क्यों नहीं करते? तो उनका जवाब था कि कंडोम का उपयोग करने से शारीरिक संबंध की गोपनीयता भंग होती है। ऐसे लोग यह समझते हैं कि यदि वह कंडोम ख़रीदेंगे तो लोगों को पता चल जाएगा कि वह संभोग करने के लिए इसे ख़रीद रहे हैं। इस कारण कंडोम ख़रीदने में इन्हें झिझक महसूस होती है।


बच्‍चा पैदा करने की भी इच्‍छा
अध्ययन में यह भी सामने आया कि एचआईवी पोजीटिव कुछ दंपित्त इसके बाद भी बच्चे पैदा करना चाहते हैं ताकि उनका वंश आगे चल सके। उनमें विश्वास होता है कि एंटीरेट्रोवाइरल चिकित्सा (ART) के उपरांत उनका शिशु एचआईवी ऋणात्मक होगा।

एचआईवी की जानकारी मिलते ही अवसाद में घिर जाता है व्‍यक्ति
इस बारे में दिल्ली मेडिकल काउंसिल के सदस्य डॉ॰ अनिल बंसल कहते हैं कि एचआईवी पीडि़त होने की जानकारी होते ही व्यक्ति अवसाद से घिर जाता है। इससे उसका यौन जीवन का कम होना लाजिमी है। ऐसे व्यक्तियों को लगता है अब जीवन समाप्त होने को है, जिस कारण उसे सेक्स से भी अरुचि हो जाती है। वहीं जहां पति-पत्नी दोनों को एचआईवी है वहां दोनों सेक्स सुख बराबर ले सकते हैं। वहां कंडोम प्रयोग की आवश्यकता नहीं होती।

 

Sandeep Deo