नई दिल्ली। हरलर सिंड्रोम से पीड़ित एक साल के बच्चे को कॉर्ड ब्लड स्टेम सेल (stem cell) प्रत्यारोपण किया गया, जिससे उसमें उत्पन्न विकृति दूर हो गई। कॉर्ड ब्लड प्रत्यारोपण करने में सर गंगाराम अस्पताल (SGRH) को सफलता मिली है। अस्पताल का दावा है कि उत्तर भारत में पहली बार इतने छोटे बच्चे में कॉर्ड ब्लड प्रत्यारोपण में सफलता मिली है। अमेरिका व यूरोपीय देशों में कॉर्ड ब्लड स्टेम सेल प्रत्यारोपण में दो से तीन करोड़ ‹पए का खर्च आता है, वहीं यहां 18 लाख का खर्च आया है।
एक साल की मान्या थी हरलर सिंड्रोम से पीड़ित
गंगाराम अस्पताल (sgrh) के पेडियाट्रिक्स हेमाटोलॉजी आंकोलॉजी व बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन के निदेशक डॉ॰ अनुपम सचदेवा के अनुसार, चेन्नई निवासी गणेश व राम्या की पुत्री मान्या हरलर सिंड्रोम से पीड़ित थी। अस्पताल की सेंटर फॉर मेडिकल जेनेटिक्स में डॉ॰ आईसी वर्मा व डॉ॰ रत्ना पुरी ने जुलाई 2011 में इसमें हरलर की बीमारी पाई थी। मान्या के पिता गणेश के अनुसार, जन्म के बाद मान्य की रीढ़ की हड्डी टेढ़ी थी और उसका अन्य बच्चों की तरह विकास नहीं हो रहा था। उसका चेहरा व जीभ अन्य बच्चों से बड़ा था और आंखों की रंग काला होने की जगह क्लाउडी था।
क्या है हरलर सिंड्रोम
गंगाराम अस्पताल के पेडियाट्रिक्स हेमाटोलॉजी आंकोलॉजी व बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन के वरिष्ठ सलाहकार डॉ॰ एसपी यादव के अनुसार, हरलर सिंड्रोम एक आनुवांशिक बीमारी है। इसमें एक ख़ास प्रोटीन शरीर के मस्तिष्क, हड्डियों, आंखों, त्वचा, हृदय व फेफड़े में जमा होने लगता है। इसे तोड़ने के लिए एंजाइम की जरूरत होती है, जो इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति में नहीं बनता है। इस कारण बड़ा व असामान्य चेहरा, बहुत मोटी त्वचा, अंधापन व विकास में बाधा पहुंचती है। इसमें एंजाइम थेरेपी की जरूरत होती है, जिस पर प्रति सप्ताह करीब 50 हज़ार का खर्च आता है। इसका स्थाई इलाज stem cell therapy cell अर्थात स्टेम सेल प्रत्यारोपण ही था, जिसके बाद शरीर में उस प्रोटीन को तोड़ने के लिए एंजाइम का निर्माण होने लगता है।
क्या है कॉर्ड ब्लड
डॉ॰ एस सी यादव के अनुसार, बच्चा मां से गर्भनाल की सहायता से जुड़ा होता है। इसी गर्भनाल में कॉर्ड ब्लड होता है, जिसे अक्सर जन्म के बाद फेंक दिया जाता है। लाल व श्वेत रक्तकणिका और प्लेटलेट्स का निर्माण करने की क्षमता इसमें होती है, इसलिए यह स्टेम सेल का बेहतरीन स्रोत है। इसकी बैंकिंग के लिए देश में अभी केवल 4 कॉर्ड ब्लड बैंक हैं। इनमें -150 डिग्री सेल्सियस पर 20 साल तक कॉर्ड ब्लड संरक्षित रखा जा सकता है।
मान्या को संक्रमण से बचाने की जरूरत
डॉ अनुपम सचदेवा के अनुसार, मान्या में स्टेम सेल का प्रत्यारोपण 10 अक्टूबर 2011 को किया गया है। अभी एक साल तक इसे संक्रमण से बचाए रखने की जरूरत है। मान्या के लिए उसके परिवार में दाता की खोज की गई, लेकिन किसी का स्टेम सेल उससे मैच नहीं हुआ। मुंबई के रिलायंस कॉर्ड ब्लड बैंक में एचएलए टाइप के मिलान वाला कॉर्ड ब्लड मिल गया। भविष्य में उसे दवा पर रहने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी।
देश में बुरी स्थिति
अस्पताल के चेयरमैन डॉ॰ डीएस राणा के अनुसार, अभी तक अस्पताल में सात कॉर्ड ब्लड प्रत्यारोपण समेत 75 स्टेम सेल प्रत्यारोपण हो चुके हैं। भारत में अधिक से अधिक केंद्रों की आवश्यकता है जहां अनरिलेटेड डोनर ट्रांस्प्लांट एवं कॉर्ड ब्लड प्रत्यारोपण किए जा सकें।