नई दिल्ली। मधुमेह के शिकार पुरुषों में प्रोस्टेट बढ़ने की समस्या सबसे अधिक सामने आ रही है। 50 साल की उम्र के बाद बढ़े हुए प्रोस्टेट की सर्ज़री कराने वालो में 60 फीसदी से अधिक पुरुष मधुमेह के शिकार होते हैं। वैसे होलमियम लेजर तकनीक (होलेप तकनीक) के कारण बढ़े हुए प्रोस्टेट की सर्ज़री बेहद आसान हो गई है।
पारंपरिक सर्ज़री में जहां रक्तस्राव, अधिक दिनों तक अस्पताल में रहने की समस्या और प्रोस्टेट के फिर से बढ़ने का ख़तरा रहता है, वहीं होलेप लेजर तकनीक में ऐसी कोई समस्या नहीं होती। यह चीड़ा-टांका रहित सर्ज़री है।
आरजी यूरोलॉजी एंड लेप्रोस्कोपी हॉस्पीटल के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक डॉ॰ बीएस बंसल ने कहा कि हमारे यहां अभी तक 10 हजार प्रोस्टेट की सर्ज़री हुई है, जो एशिया में सर्वाधिक है। इसमें 64 फीसदी मरीजों को मधुमेह की समस्या थी, 58 फीसदी को उच्चरक्तचाप था और 37 फीसदी माइनर अटैक के शिकार थे। ऐसी स्थिति में सर्ज़री बेहद मुश्किल होती है, लेकिन होलेप तकनीक से ऐसा संभव हो सका। इस तकनीक से 38 साल से लेकर 98 वर्ष तक और 100 ग्राम से लेकर 424 ग्राम तक के प्रोस्टेट का बिना चीर-फाड़ किए सर्ज़री की गई है।
संस्थान के मुख्य यूरोलॉजिस्ट डॉ॰ हरबंस सिंह ने बताया कि रोहतक निवासी 75 वर्षीय व्यक्ति का 424 के एनलार्ज़ प्रोस्टेट की सर्ज़री होलेप तकनीक का एक बेहतरीन उदाहरण है। प्रारंभिक सर्ज़री के समान या उससे कम में ही होलेप तकनीक से सर्ज़री हो जाती है और लोगों को अधिक परेशानी का सामना भी नहीं करना पड़ता है।