नई दिल्ली। बदलते मौसम में सर्दी-ज़ुकाम और बुखार के मरीजों की संख्या राजधानी में फिर से बढ़नी शुरू हो गई है। अक्टूबर महीने में वातावरण में नमी बढ़ने की वजह से वायरस का प्रभाव बहुत तेज हो जाता है, जिसमें वायरल बुखार होना आम है। इसके अलावा डाइफाइड, डेंगू, मलेरिया के मरीज भी बड़ी संख्या में अस्पतालों में पहुंच रहे हैं।
दिल्ली में खान-पान, सब्जी, दूध आदि में मिलावट के कारण लोगों, ख़ासकर बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, जिससे बुखार उनके मस्तिष्क पर चढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में मस्तिष्क और इंद्रियों का संपर्क टूट जाता है, जिससे दौरा पड़ना, मुंह से झाग निकलना, बेहोश हो जाना, बड़बड़ाना, कुछ समय के लिए यादाश्त गुम होने जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। यदि ऐसे समय में बुखार को कम नहीं किया गया तो वह दिमागी बुखार का रूप ले लेता है।
महाजन नर्सिंग होम के निदेशक व बाल रोग विशेषज्ञ डॉ॰ राकेश महाजन के अनुसार, पांच से 15 साल के बच्चों में तेज बुखार के दिमाग पर चढ़ने की घटना अक्सर हो जाती है। बड़ों में 103-104 डिग्री फारेनहाइट और बच्चों में 101-102 डिग्री फारेनहाइट में अक्सर ऐसा देखा गया है। जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है उन्हें यह जल्दी चपेट में लेता है।
आयुवर्धक हेल्थ केयर के निदेशक वैद्य आकाश परमार के अनुसार, इसे नर्वस इंडक्शन फेल होना कहते हैं। इसमें सेंसर ऑर्गन का संपर्क कुछ क्षण के लिए दिमाग से टूट जाता है। आयुर्वेद में इसे सन्नितपातज ज्वर कहते हैं। इसमें मरीज का वात, पित्त व कफ-तीनों तोष बढ़ जाता है।
सेंटर काउंसिल फॉर रिसर्च इन यूनानी मेडिसिन के हकीम सैय्यद अहमद खान के अनुसार, अचानक मौसम में बदलाव के कारण वायरल संक्रमण तेजी से फैलता है। यही नहीं, इस मौसम में मच्छर भी तेजी से पनपते हैं, जो डेंगू व मलेरिया जैसे बुखार के वाहक होते हैं। बचाव उपचार से अधिक जरूरी है, इसे समझने की जरूरत है।
रॉकलैंड अस्पताल की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ॰ वंदना कैंट के मुताबिक यदि बुखार बार-बार दिमाग पर चढ़ रहा हो तो यह ठीक संकेत नहीं हैं यह बच्चों के नर्वस सिस्टम को बुरी तरह से प्रभावित करता है।
एलोपैथ के अनुसार इलाज
डॉ॰ राकेश महाजन के अनुसार, तेज बुखार होने पर सिर, हाथ, पैर पर सादे पानी की पट्टी दें। फ्रिज के पानी का उपयोग बिल्कुल न करें। बुखार उतारने के लिए केवल पैरासिटामोल का उपयोग करें। अन्य दवा न लें। बच्चों को पैरासिटामोटल सिरप व बड़ों को टेबलेट दे सकते हैं।
आयुर्वेद के अनुसार इलाज
वैद्य आकाश परमार के अनुसार, तेज ज्वर में जयमंगल रस, सरंग पाणिए, सुदर्शन गन वटि, गिलोय सत्व, आनंद भैरव(ज्वर) व अमृतारिष्ट दिया जाता है। बड़ों के मुकाबले बच्चों को आधी खुराक दें।
यूनानी में इलाज
हकीम सैय्यद अहमद खान के मुताबिक तेज बुखार आने पर तुलसी व गिलोय को एक साथ उबालकर दिन में तीन से चार बार दें। इसके अलावा शरबत खाकसी, नीलोफर व खमीरा मरवारीद सुबह-शाम ले सकते हैं। नमक-चीनी का घोल बनाकर पीएं। पानी को उबालकर पूरा परिवार पीएं तो बेहतर रहेगा।