बच्‍चे तेजी से हो रहे हैं मोटे, युवाओं में मधुमेह की समस्‍या

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नई दिल्ली। भारत के स्‍कूली बच्चे तेज़ी से मोटापे के शिकार हो रहे हैं। शहरी जीवनशैली की वजह से उनमें  डायबिटीज़ (मधुमेह) की समस्‍या बढ़ रही है। हाल ही में किए गए एक अध्ययन में 70 प्रतिशत स्‍कूली बच्‍चों में आगे चलकर मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और दिल का रोग होने होने की आशंका को बल मिला है। जीवनशैली की वजह से ये बच्‍चे आगे चलकर इन गंभीर बीमारियों के शिकार हो जाएंगे। भारत इस समय डायबिटीज़ की महामारी का सामना कर रहा है जो तेज़ी से बढ़ती जा रही है और अगले 20 वर्षों में इससे प्रभावित होने वालों की आयु सीमा के निश्चित रूप से कम होने के संकेत हैं।


9 फीसदी किशोरों में पेट का मोटापा
फोर्टिस अस्‍पताल के मधुमेह रोग विशेषज्ञ डॉ॰ अनूप मिश्रा के अनुसार, मैंने हाल ही में अध्‍ययन किया, जिसमें यह पता चला कि 15-21 प्रतिशत स्‍कूली बच्चे मोटे हैं। इनमें लगभग 9 प्रतिशत किशोरों (9 से 18 वर्ष के बीच) को पेट का मोटापा है जो प्रत्यक्ष रूप से इंसुलिन प्रतिरोध और डायबिटीज़ से जुड़ा है।

जंक फूड व आरामतलबी पड़ रही है भारी
डॉ॰ मिश्रा कहते हैं, जंक फूड का अधिक सेवन और आरामपरस्त जीवन-शैली के तरीके युवा पीढ़ी को टाइप-2  डायबिटीज़ के शिकार बना रहे हैं। लगभग 68 प्रतिशत शहरी भारतीय बच्चे आरामपरस्त जीवनशैली जीते हैं और शायद ही बाहरी शारीरिक गतिविधि करते हैं।
डॉ॰ मिश्रा आगे बताते हैं, ``शहरी बच्चे वसा और चीनी से भरपूर खाद्य पदार्थ खाने के आदी हैं। वे पारंपरिक कम वसा वाले और स्वस्थ खाद्य पदार्थों से दूर हट रहे हैं जो फाइबर और माइक्रो न्यूट्रीएंट्स से भरपूर होते हैं। उन्हें सही पोषण और शारीरिक गतिविधि के विकल्पों के बारे में जानकारी देने की जिम्मेदारी माता पिता पर होती है, जिसमें वो सफल नहीं हो रहे हैं।

हर तरह का खतरा
मोटे युवाओं की नियमित रूप से डायबिटीज़ टाइप-2 जांच न होने के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। जब तक उनके निदान का पता चलता है, उनमें रक्तचाप और गंभीर हाइपरग्लाइसीमिया विकसित हो चुका होता है। यदि इसका उपचार न किया जाए तो डायबिटीज से नेत्रहीनता, पैर काटने की स्थिति, गुर्दे के रोग, दिल का दौरा और यहां तक कि स्ट्रोक या आघात भी हो सकते हैं।

शोध पत्र का निष्‍कर्ष
डॉ॰ मिश्रा द्वारा हाल ही में प्रकाशित एक शोध पत्र के अनुसार, शहरी भारत में कुल मिला कर, 15 मिलियन बच्चे मोटापे का शिकार हैं और 4 मिलियन को पेट का मोटापा है।  नियमित व्यायाम और स्वस्थ आहार व्यवस्था द्वारा, शरीर का सही वज़न बनाए रखना मधुमेह को दूर रखने का मूल मंत्र है और यह मधुमेह की जटिलताओं को समाप्त करने में भी मदद करता है। इन सरल दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन भारतीयों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनमें ने केवल मधुमेह विकसित होने का ख़तरा अधिक है, बल्कि उनमें डायबिटीज़ की जटिलताओं से पीड़ित होने की संभावना भी ज्यादा है।


आईसीएमआर का अध्‍ययन
आईसीएमआर द्वारा किए गए नवीनतम अध्ययन के अनुसार, 2011 के अंत तक भारत में 62.4 मिलियन मधुमेह पीड़ित हो जाएंगे जबकि 2010 में इनकी संख्या 50 मिलियन थी। डॉ॰ मिश्रा कहते हैं, ग्रामीण क्षेत्रों में तथा वंचित शहरी लोगों के वर्ग में मधुमेह रोगियो की संख्या में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है। डायबिटीज़ अब अमीर और समृद्ध लोगों का रोग ही नहीं रह गया है, यह मध्यम तथा निम्न सामाजिक-आर्थिक स्तर के लोगों को भी प्रभावित कर रहा है।

स्‍वास्‍थ्‍य सलाह
* स्वस्थ जीवन और डायबिटीज़ की रोकथाम सुनिश्चित करने के लिए उपयुक्त बॉडी मास इंडेक्स (कि.ग्रा.में वज़न/वर्ग मीटर में कद का अनुपात, भारतीयों के सामान्य मान 19-23 के बीच हैं) बनाए रखना बहुत महत्वपूर्ण है।

* पोषक तत्वो, हरी पत्तेदार सब्जियों, फलों, मेवों के सही मिश्रण से भरपूर आहार का सेवन करें और स्वास्थ्यवर्धक तेलों में खाना बनाएं।
* प्रतिदिन 30-45 मिनट तक ऐरोबिक व्यायाम करें।
* 30 वर्ष की उम्र के बाद नियमित स्‍वास्‍थ्‍य जांच कराने से शरीर की ब्लड सुगर और रक्तचाप स्तरों पर नज़र रखने में मदद मिलती है।
* बच्चे अपने माता-पिता की जीवनशैली आदतों का अनुसरण करते हैं, इसलिए, अभिभावकों को स्वस्थ खाने और जीवन-शैली की आदतों का अनुसरण करना चाहिए। teleविज़न का समय एक घंटे से कम होना चाहिए और बाहर खेलने का समय एक घंटे से अधिक होना चाहिए।