नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में हर तीन में से एक महिला ओस्टियोपोरोसिस की शिकार है। युवावस्था से ही छरहरी काया की हसरत में डायटिंग करने वाली लड़कियां 45 साल की उम्र के बाद ओस्टियोपोरोसिस से पीड़ित हो रही हैं। ऐसी लड़कियों में विटामिन डी की भयंकर कमी हो जाती है। यदि शहरी वर्ग में ओस्टियोपोरोसिस के बढ़ने की यही रफ़्तार रही तो अनुमानत: वर्ष 2013 तक साढ़े तीन करोड़ लोग ओस्टियोपोरोसिस से पीड़ित होंगे, जिसमें सबसे अधिक महिलाएं होंगी।
आर्थराइटिस फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ॰ सुशील शर्मा के अनुसार, 45 वर्ष की आयु की प्रत्येक तीन में से एक महिला और प्रत्येक पांच में से एक पुरुष ओस्टियोपोरोसिस का शिकार होता है। गांव से अधिक शहर के लोग इसके शिकार हो रहे हैं। यहां की लड़कियों में फिल्मी नायिकाओं की तरह जीरो साइज की हसरत उनके स्वास्थ्य पर हावी हो रहा है। 25 वर्ष की आयु में 'पीक बोन मास' होता है। अर्थात 25 साल में हड्डियों का घनत्व सबसे अधिक होता है, लेकिन डायटिंग की वजह से कैल्शियम और विटामिन डी की उनके शरीर में बेहद कमी हो जाती है, जो आगे जाकर उनकी हड्डियों को कमजोर कर देता है।
शहरी जीवन की जीवनशैली और स्वास्थ्य
डॉ॰ सुशील शर्मा के अनुसार, शहरी जीवन में शारीरिक श्रम की कमी, दिन भर बैठकर कार्यालय व घर में कंप्यूटर पर काम करना, स्मोकिंग व शराब का सेवन, बचपन में खेलकूद व भागदौड़ का अभाव आदि ऐसे कारण हैं, जो लोगों की हड्डियों को भुरभुरी व कमजोर कर देता है। हड्डियों का घनत्व बेहद कम हो जाता है, जिससे मामूली चोट लगने पर भी हड्डियों टूट जाती हैं। गिरने, चोट लगने, पिसलने आदि से हड्डियों नहीं टूटनी चाहिए। यदि ऐसा है तो यह ओस्टियोपोरोसिस की वजह से हो रहा है।
वसंत कुंज स्थित फोर्टिस अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ॰ अशोक कुमार के अनुसार, पतली व छोटी काया, ओस्टियोपोरोसिस का पारिवारिक इतिहास, सिगरेट पीना, धूम्रपान, शराब का अधिक सेवन, व्यायाम न करना और कम कैल्शियम का आहार लेना ओस्टियोपोरोसिस के मुख्य कारक हैं। इसके अलावा, महिलाएं रजोनिवृत्ति के बाद एस्ट्रोजन के कम होते स्तरों के कारण ओस्टियोपोरोसिस विकसित होने का उच्चतर जोखिम होती हैं। ओस्टियोपोरोसिस की शीघ्र पहचान और समय पर उपचार से भविष्य में हड्डियों के टूटने की संभावना कम हो जाती है।
ओस्टियोपोरोसिस के लिए जरूरी आहार व उपाय
* खाने में पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम और विटामिन डी लेना
* दूध, दूध से बने पदार्थ जैसे पनीर, दही, लस्सी का नियमित सेवन
* महिलाओं को प्रतिदिन दही लेना चाहिए
* गर्मी हो या जाड़ा, रोज आधे घंटे तक धूप सेंकना
* नियमित आधा घंटा व्यायाम करें