स्तन अनगिनत कोशिकाओं से मिल कर बना है। स्तन (breast) बनने की शुरुआत मासिक धर्म की शुरुआत के साथ होती है। इसका संबंध एस्ट्रोजेन नामक हारमोन से होता है। स्तन बनने की अवस्था से लेकर माहवारी बंद होने की अवस्था तक स्तन कोशिकाओं में निरंतर बदलाव की प्रक्रिया चलती रहती है।
हार्मोन के साथ होते हैं स्तनों में परिवर्तन
स्तन के सामान्य परिवर्तन श़रीर के हार्मोन में परिवर्तन के साथ-साथ होते हैं, जैसे कि स्तनों में माहवारी के पहले भारीपन आना तथा थोड़ा-थोड़ा दर्द होना। गर्भावस्था के दौरान Breasts के आकार में बढ़ोतरी होना, माहवारी बंद होने के दौरान आकार में छोटा हो जाना एवं निपल को दबाने पर कई बार हल्के पीले रंग का पानी आना एक सामान्य बदलाव का हिस्सा है।
यह सारे सामान्य परिवर्तन कोशिकाओं में निरंतर होते रहते हैं जो कि हार्मोंस कोशिकाओं के रिसेप्टर एवं जीन्स (आनुवांशिक कोशिकाएं) के तालमेल से एक व्यवस्थित एवं अनुशासित समूह की तरह आजीवन कार्य करते रहते हैं।
80 फीसदी असमान्य परिवर्तन कैंसरस नहीं होती
निरंतर चलने वाली प्रक्रिया में अगर थो़ड़ा भी बदलाव आता है या कोशिकाएं अनियंत्रित हो जाती हैं तो इसके फल स्वरूप स्तन में गांठ या निपल से खून के रिसाव के रूप में सामने आती है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि 80 प्रतिशत तक स्तन में होने वाले असामान्य परिवर्तन कैंसर कारक नहीं होते है। स्तन में असामान्य बदलाव को लेकर यदि 100 महिलाएं चिकित्सक के पास जाती हैं तो इसमें से सिर्फ 3-5 महिलाओं को ही स्तन कैंसर की आशंका होती है।
स्तन कैंसर और उसका उपचार
कैंसर शब्द हमारे अंतर्मन में केवल एक छाप छोड़ता है-यह एक ऐसी बीमारी है जो पूरा इलाज कराने के बाद फिर से हो सकती है। जिसका पूरी तरह निदान संभव नहीं है। पर सच्चाई कुछ और है। आज सन 2011 में यह धारणा निराधार और गलत है।
स्तन कैंसर से निपटने के लिए आज हमारे पास पांच तरह के हथियार हैं। इसमें सर्ज़री, कीमोथेरेपि, रेडिएशन थेरेपि, हार्मोन थेरेपी तथा टार्गेटेड थेरेपी प्रमुख हैं। जबकि सिर्फ एक दशक पहले तक ऐसा नहीं था। अध्ययन बताते हैं कि पहले मरीज तीसरी और चौथी अवस्था में पहुंचने के बाद ही चिकित्सक तक आ पाता था। आज स्तन कैंसर के मरीज पहली अथवा दूसरी स्टेज में ही चिकित्सकीय सलाह के लिए आने लगे हैं।
आमतौर पर मरीज के स्तन की गांठ 2-5 सेंटीमीटर के बीच की होती है जिससे स्तन कैंसर होने के बाद भी स्तन को बचाने का ऑपरेशन किया जा सकता है। कई बार स्तन कैंसर शुरुआती अवस्था में ही पकड़ लिया जाता है, जिससे मरीज को कीमोथेरेपि भी देने की जरूरत नहीं होती। चिकित्सा विज्ञान आज इस बीमारी को पूरी तरह से निदान करने में सक्षम हो गया है। इसका बहुत सारा श्रेय उन मरीजों को भी जाता है जिन्होंने स्तन कैंसर की प्रारंभिक अवस्था में इलाज कराने की इच्छा शक्ति जाहिर की है।