नई दिल्ली। यौन समस्याओं से जूझते पुरुषों द्वारा बाजार से दवा खरीदकर खाना भारी पड़ सकता है। सेक्स पावर बढ़ाने वाली आयुर्वेदिक व युनानी दवा में वियाग्रा का रसायन सिलेडिनाफिल जमकर मिलाया जा रहा है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। ऐसी दवाओं की वजह से शारीरिक संबंध तकलीफदेह हो सकता है, अनिंद्रा आपको घेर सकती है, हर वक्त सिर दर्द से फटता हुआ प्रतीत हो सकता है और कई बार यौन उत्तेजना ह़दय पर वार कर आपकी जान ले सकती है। दवाओं में जमकर हो रहे इस मिलावट को रोकने के लिए कोई सरकारी तंत्र विकसित नहीं हुआ है, इसलिए सावधानी आपको खुद ही बरतनी है।
दिल्ली सरकार की दिल्ली इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंस एंड रिसर्च (डिपसार) ने बाजार से उठाए गए 34 सेक्स पावर बढ़ाने वाली दवाओं के सैंपल की जांच में पाया है कि आयुर्वेदिक व युनानी यौनवर्द्धक दवा में आधा दर्जन ब्रांड ऐसे हैं, जिनमें लिंग की शिथिलता दूर करने, उसमें कड़ापन लाने और वीर्य के शीघ्रपतन को रोकने के लिए जमकर वियाग्रा के रसायन सिलेडिनाफिल और टाडालाफिल मिलाया जा रहा है। चूंकि इस केमिकल के कारण पुरुषों के लिंग का तनाव बना रहता है, जिससे इनकी बिक्री खूब हो रही है।
डिपसार के पूर्व निदेशक और जांच परियोजना के प्रमुख डॉ॰ एसएस अग्रवाल के मुताबिक वियाग्रा में सिलेडिनाफिल नामक रसायन मिलाया जाता है। यह रसायन गुप्तांग सहित शरीर की सभी धमनियों में रक्त बहाव को बढ़ा देता है। रक्त का तेज दबाव शीघ्रपतन को रोकता है, जिससे पुरुष अधिक देर तक संभोग करने में कामयाब रहते हैं। रक्त के इस तेज बहाव के कारण नसें चौड़ी हो जाती है और यही सारे शरीर पर दुष्प्रभाव डालता है। हृदय रोगियों के लिए तो यह बेहद ख़तरनाक साबित होता है। यही वजह है कि वियाग्रा तब तक नहीं खरीदा जा सकता जब तक कि फिजीशियन इसके लिए सुझाव न दे, लेकिन आयुर्वेदिक व यूनानी दवा लोग दवा दुकानों से ही खरीद लेते हैं, जिससे यह घातक साबित होता है।
ऐसी दवा के उपयोग से लोगों में सिर दर्द होना आम है। इसके अलावा लंबे समय तक लिंग के खड़े होने के कारण तकलीफ होना, मानसिक तनाव, नींद न आना, सीने में दर्द, हृदयगति रुक जाना, न्यूरो संबंधी समस्या, पेट की समस्या, नाक, आंख, पेशाब संबंधी दिक्कतें, त्वचा पर दाने, खरासें, खून की कमी होना, मानसिक समस्या, प्यास अधिक लगना जैसी समस्याएं उत्पन्न होने लगती है।
सिलेडिनाफिल का नुकसान इसी से समझ सकते हैं कि जब पहली बार वियाग्रा बाजार में आया था तो 13 महीने के अंदर 522 लोगों की मौत हो गई थी और 56 लोग तो 24 घंटे के अंदर चल बसे थे। इसलिए ऐसी दवाओं के उपयोग से पहले बेहद सावधानी की जरूरत है।