नई दिल्ली। बिना ओपन सर्ज़री किए एक महिला का गर्भाशय (uterus ) निकाला गया। 1700 ग्राम के गर्भाशय को दूरबीन प्रक्रिया के जरिए निकाला गया है। पीड़िता के गर्भाशय का ट्यूमर आठ माह के गर्भ के समान बड़ा था। महिला चलने-फिरने तक में असमर्थ थी।
पीड़िता आशा (परिविर्तत नाम) के अनुसार, उसे पेट में बहुत दर्द रहता था। दर्द इतना अधिक बढ़ गया कि वह अपना दैनिक क्रिया-कलाप भी नहीं कर पा रही थी। पीरियड बहुत ज्यादा और पीड़ा के साथ हो रहा था। आशा के गर्भाशय को निकालने वाली दिल्ली के ग्रेटर कैलाश स्थित आरजी स्टोन यूरोलॉजी एंड लेप्रोस्कोपिक हॉस्पीटल की लेप्रोस्कोपिक गायनोकोलॉजिस्ट डॉ॰ ऊषा कुमार के अनुसार, अस्पताल में आने के बाद आशा का अन्य जांच के साथ अल्ट्रासाउंड कराया गया, जिससे पता चला कि उनके uterus में बहुत बड़ा ट्यूमर है। टीम ने फैसला किया कि गर्भाशय लेप्रोस्कोपिक हिस्ट्रैक्टोमी (Laparoscopy Hysterectomy) के द्वारा निकाला जाए क्योंकि उनके केस में लेप्रोस्कोपिक मायोमैक्टॉमि संभव नहीं थी। इस सर्ज़री में पूरा तीन घंटे का समय लगा।
लेप्रोस्कोपिक हिस्ट्रैक्टोमी (Laparoscopy Hysterectomy) के फायदे
डॉ॰ ऊषा कुमार के अनुसार, लेप्रोस्कोपिक हिस्ट्रैक्टोमी एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें दूरबीन के जरिए गर्भाशय निकाला जाता है। इस प्रक्रिया में पेट में बिना चीरा लगाए ट्यूमर को निकाला गया है। पारंपरिक सर्ज़री के मुकाबले लेप्रोस्कोपिक हिस्ट्रैक्टोमी में न चीरा नहीं लगता, दर्द कम होता है, रक्त स्राव नहीं होता, सर्ज़री के बाद आराम की जरूरत नहीं होती, पेट पर कोई निशान नहीं रहता, घाव में संक्रमण की संभावना नहीं होती और सर्ज़री के बाद हार्निया व चिपकाव की आशंका भी समाप्त हो जाती है। यही नहीं, मधुमेह व उच्चरक्तचाप के रोगी भी नियंत्रित स्थिति में इस प्रक्रिया के तहत सर्ज़री करा सकते हैं।