नई दिल्ली। दिल्ली व मुंबई में औसतन केवल 44 प्रतिशत आईवीएफ विशेषज्ञ अपने मरीजों को मनोवैज्ञानिक परामर्श मुहैया कराते हैं जबकि सभी डॉक्टर यह जानते हैं कि उनके मरीज इस प्रक्रिया में बहुत ही ज्यादा तनाव से गुज़रते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्पष्ट सिफारिश है कि आईवीएफ (ivf treatment) के लिए मनोवैज्ञानिक परामर्श दिया जाना बेहद जरूरी है।
दिल्ली में 71 प्रतिशत व मुंबई में 81 प्रतिशत डॉक्टरों ने कहा कि वे अपने मरीजों के तनाव से वाकिफ हैं। लेकिन वे परामर्श मुहैया नहीं कराते। यह खुलासा हील फाउंडेशन द्वारा कराए गए एक सर्वे में हुआ।
ivf treatment करा रहे 60 प्रतिशत से अधिक दंपतियों ने कहा कि उनके आईवीएफ सेंटर द्वारा दिया गया मनोवैज्ञानिक सहयोग पर्याप्त नहीं था। इस सर्वे में पता लगा कि आईवीएफ थेरपी में मनोवैज्ञानिक परामर्श की अनदेखी की गई।
जनकपुरी स्थित गॉडियम आईवीएफ एंड गायनी सॉल्यूशंस की निदेशक डॉ॰ मानिका खन्ना कहती हैं, बांझपन एक बहुत ही तनाव देने वाली समस्या है। जो भी व्यक्ति और दंपति इससे ग्रस्त होते हैं उनके जीवन की शांति इससे बुरी तरह प्रभावित होती है। मनोवैज्ञानिक परामर्श से मरीज को सकारात्मक रवैया बनाए रखने में मदद मिलती है और वह व्याकुलता से राहत पाता है।
डॉ. खन्ना के मुताबिक सकारात्मक रवैया तनाव का स्तर और अवसाद का जोखिम कम करता है, इससे गर्भाधान के मौके बढ़ते हैं। इसलिए हर आईवीएफ सेंटर को यह सलाह दी जाती है कि बांझपन से ग्रस्त दंपतियों को मनोवैज्ञानिक विशेषज्ञ का परामर्श दिलाया जाए।
दुनिया भर के विशेषज्ञ कहते हैं कि आईवीएफ उपचार से संबंधित एक बहुत ही मुश्किल पहलू होता है ´भावनात्मक उथल-पुथल´ जिससे कई दंपति गुज़रते हैं क्योंकि वे इस प्रक्रिया के परिणामों को लेकर चिंतित रहते हैं।
किसी भी मरीज को भावनात्मक व मानसिक सहारा देने के लिए मनोवैज्ञानिक परामर्श और स्ट्रेस मैनेजमेंट बहुत अहम होता है। आईवीएफ के मामले में तो गर्भाधान की संभावनाओं को बेहतर बनाने में इनकी प्रमुख भूमिका होती है।
दिल्ली साइकियाट्री सेंटर के निदेशक डॉ॰ सुनील मित्तल कहते हैं, बांझपन के शिकार दंपति महत्वपूर्ण मानसिक संकट से गुज़रते हैं जिसमें अवसाद भी शामिल है। इससे आईवीएफ की सफलता दर पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। ऐसे कई अध्ययन व अनुसंधान हैं जो इन तथ्यों का समर्थन करते हैं। आईवीएफ उपचार के दौरान व बाद में दंपतियों को मनोवैज्ञानिक विशेषज्ञ की मदद की बहुत आवश्यकता होती है क्योंकि इसका संबंध उपचार के बेहतर परिणामों के साथ है।