नई दिल्ली। इमरजेंसी कंट्रासेप्टिव पिल्स (i pill) के प्रभाव-दुष्प्रभाव को जानने के लिए सरकार अध्ययन कराएगी। दिल्ली, मुंबई जैसे मेट्रो सिटी की स्कूली लड़कियों, किशोरियों व नाबालिग युवतियों द्वारा i pill को `sex pills' के रूप में उपयोग में लाए जाने की जानकारी होने के बावजूद सरकार बेबस है, क्योंकि इससे संबंधित आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।
दिल्ली की कई स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों ने आई पिल को `प्रिस्क्रिप्शन ड्रग' में शामिल करने की मांग की है, लेकिन अध्ययन के अभाव में इस पर अभी तक अमल नहीं हो सका है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (icmr) आई पिल के इस्तेमाल से जुड़े तथ्यों को प्रकाश में लाने के लिए इस पर अध्ययन की शुरुआत करने जा रहा है।
युवतियों द्वारा धड़ल्ले से i pill side effect को लेकर विशेषज्ञ चिंता जाहिर कर चुके हैं, लेकिन इस बारे में देश में अध्ययन व आंकड़ों के अभाव की वजह से किसी ख़ास निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा गया है। icmr ने आई पिल पर देश भर में संपूर्ण अध्ययन कराने का निर्णय लिया है।
अध्ययन का फोकस बिंदु
* किशोरियों व यौनकर्मियों के बीच आई पिल के बढ़ते प्रयोग व उसका दुष्प्रभाव।
* उपयोगकर्ताओं द्वारा इसके दोबारा उपयोग और नियमित परिवार नियोजन के साधनों पर इसका असर।
* प्रजनन के लिए उपयुक्त उम्र की महिलाओं में आई पिल को लेकर धारणा।
* मातृत्व मृत्यु पर आई पिल का असर।
* क्या आई पिल को राष्ट्रीय योजना में शामिल करने की वजह से गर्भपात और अवैध गर्भपात के प्रति महिलाओं की प्राथमिकता में कोई बदलाव आया है?
icmr के एक वैज्ञानिक के अनुसार, अविवाहित युवतियां यौन संबंध बनाने से पहले ही इन गोलियों को खा रही हैं, तो कई तो हर बार शारीरिक संबंध बनाने के बाद एक साथ कई गोलियां ले रही हैं। ऐसी भी युवतियां हैं जो एक महीने में छह से आठ गोलियां खा रही हैं। यह असुरक्षित यौन संबंध को बढ़ावा दे रहा है, जिनके अन्य साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं। इन गोलियों के अंधाधुध एवं अत्यधिक इस्तेमाल पर नियंत्रण की जरूरत है, लेकिन किसी प्रमाणिक अध्ययन के अभाव में इसे लेकर फिलहाल धुंध की स्थिति है। आईसीएमआर का अध्ययन इस धुंध को हटाने का काम करेगा।