आप क्‍या सोचते हैं आप अपने बच्‍चों का भविष्‍य बदल सकते हैं?

राजधानी दिल्ली में 11-11-11 के दिन लोगों ने इसमें एक और दो 11 और जुड़वा लिया। मांओं की मांग थी कि 11 नवंबर 2011 को सुबह 11 बजे अथवा 11 बजकर 11 मिनट पर उनके गर्भ से बच्चा निकाला जाए। सर्ज़री द्वारा मां के गर्भ से बच्चे को निकलवाने वालों की लाइन लग गई। इस दिन राजधानी के अस्पतालों में नॉर्मल डिलिवरी बहुत कम हुए। लोग बस किसी तरह 100 साल बाद पड़े इस तिथि को यादगार बनाने और अपने बच्चे का भविष्य बदलने की काल्पनिक चाह में 11 के फेर में पड़े रहे। यही वजह है कि जहां दिल्ली में प्रतिदिन 600 से अधिक बच्चे पैदा होते हैं, वहीं 11 के फेर में 1000 से अधिक बच्चे पैदा हुए।


इसे मूर्खता नहीं तो और क्‍या कहेंगे! मीडिया के बे-सिर पैर की बातों ने लोगों के दिमाग पर कब्‍जा कर लिया। उन्‍हें लगा कि वह 11-11-11 को यदि अपने बच्‍चे को सर्जरी द्वारा गर्भ से निकलवा लेंगे तो उसके भविष्‍य या भाग्‍य में एक चमत्‍कार जुड़ जाएगा! यह भेड़ चाल है और मीडिया इस भेड़ चाल का इस्‍तेमाल अपनी टीआरपी बढ़ाने के लिए करता है। लेकिन लोगों को क्‍या हो गया है, जो वह आधुनिकता का दंभ भरते हुए भी भेड़ और गदहे बनने पर उतारू हैं?

लेडी हार्डिंग अस्पताल की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ॰ सीमा सिंघल का कहना है कि एक दिन में दुनिया के हर कोने में हजारों बच्‍चे पैदा होते हैं। एक ही अक्षांश व देशांतर की स्थिति में भी कई हजार बच्‍चे पैदा होते हैं, लेकिन हर किसी का भाग्‍य एक-सा कहां होता है? जिन मां-बाप ने 11-11-11 के फेर में सिजेरियन शिशु की चाह की, वह आखिर अपना दिमाग कहां रख कर आए थे? इसी देश में भगवीता गीता जैसा ग्रंथ हुआ, जिसने कर्म का सिद्धांत गढ़ा और इसी देश में भेड़ मनुष्‍य हुए, जिनके लिए मीडिया अब सिद्धांत गढ़ रहा है।


डॉ. सीमा सिंघल के मुताबिक मेडिकली गर्भ में बच्चे का 40 सप्ताह तक विकास होता है। 37 सप्ताह के बाद उसे कभी भी निकाला जा सकता है, उसकी जिंदगी पर कोई ख़तरा उत्पन्न नहीं होता है। हां, इतना जरूर है कि नॉर्मल डिलिवरी की अपेक्षा समय से पहले हुए बच्चे में कुछ समय के लिए सांस की समस्या जरूर उत्पन्न हो सकती है। लेकिन सवाल नैतिकता का है, जिसे न मां-बाप मानने को तैयार हैं और न डॉक्‍टर।

समय से पूर्व केवल एक विशेष तिथि की चाह में बच्‍चे को सर्जरी द्वारा निकालना नैतिक व चिकित्‍सीय रूप से गलत है। लेकिन मीडिया ने लोगों का ऐसा मानस बना दिया है कि वह सही-गलत सब भूल रहे हैं। उन्‍हें लगता है कि वह इतिहास का हिस्‍सा बन रहे हैं। अरे इतिहास का हिस्‍सा बनना इतना आसान होता, जो सदियों से कुछ लोगों का नाम ही इतिहास की पुस्‍तक में दर्ज नहीं होता, बल्कि पूरी मानव जाति ही इतिहास की पुस्‍तक में दर्ज हो जाती, लेकिन न ऐसा कभी हुआ और न ही ऐसा कभी होगा।

दिमाग को खूंटी पर टांग कर मीडिया द्वारा सम्‍मोहित होने की जगह अपने दिमाग का इस्‍तेमाल कीजिए, क्‍योंकि ईश्‍वर ने आपको मनुष्‍य बनाया है। और मनुष्‍य जानवर से केवल दो ही कारणों से भिन्‍न है। एक मनुष्‍य में सोचने के लिए स्‍वतंत्र दिमाग है और दूसरा काम करने के लिए दो स्‍वतंत्र हाथ है। स्‍वतंत्र दिमाग व स्‍वतंत्र हाथ का इस्‍तेमाल कीजिए, आपका व आपके बच्‍चों का भविष्‍य खुद-ब-खुद संवर जाएगा, फिर किसी 11-11-11 या अगले साल आने वाले 12-12-12 का इंतजार आपको नहीं रहेगा!