प्रतापगढ़, उप्र। उप्र में कई चरणों का चुनाव पूरा हो चुका है। सभी राजनैतिक दलों ने वोट हासिल करने के लिए जाति और धर्म का जमकर कार्ड खेला है। किसी के घोषणा पत्र में शिक्षा का अधिकार, भूमि का अधिकार, बेटियों को बचाने जैसे गंभीर मुद्दे शामिल नहीं हैं। कुछ सामाजिक संगठन इन अधिकारों को सही ढंग से लागू करने के लिए राजनैतिक दलों और आम लोगों के पास जा रहे हैं ताकि अन्य चरण के चुनाव में ये मुद्दे बन सकें, लेकिन उम्मीद नहीं है कि जनता के अधिकार से जुड़े ये विषय मुद्दे भी बनेंगे।
तरुण चेतना संस्थान, नारी संघ व उत्तर प्रदेश लैंड एलायन्स ने जिले के विभिन्न राजनैतिक दलों को ज्ञापन देकर महिलाओं का भूमि के उपयोग व उसपर उनका नियंत्रण सुनिश्चित करने की मांग की। तरुण चेतना के निदेशक मु. नसीम अंसारी ने बताया कि सरकार ने हिंदू उत्तराधिकार क़ानून 1956 में संशोधन करके 2005 में बेटियों को भी संयुक्त संपत्ति में बराबर का हिस्सेदार व पति की मृत्यु के बाद विधवा पत्नी को हिस्सेदार तो बना दिया, परंतु इस संशोधित क़ानून के अनुसार उन्हें यह अधिकार तभी मिलेगा जब वह इसकी मांग करेंगी। जबकि भारतीय परंपरा में ज्यादातर महिलाएं इसकी मांग ही नहीं करती। जमीन पारिवारिक सत्ता में भागीदारी का एक सशक्त माध्यम है और जब तक इस क़ानून में बदलाव करके महिला को स्वत: उत्तराधिकारी नहीं बनाया जाता है तब तक महिलाओं की स्थिति में सुधार होना मुश्किल है।
उप्र लैंड एलायन्स की मुन्नी बेगम ने बताया कि खेतों में ज्यादातर काम महिलाएं ही करती है, जबकि जेंडर असमानता के कारण उन्हें व्यवहार या सरकारी आंकड़ों में किसान माना ही नहीं जाता। महिलाओं को स्टैंप शुल्क आदि में छूट देने के बावजूद सिर्फ 6 प्रतिशत महिलाओं के पास अपनी जमीन है, एक फीसदी महिलाएं ही सरकारी कृषक प्रशिक्षण में भाग लेती हैं तथा चार प्रतिशत महिलाएं ही संस्थागत ऋण लेती हैं। जबकि आठ प्रतिशत महिलाओं का ही कृषि आय पर नियऩ्त्रण रहता है, जो काफी चिंताजनक है।
मुन्नी बेगम ने जोर देकर कहा कि जरूरत इस बात की है कि जेंडर समानता लाने के लिए सरकारी आंकड़ों में महिलाओं को भी किसान का दर्जा मिले व सरकार से मिलने वाली जमीन व पट्टा महिलाओ के नाम से हो तथा महिलाओ के नाम से जमीन ख़रीदने हेतु बैंको से सस्ते ब्याजदर पर ऋण मिलने के साथ ही साथ महिलाओं के हिस्से की जमीन का ग्राम स्तर पर रिकार्डिंग भी की जाय।
मुन्नी बेगम के अनुसार महिलाओ के हित में भूमि सुधार व पुनर्वास के इसी उददेश्य से इस उप्र चुनाव 2012 के मद्देनज़र आक्सफाम इंडिया, वोमेन पावर कनेक्ट व उपला जैसी अनेक सहयोगी संस्थाएं लैंगिक असमानता को पाटने और शानदार विकास हेतु अपनी प्रतिबद्धता दर्शाते हुए इन मुद्दे पर राजनैतिक दलों व प्रत्याशियों का ध्यान आकृष्ट करा रही हैं, ताकि चुनाव जीतने के बाद इन मुद्दों पर माननीय विधायकों द्वारा सार्थक पहल की जा सके।