महिलाएं मजबूत और आपराधिक मामले भी खूब

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लंदन। भारत की स्थानीय राजनीति में महिलाओं के बढ़ते प्रतिनिधित्व से उनके खिलाफ होने वाले अपराध के दर्ज होने में बेहद बढोतरी हुई है। ब्रिटेन के यूनिवर्सिटी ऑफ वॉर्विक के सेंटर फॉर कंपटीटिव एडवांटेज इन ग्लोबल इकोनॉमी (केज), हॉर्वर्ड बिजनेस स्कूल और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के कराए अध्ययन में इसे सकरात्मक बताया गया है।

यूनिवर्सिटी के अनुसंधानकर्ताओं ने बताया कि महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ने की बजाए उन अपराधों की ज्यादा जानकारी मिलनी शुरू हो गई है। शोधकर्ताओं ने 1993 में पारित किए गए पंचायती राज सुधार (panchayati raj in india) के असर को जानने के लिए इस अध्ययन को अंजाम दिया।

इसमें स्थानीय शासन में एक तिहाई सीटें महिलाओं को दी गई। उन्होंने पाया कि महिलाओं के स्थानीय प्रशासन में आने के बाद उनके खिलाफ अपराधों के दर्ज होने में औसतन 44 फीसदी का इजाफा हुआ।

बलात्कार के मामलों के दर्ज होने में 23 फीसदी की बढोतरी हुई जबकि अपहरण के मामले सुधार लागू होने से 2004 तक 13 फीसदी बढे़। शोधकर्ताओं का मानना है कि महिलाओं के खिलाफ अपराध के ज्यादा मामले दर्ज होने के पीछे दो वजहें हो सकती हैं।
पहला, महिला राजनीतिकों की ज्यादा संख्या होने के कारण महिलाओं के खिलाफ अपराध को लेकर पुलिस ज्यादा सक्रिय हुई है। महिलाओं के आरक्षण के बाद उनके अपहरण सहित अन्य आपराधिक मामलों में गिरफ्तारियों की संख्या भी बढ़ी है।

अध्ययनकर्ताओं ने कहा कि दूसरी वजह महिला नेताओं से मिलने और सहानुभूति पाने के कारण महिला पीडि़त अपराधों को दर्ज कराने के लिए ज्यादा प्रोत्साहित होती हैं। केज में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर डॉ. आनंद मणि ने कहा कि पहली बात जो हम बताना चाहते हैं, वह यह कि यह अच्छी खबर है। सुधार से पहले की तुलना में अपराध के मामले ज्यादा दर्ज हो रही हैं। यह अपराध के मामलों में बढोतरी नहीं है।


साभार: एजेंसी