संभोग में उतरने से पहले फोर प्‍ले में करें दंतक्षत का प्रयोग

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आचार्य वात्‍स्‍यायन ने प्रेम के आवेग में स्‍त्री-पुरुष द्वारा एक-दूसरे को नोंचने-खसोटने और दांतों से काटने के विधान की भी चर्चा की है। आधुनिक भाषा में कहें तो संभोग से पहले फोर प्‍ले में नाखुन, जीभ और दांतों की मुख्‍य भूमिका होती है। अधिकांश दंपत्ति या प्रेमी-प्रमिका को न for play की सही जानकारी होती है और न वह इसका उपयोग करना जानते हैं। इनके उपयोग से रिश्‍तों की प्रगाढ़ता बढ़ती है। आपस का वासानात्‍मक संबंध प्रेम से सराबोर हो उठता है और एक-दूसरे की चाह हमेशा के लिए बनी रहती है। sex के दौरान दांतों से प्रयोग को लेकर आचार्य वात्‍स्‍यायन ने जो सुझाव दिए हैं, वह यहां प्रस्‍तुत है-

* संभोग में प्रवेश से पूर्व एक-दूसरे में यौन इच्‍छाओं को जागृत करने का प्रयास करना चाहिए ताकि संभोग में सच्‍चे आनंद की प्राप्ति हो सके

* प्रेमी जोड़े ऊपर के होंठ, जीभ और आंखों को छोड़कर शरीर के अन्‍य सही हिस्‍सों पर अपने दांतों के निशान छोड़ सकते हैं

* निचले होंठ, गला, गाल, सीना, स्‍तन, पेट, पीठ, नाभि, जांघें, जांघों के मिलने का स्‍थान, जांघों के बीच का स्‍थान, गोलाकार नितंब-ऐसे स्‍थान हैं, जहां जीभ से सहलाने और हल्‍के दांतों के प्रहार से यौन उत्‍तेजना भड़क उठती है

* दांतों का प्रयोग ऐसे करें, जिससे बाहरी अंग पर कोई लाल निशान न बने, लेकिन प्रेमीजनों के अंदर चुभन का अहसास होता रहे। ऐसे दंतक्षत को आचार्य ने गूढक कहा है। इसमें केवल अगले दो दांतों से ही काटने का निर्देश दिया गया है। इससे निशान भी नहीं बनेंगे और मीठा अहसास भी जगेगा

* ऐसा दंतक्षत जिसमें लाल निशान उभर आए और जहां काटा गया है वहां सूजन या उभार आ जाए उसे उच्‍छूनक कहा है। यह अक्‍सर पुरुष द्वारा स्‍त्री के स्‍तन के ऊपर, उसके चुचूक और जांघों पर किया जाता है। नहाते वक्‍त या अकेले में जब स्‍त्री इसे देखती है तो वह अंदर ही अंदर प्रेम के रोमांच को याद कर सिहर उठती है और कई बार खुद से ही लजा जाती है।

* निचले होंठ पर गड़ाए जाने वाले दांतों के निशान से बिंदू का आकार बनता है। आईने में खुद को देखने पर यह प्रेमी-प्रेमिका को उस मिलन वाली रात की याद दिलाता रहता है।

* ऊपर के दांतों व होंठ की सहायता से गाल पर दंतक्षत करना चाहिए। यह गाल को चूमता हुआ प्रतीत होता है। कई बार अन्‍य स्‍त्री जब किसी स्‍त्री के गालों पर ऐसा निशान देखती है तो वह भी अपने पिया से मिलन को आतुर हो उठती है।

* स्‍त्री को गले पर दांतों के प्रहार से बहुत अधिक सुख और गुदगुदी का अहसास होता है। पुरुष को चाहिए कि वह संभोग काल में स्‍त्री के गले और कान पर हल्‍के दांत का स्‍पर्श करे।

* कामातुर पुरुष एक के बाद दूसरा और दूसरे के बाद तीसरा- इस तरह अनेक दांतों के निशान स्‍त्री के गले, बदल और जांघों पर बनाता चला जाता है, जिससे स्‍त्री के मुंह से सिसकारियां फूट पड़ती हैं। हां यदि स्‍त्री कामातुर है तभी उसे यह अच्‍छा लगेगा, अन्‍यथा यह उसे कष्‍ट भी दे सकता है। इसलिए पहले यह जरूरी है कि पुरुष स्‍त्री के अंदर यौन उत्‍तेजना को जगा दे और फिर दोनों मिलकर संभोग के आर्गेज्‍म का आनंद लें।

* कामातुर स्‍त्री अक्‍सर पुरुष के सीने पर दांत के और पीठ पर नाखुन के निशान छोड़ जाती है। यह बाद में भी पुरुष के अंदर वासना की आग भड़काता रहता है।