बॉस शब्द के साथ ही एक रोबीला कडक चेहरा जेहन में उभर जाता है जिसके माथे पर शिकन होती है और जिसके होंठों पर शायद ही कभी मुस्कान तैरती है। लेकिन बदलते वक्त के साथ ही अब इसमें भी बदलाव आ रहा है और बॉस और कर्मचारियों के बीच के संबन्धों में मधुरता आ रही है।
ओआरजी इंटरनेशनल ने कर्मचारी और बॉस के बीच रिश्ते को जानने के लिए हाल ही में एक सर्वे कराया। इस सर्वे को इंपलॉई इंगेज्मेंट इंडेक्स :ईईआई: का नाम दिया गया। इस ग्लोबल इंगेजमेंट इंडेक्स 2011 में भारत और चीन पिछले साल की तुलना में आठ स्थान उूपर उठे हैं।
18 देशों की सूची में भारत को पहला जबकि चीन ने दूसरा स्थान पाया। यानी भारत में बॉस और कर्मचारी के रिश्ते अन्य देशों की तुलना में सबसे मधुर पाए गए हैं।
सू़ची में जापान सबसे नीचे आया जहां महज 33 फीसदी लोग ने कहा कि वे बॉस से अ'छे संबंध की परवाह करते हैं। वैश्विक स्तर पर 53 फीसदी लोग बॉस के साथ अ'छे संबंध को तरजीह देते हैं।
लेकिन इस बदलाव के बावजूद आज भी सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक पर जब बात 'बॉस' की आती है लोगों के हाथ थम जाते हैं और ऐसे लोग कम ही मिलते हैं जो बॉस को अपनी फेंड्स लिस्ट में शामिल करना चाहते हैं। अमेरिका की लिबर्टी म्यूचुअल के रिसपांसिबिलिटी प्रोजेक्ट के एक सर्वे में बताया गया कि 56 फीसदी अमेरिकी फेसबुक पर बॉस को दोस्त बनाना गैरजिम्मेदाराना मानते हैं जबकि 62 फीसदी बॉस का मानना है कि अपने कर्मचारियों के साथ फेसबुक पर दोस्ती करना गलत है।
बदलते परिवेश में फेसबुक से इतर विशेषज्ञों की राय अलग है। ऑरा पर्सनालिटी डेवलपमेंट की निदेशिका विष्णु प्रिया का कहना है कि बॉस की भूमिका बदल रही है और बॉस का नाम लेते अब रोबिले डरावने चेहरे की तस्वीर नहीं उभरती।
उनका कहना है कि बॉस खुद को बदल रहे हैं और कर्मचारियों के साथ दोस्ताना व्यवहार कर रहे हैं क्योंकि अब ऐसा मानना है कि लोगों की क्षमता का सही उपयोग उनको डरा धमका कर नहीं बल्कि अपने साथ जोड़कर किया जा सकता है। ओआरजी इंटरनेशनल के सर्वे का हवाला देते हुए प्रिया ने बताया कि यह सर्वे कर्मचारी और बॉस के बीच रिश्ते को जानने के लिए किया गया।
प्रिया कहती हैं कि बदलते परिवेश के साथ जहां आप बदल रहे हैं वहीं इस रिश्ते में भी बदलाव लाइए और बॉस डे के दिन जाइए और अपने बॉस को गुलाब का एक फूल या एक ग्रिटिंग कार्ड दीजिए। आखिर उनकी खुशी में ही आपके कैरियर की खुशी जो छिपी है।
लेकिन एक अन्य जानी मानी कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी का मानना है कि कर्मचारियों में दशहत नहीं भरी जानी चाहिए लेकिन उनसे कुछ दूरी जरूर बनाए रखनी चाहिए अन्यथा उनसे काम लेना मुश्किल हो जाता है।