भारतीय पुरुष बिस्तर में वर्चस्ववादी रवैया अख्तियार करने में दुनिया के सभी देशों के मर्द से कहीं आगे हैं। उनमें सेक्स की चाह महिलाओं से कहीं अधिक होती है। वे हमेशा संभोग करने के लिए तैयार रहते हैं। संभोग के प्रति पुरुषों की आतुरता इतनी अधिक होती है कि वह इसके लिए महिला साथी का यौन उत्पीड़न करने तक से नहीं चूकते।
ऐसे पुरुष पत्नी से जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाने में कोई बुराई नहीं समझते हैं। भारत में 10 में से 6 पुरुषों का व्यवहार कुछ ऐसा ही है। रवांडा जैसे कम विकसित देशों के पुरुष भी जबरदस्ती यौन संबंध बनाने के मामले में भारतीय पुरुष से कहीं अधिक संयमशील हैं।
बेडरूम में वर्चस्ववादी हैं भारतीय पुरुष
अंतरराष्ट्रीय महिला शोध केंद्र ने छह देशों में पति-पत्नी संबंध, दांपत्य जीवन और उससे जुड़े विभिन्न पहलुओं पर सर्वे किया। इस सर्वे में शामिल एक चौथाई भारतीय पुरुषों ने यह स्वीकार किया कि उन्होंने कभी न कभी अपनी पत्नी या महिला साथी के साथ जबरदस्ती संभोग किया है।
सर्वेक्षण के अनुसार, यौन संबंध को लेकर पुरुष अभी भी बेडरूम में वर्चस्ववादी हैं। यही कारण है कि उनका यौन संबंध यौन उत्पीड़न में बदल जाता है। सर्वे में शामिल 24 फीसदी पुरुषों का कहना था कि उन्होंने अपने जीवन में यौन उत्पीड़न किया है। 20 फीसदी ने माना कि उन्होंने कभी न कभी शारीरिक संबंध बनाने के लिए जबरदस्ती की है। 14 प्रतिशत का मानना था कि पिछले एक साल में ही उन्होंने अपनी साथी को यौन क्रिया के लिए मजबूर किया है।
यह सर्वे भारत सहित ब्राजील, मैक्सिको, रवांडा, क्रोसिया व चिली के पुरुषों के बीच किया गया। तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो भारत की अपेक्षा कम विकसित इन देशों के पुरुषों का व्यवहार अपनी पत्नी के साथ भारतीय पुरुषों की अपेक्षा अधिक बेहतर है। ब्राजील में एक मैक्सिको में 3 और रवांडा, क्रोसिया व चिली में 4 प्रतिशत पुरुषों ने अपनी महिला साथी का यौन उत्पीड़न किया है। यह भारतीय पुरुषों के लिए बेहद शर्मनाक है।
'लिंग' की श्रेष्ठता का दंभ और कंडोम से परहेज
भारतीय पुरुषों का मर्दाना रवैया सिर्फ यौन उत्पीड़न में ही नहीं बल्कि अपने पौरुष के प्रतीक 'लिंग' को श्रेष्ठ ठहराने की कोशिश से भी झलकता है। 10 में से 9 पुरुषों का मानना है कि अगर संभोग के समय पुरुष लिंग उत्तेजित न हो पाये या वीर्य का शीघ्रपतन तो वह बेहद शर्मिंदा महसूस करते हैं। 47 प्रतिशत का मानना है कि यदि उनकी पत्नी उन्हें कंडोम का प्रयोग करने के लिए कहती है तो उन्हें बहुत गुस्सा आता है। वह पत्नी से ऐसी अपेक्षा नहीं कर सकते और यह भी मानते हैं कि कंडोम से यौन सुख में बाधा पहुंचती है।
आखिर मिल ही जाती है यौन संतुष्टि
यौन संतुष्टि के मामले में भारत के पुरुष व महिला बेहद आश्चर्यचकित करते हैा भारतीय पुरुष और महिला दोनों में अन्य पांचों देशों की अपेक्षा में यौन संतुष्टि के ऊंचे स्तर पाये गये हैं। भारत में 98 फीसदी पुरुष और 97 प्रतिशत महिलाएं मानती हैं कि उनका यौन जीवन संतुलित है और वे अपने यौन संबंध से पूरी तरह संतुष्ट हैं।
बेडरूम के बाहर भी हैं हिंसक
भारतीय पुरुषों द्वारा किया गया यह उत्पीड़न न केवल बेडरूम तक सीमित है, बल्कि वह पत्नी पर हाथ उठाने में भी आगे हैं। 65 प्रतिशत भारतीय पुरुषों का मानना है कि पत्नी को कभी-कभी पीटना जरूरी होता है। 68 फीसदी का कहना है कि परिवार को बनाए रखने के लिए महिलाओं को पिटाई सह लेना चाहिए।
पारिवारिक जिम्मेदारी से पलायन
सर्वे में शामिल 80 फीसदी भारतीय पुरुष का मानना है कि बच्चों का लालन-पालन महिलाओं का काम है। 10 में से 9 पुरुष सोचते हैा कि बच्चों का डायपर बदलने जैसे काम सिर्फ महिलाओं के लिए है। सर्वे यह दर्शाता है कि भारतीय पुरुष महिलाओं की भूमिका को यथा स्थिति बनाये रखने के पक्षधर हैं। आधे से अधिक महसूस करते है कि महिला अधिकारों को प्रोत्साहन मिलने से उनको नुकसान होगा। बाकी देशों में 90 प्रतिशत पुरुष इस तरह के विचारों से सहमत नहीं हैं।
समलैंगिक नहीं माचो मर्द की छवि
भारती पुरुष माचो मैन की छवि में फिट बैठते हैं। 10 में से 9 का कहना है कि अपमान किए जाने पर वो अपनी प्रतिष्ठा के लिए मरने-मारने को हमेशा तैयार रहेंगे। यह अनुपात सर्वे में शामिल सभी देशों को मिलाकर भी सबसे अधिक है। समलैंगिता को भारतीय मर्द पसंद नहीं करते। 10 में से 9 पुरुष मानते है कि यदि उनका बेटा समलैंगिक हुआ तो उन्हें शर्मिंदगी उठानी पड़ेगी। समलैगिक लोगों को अपने आसपास पाकर 90 फीसदी पुरुष अटपटा महसूस करते हैं।
निष्कर्ष
शोध के अनुसार, यौन सुख और घर के कामकाज परस्पर संबंधित हैं। यदि पुरुष भी घरेलु काम में मदद करते है तो ऐसे में महिला और पुरुष, दोनों का जीवन यौन जीवन बेहतर कहा जा सकता है। पुरुष व महिला के संबंधों में जितनी अधिक असमानता होगी, उनके दांपत्य जीवन और बिस्तर सुख में उतने ही अधिक अंतर देखने को मिलेंगे।