हिटलर दीदी वास्‍तविक जीवन में है बड़ी चंचल

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दीपिका शर्मा। साल 2011 में आयोजित किए गए जी रिश्ते अवॉर्ड में टेलीविजन अदाकार रति पांडे ने फेवरेट बहन और फेवरेट नई जोडी का अवॉर्ड जीतकर अपनी लोकप्रियता को एक नए मुकाम पर पहुंचा दिया। बिहार की राजधानी पटना की रहने वाली रति पांडे को television जगत में पहला ब्रेक मिला स्‍टार वन प्रसारित होने वाले कार्यक्रम `मिलें जब हम तुम´ से, जिसमें उन्होंने नूपुर भूषण नामक कॉलेज गर्ल की भूमिका निभाई थी। उसके बाद वो स्‍टार प्लस पर प्रसिद्ध डांस शो `नचले वे विद सरोज खान´ में भी नज़र आईं। पर उन्हें असली शोहरत मिली जी टीवी के धारावाहिक `हिटलर दीदी´ से। इस भूमिका को अपनाते ही न सिर्फ रति ने दो अवॉर्ड जीते, बल्कि उनकी गिनती आज भारतीय टीवी जगत की सबसे चहेती अदाकरों में होने लगी है।  

प्राथमिकता पैसा नहीं भूमिका
बातचीत में उन्होंने television serial `हिटलर दीदी´ में अपने किरदार इंदिरा शर्मा के बारे में बातचीत की। रति पांडे ने बताया कि किसी भी रोल में उनकी प्राथमिकता पैसा नहीं होता। पहले वह निश्चित कर लेना चाहती है कि रोल कितना दमदार है। उन्‍हें न सिर्फ एक्टिंग से प्यार है, बल्कि वे अपने किरदार को पूरी जीती हैं। रति मानती हैं कि इंदिरा का किरदार हमारे देश की कई लडकियों के जीवन से मेल खाता है। हर कोई अपने जीवन में कभी न कभी इंदिरा जैसी लडकी से जरूर मिलता है। यह किरदार थोडा कठोर जरूर दिख़ता है, लेकिन रति को इसमें एक चैलेंज नज़र आया।

लोग अब मुझे पहचानने लगे हैं
hitler didi से लोग उन्हें पहचानने लगे हैं। रति के अनुसार, मुझे अच्छा लगता है जब मैं कहीं मार्केट में होती हूं या बाहर निकलती हूं, तो लोग मुझे देख़ते ही पहचान लेते हैं और हिटलर-हिटलर कहकर पुकारते हैं। इतने कम समय में television जगत में अपनी एक मज़बूत पहचान बना लेना मुश्किल तो है, पर इससे खुद में विश्वास आता है।

सास-बहु का ड्रामा पसंद नहीं
रति फिलहाल कोई सास-बहु ड्रामा वाला सीरियल नहीं करना चाहतीं। उनहें सास बहू की दुश्मनी और रोना-धोना टाइप सीरियल  पसंद नहीं हैं। उनका जमाना जा चुका है और पब्लिक भी उनमें कोई ख़ास रूचि नहीं लेती। ऐसे धारावाहिक में महिलाओं की सिर्फ दो ही तरह की भूमिका रह जाती हैं। या तो वे वैंप के किरदार में नज़र आती हैं जो हमेशा साजिश करती रहती हैं और या फिर बेचारी बनकर रह जाती हैं जो हमेशा मानसिक दबाव में रहती है, जबकि महिलाओं के पास कई ऐसे रोल्स है जो वह कर सकती हैं।

गाने का भी शौक है रति को
रति आगे कोई रियलिटी शो भी जरूर करना चाहेंगी, परंतु वो शो संगीत से जुडा होना चाहिए। संगीत को रति अपने लिए एक रिलेक्सेशन थेरेपी मानती हैं। रति को गाने का भी शौक है। वे पीयूष सोनी के साथ एक एलबम भी लॉन्च करने वाली थी, परंतु उस प्रोजेक्ट में कुछ देरी हो गई।


असल जिंदगी में इंदिरा शर्मा से अलग हूं
रति कहती है, मुझे इंदिरा का रोल इसलिए पसंद आया क्योंकि इस लडकी के जीवन में कुछ दूसरी तरह की परिस्थितियां हैं। अपने असली जीवन में वे हिटलर दीदी की इंदिरा से बिलकुल अलग हैं। उनहें दोस्त बनाना और लोगों से मिलना-जुलना बहुत पसंद हैं। अपने को स्‍टार के बारे में भी रति एक सकारात्मक रवैया रख़ती हैं।

सेट पर हमेशा धमाल रहता है
वे बताती हैं कि उनकी पूरी यूनिट बहुत फ्रेंडली है और सेट पर हमेशा मौज-मस्ती का माहौल रहता है। सुमित वत्स, स्मिता और सभी एक्टर के साथ उनके अच्छे संबंध हैं। हम एक परिवार की तरह हैं। दिल्ली से लेकर मुंबई और मकाऊ तक हर जगह शूटिंग का मजेदार अनुभव रहा रति का। मुंबई के लोग काफी खुले विचारों के हैं और यह बात रती को सबसे ज्यादा पसंद आई। मकाऊ जैसे खूबसूरत जगह में शॉपिंग करके भी उन्‍हें काफी आनंद आया। रति ने शूटिंग के अलावा वहां शॉपिंग भी एन्जॉय की।


मम्‍मी-पापा ने हमेशा मुझे बेटा माना
हमने जब रति से पूछा कि एक छोटे शहर से ताल्लुक रख़ते हुए परिवार में एक्टिंग को लेकर माता-पिता को राजी करने में कैसी समस्याएं आई-तो रति ने बताया कि उनके परिवार वाले काफी खुली मानसिकता के हैं और उनहें बेटी के बजाए अपना बेटा मानते हैं। अपने कॅरिअर को लेकर रति काफी गंभीर हैं और वे बताती हैं कि यदि आगे उनहें कोई दमदार नेगेटिव रोल मिला तो उसे अपनाने में वे नहीं हिचकिचाएगीं।

बॉलीवुड में जगह बनाने की चाहत
इसके अलावा वे बॉलीवुड जगत में भी अवसर तलाश रही हैं। हालांकि, उन्होनें टीवी सीरियल के अलावा कुछ तेलगू फिल्‍मों में भी काम किया है और वे सिनेमा जगत में भी जुडना चाहती हैं।

कास्टिंग काउच पुरानी बात
कास्टिंग काउच का जिक्र होने पर रति बताती है कि लडकियों के लिए टेलीविजन इंडस्ट्री बिल्कुल सुरक्षित है। हां, अगर आप दूसरों के सामने यही दिखाओगे कि आप काम के लिए कुछ भी कर सकते हो, तो बाहर बहुत शिकारी बैठे हैं। जहां तक बॉलीवुड की बात है, रति को बडे बैनर से अच्छे ऑफर आने का इंतज़ार है। वे मानती हैं कि casting couch  दौर भी जा चुका है और टेलेंट की कद्र आज हर कोई करता है।      

 

Deepika Sharma

लेखिका पत्रकार हैं
 

 

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Comments

story

kya mast patrakar hai aapki.... wah wah...acchi dikhti hai :P