नई दिल्ली। नए साल पर सिगरेट छोड दूंगा...गुस्सा नहीं करूंगा...समय पर घर पहुंच जाऊंगा..अपना वजन कम करूंगी... और न जाने खुद से ऐसे कितने ही वायदे, लेकिन साल के शुरुआती सप्ताह या 15 दिन होते-होते ये वायदे हिरण हो जाते हैं! मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि खुद से कभी ऐसे वायदे न करें, जिसे पूरा नहीं कर सकते हों। इससे न केवल आपका आत्मविश्वास हिल जाएगा, बल्कि बार-बार नाकाम होने पर आपके अंदर कुंठा भी पनप सकती है, जो पूरे करियर में आपके लिए अवरोध पैदा कर सकता है।
जो आपके हाथ में नहीं, उसका वायदा कभी न करें
नया साल हरेक के लिए कुछ नया लेकर आए यह संभव नहीं, लेकिन नएपन की चाह में मीडिया हाउस में काम करने वाली रश्मि (काल्पनिक नाम) ने अपने पति से यह वायदा कर लिया (new year resolutions) कि वह समय पर घर आ जाएगी। ऐसा हो तो कभी नहीं सका, लेकिन पति को बार-बार उलाहना का मौका मिल गया। परिणाम यह हुआ कि उनके रिश्ते तल्ख होते चले गए। अब रश्मि घर से अि"क कार्यालय में ही सुकून महसूस करती है।
राममनोहर लोहिया अस्पताल के मनोवैज्ञानिक डॉ॰ एनएन मिश्रा कहते हैं कि रश्मि जैसी स्थिति कई लोगों की होती है। कार्यालय में काम का समय हमारे हाथ में नहीं होता, लेकिन जोश-जोश में हम सही समय पर घर पहुंचने का वायदा कर लेते हैं और बाद में यह कलह का करण बन जाती है। इसलिए ऐसा वायदा कभी न करें, जिसे पूरा करने की क्षमता आपके हाथ में न हो। यह बेवजह के तनाव में डालता है और सामान्य जीवन व्यवधान पैदा करता है।
हर बार की हार आपके विश्वास कर सकता है छिन्न-भिन्न
अगले साल स्विप्नल 10 वीं की परीक्षा है। उसने इसके लिए अभी तक पढाई शुरू नहीं की है और खुद से वायदा किया है कि जनवरी से वह प्रतिदिन आठ घंटे की पढाई शुरू कर देगा और समय पर अपने सिलेबस को पूरा कर लेगा। डॉ॰ विशाल छाबडा के अनुसार, ऐसे लोग अपने अंदर आदर्श स्थिति पाल लेते हैं, जिसके पूरा नहीं होने पर इनका अहम बहुत अधिक आहत हो जाता है। वह सोचने लगते हैं कि मैं जिंदगी में कुछ नहीं कर सकता, मैं बेकार हूं और आत्महत्या तक का विचार मन में पाल लेते हैं। 10 वीं व 12 की परीक्षा के बाद बच्चों में डिप्रेशन व आत्महत्या का जो मामला देख़ते हैं उसके पीछे यही कारण होता है कि उनका सुपर ईगो प्रभावित हो जाता है। इसलिए लंबी अवधि की योजनाएं बनाएं और उसे छोटे-छोटे चरण में पूरा करें।
छोटे-छोटे चरणों में करें बदलाव की शुरुआत
विनोद पिछले पांच साल हर दिसंबर में यह प्रण लेता है कि वह अगले साल से सिगरेट (dont smoking) नहीं पीएगा। जनवरी का 15 तारीख भी नहीं आता कि उसका वह फिर से धुआं उड़ाता दिख जाता है। विम्हेंस अस्पताल के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ॰ विशाल छाबड़ा कहते हैं कि कभी भी ऐसा प्रण न करें, जिसे पूरा करने की उम्मीद आपको खुद ही न हो। सिगरेट पीने जैसी बातें व्यक्ति के आदत में शुमार हो चुकी होती है। यह एक लत है, जिसे किसी भी हाल में एक दिन में नहीं छो\डा जा सकता है। इसलिए अपने आप से आप कभी भी ऐसा वायदा न करें, बल्कि उचित तो यह होगा कि छोटे-छोटे वायदे पहले करें और उसे पूरा करें। इससे आत्मविश्वास को बल मिलता है और फिर बड़े वायदे पूरा करने की इच्छाश्क्ति भी पनप जाती है।
खुद से न करें अधिक की चाह
मूलचंद अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ॰ जीतेंद्र नागपाल के अनुसार,
- खुद से अधिक की चाह न पालें
- कभी भी कोई काम एक झटके में नहीं होता, इसे समझ लें
- छोटी शुरुआत करें उसके पूरा होने पर आगे बढ़े
- अपनी इच्छाशक्ति का आकलन कर लें, फिर प्रण लें
- जीवन में संतुलन बनाकर चलें, अति हमेशा हानिकारक होता है