लड़कियां चुन रही हैं मनपसन्द करिअर

आकांक्षा ने डीयू में बीए में दाखिला लिया है और वह आगे आईएएस बनना चाहती है जबकि उसके मम्मी-पापा चाहते थे कि वह मेडकल की पढ़ाई कर डॉक्टर बने । अपने पेरेंट्स की जिद पर आकांक्षा ने बारहवीं में साइंस की पढ़ाई कर ली थी लेकिन अब उसने फैसला किया है कि अपनी मर्जी का करिअर चुनना है ।

कुछ समय पहले तक लड़कियों के करिअर क्षेत्र का चुनाव माता-पिता ही करते थे। ज्यादातर माता-पिता यही चाहते थे कि उनकी बेटियां डॉक्टर, बैंककर्मी, शिक्षक या सिविल सर्विस में जाए, लेकिन आज लड़कियां अपनी पसंद के हिसाब से एयर होस्टेस, फैशन डिजाइनर, मॉडलिंग, एक्टिंग, बीपीओ, मीडिया, रिटेल जैसे क्षेत्र को चुन रही हैं। इस बदलाव में बहुत हद तक फिल्‍म 'थ्री इडिएट्स' का भी योगदान रहा है ।

बैचलर इन फाइन आर्टस में एडमिशन ले चुकी राधिका कहती है कि जब मैंने अपने पेरेंट्स को बताया कि मैं आर्टिस्‍ट बनना चाहती हूं तो वो एकदम से बिफर गए।  वो नहीं चाहते थे कि मैं आर्टिस्‍ट बनूं। उनका कहना था कि तुम बैंक के लिए तैयारी करो, लेकिन मैंने तो तय कर लिया था कि आर्टिस्‍ट ही बनना है और आखिर मैंने उन्‍हें मना ही लिया। मैंने उन्‍हें 'थ्री इडिएट्स' दिखाई, जिसके बाद उन्‍होंने मुझे करियर चुनने की आजादी दी।

दरअसल परिवार वालों के दबाव में किसी करिअर को चुन लेने पर बच्चे किसी तरह पाठ्यक्रम पूरा करते हैं और उस क्षेत्र में वो शायद ही कभी अच्छा कर पाते है। कई बार वो आत्महत्या जैसे गलत कदम को भी उठा लेते हैं, जिसके बाद पेरेंट्स की पूरी जिंदगी पश्‍चाताप करते ही बीतती है।

मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि करिअर के मामले में युवाओं पर दबाव नहीं बनाना चाहिए। उन्हें अपने पसन्द का करिअर चुनने देना चाहिए तभी वो खुश रहेंगे और जीवन में अच्छा करेंगे । आज जो बदलाव हो रहा है वो बहुत सही है। पेरेंट्स अपने बच्चों को उनके मनपसन्द करिअर चुनने में उनकी मदद कर रहे हैं और उन्हें आगे बढ़ा रहे हैं । ये वाकई में काबिले तारीफ है ।

मनपसन्द करिअर चुनने के फायदे
*उस क्षेत्र में बहुत अच्छा करने की संभावना

*उस क्षेत्र को इंज्वॉय करना न कि दबाव में पाठ्यक्रम पूरा करना

*गलत कदम उठाने का कोई डर नहीं

* सफलता की पूरी संभावना

प्रसन्न कुमार
लेखक पत्रकार हैं