रिटायरमेंट की प्लानिंग कैसे करें?

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महानगरी जीवन शैली के बीच इन दिनों सबसे ज्यादा परेशानी हमारे बुजूर्गों को हो रही है। पूरी जिंदगी की गाढ़ी कमाई बच्चों में लगा दिया। अपने लिए कुछ बचाया नहीं। अब बच्चे बड़े हुए तो साथ छोड़ दिया। ये घर-घर की कहानी है। ऐसे में बुढ़ाने में अगर तय रकम हर महीने मिलती रहे तो जिंदगी थोड़ी आसान हो जाती है। लेकिन जब तक इसका एहसास होता है, काफी देर हो चुकी होती है। इसलिए ये बेहद जरूरी है कि समय रहते रिटायरमेंट की प्लानिंग शुरू कर दी जाए। इसके लिए कई बातों का ख्याल रखें। 30 साल की उम्र में शुरू करें रिटायरमेंट प्लानिंग-जितनी जल्दी हो सके रिटायरमेंट के लिए बचत शुरू कर दें। अमूमन 45 साल की उम्र में पहुंचने के बाद इसका ख्याल आता है। लेकिन ये सही नहीं है। 30-35 साल मे अगर रिटायरमेंट की प्लानिंग कर ली जाए तो आगे चलकर जिंदगी काफी आसान हो जाती है। भले ही रिटायरमेंट प्लानिंग के तहत थोड़ी रकम ही क्यों ना बचाई जाए।

 

नियमित बचत करें
बचत नियमित तौर पर करें। कई मौके ऐसे आएंगे जब आपको तत्काल पैसे की जरूरत ज्यादा महसूस होगी, भविष्य की जरूरत छोटी महसूस होने लगेगी। लेकिन ऐसे मौकों पर धैर्य से काम लें और भविष्य का पूरा ख्याल रखें।

 

हर जरूरतों का ख्याल रखें
रकम का ठोस अंदाजा लगाएं-अब सवाल ये उठता है कि रिटायरमेंट के वक्त या उसके बाद कितनी रकम की जरूरत होगी, इसका हिसाब कैसे लगाया जाए। अक्सर लोग ये चूक कर बैठते हैं कि मौजूदा जरूरतों को ही उस वक्त की जरूरत मान बैठते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है। उस वक्त महंगाई कहां रहेगी इसका भी अंदाजा लगाएं। साथ ही नौकरी करते वक्त कई जरूरतें तो कंपनियां ही पूरी करती हैं। मसलन -मेडिकल, ट्रेवेल, पेट्रोल, मोबाइल फोन- जैसे मदों में खर्च कंपनियां कई जगह उठाती हैं। लेकिन रिटायरमेंट के वक्त ये सारे खर्च खुद वहन करने होंगे।

 

कौन सा प्लान है बेहतर
रिटायरमेंट के बाद लिए पेंशन प्लान चुनते वक्त इस बात का खास ख्याल रखें कि पेंशन प्लान में रकम डालने की जो अवधि है, यानी वेल्थ क्रिएशन पीरियड-उस दौरान रकम निकालने की सुविधा वाले प्लान को चुनें ही नहीं। इसमें जमा रकम रिटायरमेंट की उम्र के बाद ही निकले। लॉन्ग टर्म के लिए यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान यानी ULIP के बेहतर विकल्प है। लेकिन इसमें निवेश से पहले इसके रिटर्न और दूसरे चार्जेज के बारे अच्छे से तुलना कर लें। ये भी ध्यान रखें कि पेंशन प्लान में जमा रकम पर आपको टैक्स छूट ज्यादा से ज्यादा मिले। इन दिनों कई कंपनियां अलग-अलग रिटायरमेंट प्लान लेकर आई हैं। इनका ऊपर बताए पैमाने पर तुलनात्मक अध्ययन करके बेहतर प्लान देखा जा सकता है। हालांकि बाजार में निवेश के कई दूसरे ऑप्शन भी हैं जिन्हें पेंशन प्लान के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन इनकी अपनी खामियां और अच्छाइंयां हैं।

 

शेयर बाजार
मसलन शेयर बाजार को आम तौर पर रिटायरमेंट प्लान के बेहतर विकल्प के तौर पर नहीं माना जाता है। हालांकि इसमें भी अगर काफी पहले निवेश किया जाए तो बेहतर रिटर्न की काफी संभावना रहती है।

 

पीपीएफ या पीएफ
दूसरा विकल्प है-प्रोविडेंड फंड और पब्लिक प्रोविडेंड फंड। ये हमेशा से लोगों का पसंदीदा प्लान रहा है। क्योंकि में इसमें तय रिटर्न रहता है और जोखिम भी नहीं के बराबर रहता है। इंश्योरेंस भी रिटायरमेंट प्लान के लिए अच्छा ऑप्शन माना जाता है। लेकिन इसे जोखिम से निपटने के लिए ज्यादा कारगर माना जाता है। रिटर्न के लिहाज से उतना फायदेमंद नहीं माना जाता है।

 

फिक्स्ड डिपॉजिट
इसी तरह फिक्स्ड डिपॉजिट भी एक ऑप्शन के तौर पर देखा जा सकता है। क्योंकि इसमें रकम सुरक्षित रहती है। तय रिटर्न भी मिलता है। लेकिन बढ़ती महंगाई के हिसाब से ये रिटर्न छोटा होता है। प्रॉपर्टी भी एक अच्छा विकल्प है। इसे लॉन्ग टर्म में काफी बेहतर माना जाता है। लेकिन इसमें हर कोई पैसा लगाए मुमकिन नहीं है। क्योंकि इसमें एक साथ अच्छी खासी रकम लगानी होती है। अब आपको तय करना है कि कौन सा ऑप्शन रिटायरमेंट ऑप्शन आपको भाता है।
                                                                    

लक्ष्‍मण राय,

(लेखक सीएनबीसी आवाज से जुड़े हैं)

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