ब्रिटेन में रहने वाले मुस्लिम समलैंगिकों ने भी दुनिया के दूसरे देशों में रहने वाले समलैंगिकों की तरह समानता के अधिकार के आंदोलन में खुद को शामिल कर लिया है। वे इस्लामी रीति-रिवाज के मुताबिक़ निकाह करने की ख्वाहिश रखते हैं।
बीबीसी ने एक ऐसे ही समलैंगिक जोड़े से उनके निकाह के बारे में बात की और उनसे पूछा कि वे अपनी लैंगिक पहचान और अपने धर्म इस्लाम में संतुलन कैसे रख पाएँगी:
इस जोड़े ने बताया, 'हमारी मुलाकात तीन साल पहले रमजान के महीने में एक इफतार पार्टी में हुई थी। मेरे विचार से मुसलमानों की एक बहुत बड़ी संख्या इस महीने को आध्यात्मिक मानती है और मेरे विचार से यही कारण है कि हम लोगों के बीच एक रिश्ता कायम हो गया क्योंकि हमने अपने धर्म के बारे में विचारों का आदान-प्रदान किया।' असरा ने आगे कहा, 'बाद में इस सिलसिले को हमने आगे बढ़ाया और हम डेट पर गए।'
प्रस्ताव : असरा तीन साल पहले अपनी पार्टनर सारा से पहली मुलाकात को याद कर रही थीं। ये समलैंगिक मुस्लिम जोड़ा ब्रिटेन के समलैंगिक जोड़ों में से एक है जिन्होंने निकाह के जरिए अपने रिश्ते को मजबूत आधार पर रखा है।
असरा उस वक़्त को बड़े मजे लेकर याद करती हैं जब सारा ने उनसे शादी की पेशकश की थी। उन्होंने कहा, 'एक घंटे की मुलाकात के अंत में सारा ने बिना किसी बहाने और दलील के मुझ से शादी की पेशकश कर डाली।'
इसी बीच सारा भी आ गईं। उन्होंने कहा, 'मुझे तो ऐसा लग रहा है जैसे वह मुलाकात चार घंटे तक चली हो। उस बीच हमने रात का खाना खाया, कॉफी पी और सैर की। मैंने कोई योजना नहीं बनाई थी, लेकिन मुझे ऐसा लगा कि हमारे बीच इसी तरह होना था। मेरा विचार था कि जहाँ तक संभव हो मुझे इस रिश्ते को पाक-साफ रखना चाहिए।'
उन्होंने कहा, 'समलैंगिक होने के नाते शायद ये अजीब लगे, लेकिन मैंने महसूस किया कि हमें जहाँ तक संभव हो इसे सम्मानजनक तरीके से पूरा करना चाहिए।'
इस्लामी तरीका : असरा और सारा ने इस्लामी परंपरा के तहत निकाह का फैसला किया। हालाँकि निकाह पुरुष और महिला के बीच शादी के बंधन के लिए है, लेकिन असरा और सारा को पता था कि उनसे पहले भी मुस्लिम समलैंगिक इस तरीके को अपना चुके हैं। इसलिए उन्होंने इसके बारे में और अधिक जानकारी हासिल करने की ठान ली।
सारा ने कहा, 'कुछ सहेलियों ने हमें बताया कि इसके लिए हमें किसी सरकारी इमाम की जरूरत नहीं है, बल्कि ऐसे व्यक्ति की जरूरत है जो कुरान का बहुत ज्ञान रखता हो। सौभाग्य से मेरी एक सहेली ऐसी थी जिसे कुरान का काफी ज्ञान था और उसने निकाह पढ़ाने के लिए हाँ कर दी। वह खुद भी समलैंगिक थी और उसने कहा कि निकाह घर पर भी हो सकता है।'
उनकी पहली मुलाकात और शादी की पेशकश के तीन महीने बाद दोनों का निकाह हुआ। इस मौके पर असरा ने एक सफेद शलवार-कमीज पहनी जबकि सारा ने एक गुलाबी वस्त्र पहना। सारा ने कहा, 'मैं तो चमड़े का वस्त्र पहनाना चाहती थी लेकिन असरा ने मना कर दिया।'
उन्होंने कहा, 'हमने केमडिन मार्केट से अँगूठियाँ खरीदीं और एक निकाह-नामा तैयार किया। हमने पुरुष-महिला वाली शादी का एक फॉर्म इंटरनेट से डाउनलोड किया और इसका अलग-अलग अध्यन किया ताकि ये पता लगाया जा सके कि इसमें किसी परिवर्तन की जरूरत तो नहीं।'
BBC से सारा ने कहा, 'मुझे याद है मैंने उसमें अपने कुत्ते का जिक्र किया था अगर हमारे बीच अलगाव हो जाए तो कहीं ऐसा न हो कि असरा कुत्ते को चोरी करके ले जाए।' इस मौके पर असरा ने आँखें घुमाई और कहने लगी, 'हमने पाँच पाउंड का हक मेहर तय किया था। ये एक सांकेतिक चीज थी और हमारे पास अभी तक वो पाँच-पाँच पाउंड के नोट मौजूद हैं।'
सहेलियाँ : उनके निकाह में छह सहेलियाँ आई थीं जो उनके निकाह की गवाह भी थीं, और एक बिल्ली ने भी, सारा बीच में बोलीं। ये छोटा सा आयोजन अरबी भाषा में हुआ जिसमें कुछ अन्य दुआएँ भी पढ़ी गईं।
उनका कहना है कि शादी का ये समारोह किसी भी दूसरी शादी से अलग नहीं था। इस्लाम में समलैंगिकता पूरी तरह से अवैध है और चूँकि ये निकाह दो समलैंगिकों के बीच हो रहा था इसलिए ये खुद असरा के माता-पिता समेत मुस्लिम बहुसंख्यक के लिए अत्यंत घ्रणास्प्रद चीज थी।
असरा का कहना है कि उनके लिए अपने परिवार को यह बताना कि वह एक समलैंगिक महिला हैं बहुत मुश्किल था। उन्हें पता है कि मैं धार्मिक हूँ लेकिन इस हद तक जाना कि मैं उन्हें बता सकूँ कि मैं समलैंगिक हूँ मुश्किल है।
असरा ने कहा, 'मुझे याद है कि मैंने खुद से कहा था कि यह एक मात्र मौका है जब मैं अपनी शादी कर सकती हूँ क्योंकि मेरे परिवार के लोग वहाँ नहीं थे। मेरे दिमाग में हमेशा ये बात आ रही थी कि मैं इस्लामी तरीके से निकाह कर रही हूँ और जहाँ तक संभव है मैं इस्लामी परंपरा बरकरार रख रही हूँ।'
फिर भी सारा के अपने परिवार से संबंध बिलकुल ही अलग है। उन्होंने कहा, 'क्योंकि मैं मुस्लिम परिवार में पैदा नहीं हुई थी और मैंने सिर्फ पाँच साल पहले ही इस्लाम धर्म स्वीकार किया था इसलिए मेरा परिवार समलैंगिकता को कबूल कर रहा है। लेकिन कई बार ऐसा लगता है कि वे इस बात का इंतिजार कर रहे हैं कि कब मैं इस्लाम धर्म को छोड़ रही हूँ।'
सरोकार : सारा और असरा को मालूम है कि उनकी शादी परंपारगत नहीं है और ये कि दो समलैंगिकों की शादी को ज्यादातर उलेमा रद्द कर देंगे, लेकिन सारा का कहना है कि उससे किसी को सरोकार नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा, 'ये मेरे और मेरे खुदा के बीच का मामला है और जब हमने शादी की तो ये कोई सामान्य स्थिति नहीं थी, लेकिन हमने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की।'
ऐसा नहीं है कि मुस्लिम समाज में सारा और असरा जैसे समलैंगिक जोड़ों को विरोध का सामना नहीं करना पड़ता। सारा का कहना है कि उन्हें महसूस होता है कि समलैंगिकों में भी इस्लाम से नफरत की भावना पाई जाती है और इसी कारण वह कभी-कभी चिंतित हो उठती है।
असरा ने खास तौर पर एक अप्रिय घटना का जिक्र करते हुए कहा, 'एक बार गे-परेड का मौका था, जब परेड में शामिल एक व्यक्ति ने पीछे मुड़ कर बड़े ही भोंडे अंदाज में कहा कि हमें नहीं पता कि आत्मघाती बमबारों को भी परेड में शिरकत की इजाजत है और मेरे लिए मार्च में शामिल एक व्यक्ति की ओर से यह टिप्पणी काफी दुखद थी।'
फिर भी सारा का कहना है कि सिर्फ मुसलमान ही नहीं हैं जिन्हें समलैंगिक समुदाय खारिज कर रहा है। उनका कहना है, 'मेरे विचार से इस समुदाय के सेकुलर तत्व में ये सोच पाई जाती है कि आप समलैंगिक भी हों और अपने-आप या भौतिकवाद के अलावा किसी और चीज पर विश्वास भी रखते हों।'
बहरहाल उनका ये कहना है कि ये समलैंगिक निकाह अभी विवादित मुद्दा है लेकिन मैं इतना कह सकती हूँ कि मैंने ये किया है और मैं अपने धर्म और विश्वास से पूरी तरह संतुष्ट हूँ, मुझे आशा है कि लोग इसे बुरी नजर से नहीं देखेंगे।
साभार: एंड्रिएन गोल्डबर्ग
बीबीसी, फ़ाइव लाइव