हैदराबाद। इच्छामृत्यु को लेकर दुनिया भर में चल रही बहस के बीच आंध्र प्रदेश में गरीबी से जूझ रही एक बुजुर्ग महिला ने अपने अपाहिज बेटे के लिए इच्छामृत्यु की मांग की है। उसका कहना है कि हर महीने मिलने वाली मात्र पांच सौ रुपये की पेंशन में वह अपने बेटे के इलाज का खर्चा नहीं उठा सकती।
चित्तूर जिले की रहने वाली 64 वर्षीय लक्ष्यमम्मा ने स्थानीय अदालत में अपने 36 वर्षीय बेटे जनार्दन के लिए इच्छामृत्यु की अपील की है। जनार्दन पिछले 15 साल से अचेतावस्था में है। उसके हाथ-पैर लकवाग्रस्त हैं और वह बोल नहीं सकता। अदालत ने सोमवार को लक्ष्यमम्मा की अर्जी स्वीकार कर ली। मामले की अगली सुनवाई तीन मार्च को होगी।
अदालत ने जिला कलेक्टर और स्वास्थ्य विभाग को नोटिस जारी करके जनार्दन को उचित चिकित्सा सुविधा न मिलने को लेकरजवाब मांगा है। हालांकि अतिरिक्त जिला न्यायाधीश सुमलता इच्छामृत्यु की अपील के खिलाफ हैं। उनका कहना है कि किसी व्यक्ति को दूसरे की जिंदगी लेने का हक नहीं है।
एयरोनॉटिकल साइंस में स्नातक जनार्दन की गिनती कभी मेधावी छात्रों में होती थी। वर्ष 1977 में उसके पास ऑस्टे्रलिया से नौकरी का प्रस्ताव आया। वह वीजा के सिलसिले में बेंगलूर जाने के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस दुर्घटना में उसका मस्तिष्क बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ और वह कभी स्वस्थ नहीं हो पाया।
लक्ष्यमम्मा ने अदालत को बताया कि आठ साल पहले उनके पति भी गुजर गए थे। उन्होंने अपनी याचिका में कहा, 'मैं नहीं जानती कि मेरी मौत के बाद मेरे बेटे की देखभाल कौन करेगा? मैं अब उसे इस अवस्था में और नहीं देख सकती। अगर उसे इच्छामृत्यु दे दी जाए तो मैं भी चैन से मर सकूंगी।
इच्छामृत्यु का एक और मामला पिछले साल सुर्खियों में आया था। सुप्रीम कोर्ट ने 37 साल से मुंबई के एक अस्पताल में कोमा में पड़ी अरुणा शानबाग को इच्छा मत्यु की अनुमति देने से इंकार कर दिया था।
साभार: आइएएनएस