महंगाई लगातार बढ़ती जा रही हैा पेट्रोल, डीजल, एलपीजी गैस, केरोसिन के दाम सरकार ने बढ़ा दिए हैं। इनका प्रत्यक्ष प्रभाव तो घरों के बजट पर पड़ ही रहा है, लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से सब्जी, दूध, खाने-पीने की चीजें सभी कुछ का दाम बढ़ चुका हैा गृहणियों के घर चलाना मुश्किल हो रहा है। निश्चित आमदनी में सारे खर्चे निपटाना मुश्किल तो है लेकिन नामुमकिन नहीं। बात सिर्फ इतनी है कि आपको समझदारी से काम लेना है।
हम ये तो नहीं कहेंगे कि आप कंजूस बन जाएं, लेकिन ध्यान रखें कि कंजूसी और किफायत में फर्क होता है। महंगाई से लड़ने के लिए किफायत का नुस्खा अपनाया जा सकता है।
रसोई में समझदारी
कुछ खास बातों का ख्याल रख कर आप किचन के खर्च काबू में रख सकती हैं। गैस की बचत के लिए रेग्युलेटर के नॉब को नीचे से बन्द करना तो वैसे भी जरूरी है। इसके अलावा ईन्धन बचाने के लिए आप रसोई की कुछ चीजें दो की बजाय एक ही बार बनाएं। मसलन आप दोपहर और रात की दाल इकट्ठा बना लें। इसी तरह दाल को गैस पर चढ़ाने से पहले आप उसे भिगो लेंगी तो इसके पकने में कम समय लगेगा। अगर आप दूध को जरूरत के मुताबिक थोड़ा-थोड़ा उबालती हैं तो ऐसा न करें। सारा दूध एक साथ उबाल कर रख दें। इसके अलावा महीने भर का सामान खरीदते वक्त बड़ा पैक लेने की कोशिश करें कि ये छोटे पैक की तुलना में किफायती पड़ते हैं।
कामवाली की छुट्टी
महंगाई से लड़ने के लिए ये उपाय थोड़ा कठिन साबित होगा, लेकिन आजमा कर देखें। जाहिर है कामवाली को हटाते ही पहला सामना बर्तनों से होगा। कोशिश करें कि जूठे बर्तन तुरन्त के तुरन्त साफ कर दिए जाएं। रात का काम सुबह के लिए छोड़ा ही न जाए। जहां तक झाड़ू-पोंछा का सवाल है, इसके लिए मानसिक रूप से तैयार होने की जरूरत है। 15 से 20 मिनट में आसानी से निपट जाएगा और मुमकिन है ये काम आपको बतौर एक्सरसाइज अच्छा भी लगे। आखिर में जब हजार-डेढ़ हजार रुपये बचेंगे तो आपको मजा भी आएगा।
घर में ही रेस्टोरेण्ट का मजा
ये नुस्खा सिर्फ उन लोगों के लिए है जो नियमित रूप से बाहर खाना खाते हैं। दरअसल, घर और बाहर के खाने में स्वाद और माहौल दोनों का फर्क होता है। लेकिन माहौल ज्यादा असर डालता है। द्यफॉर ए चेञ्ज’ आप जो पैसे खर्च करते हैं, वो बचाए जा सकते हैं। करना सिर्फ इतना है कि घर के ही माहौल को थोड़ा बदल देना है। मिसाल के तौर पर अगर आप रेस्टोरेण्ट में बैठकर शाही पनीर और नान खाना चाहते हैं तो कोशिश करें कि पनीर की सब्जी घर में बन जाए और नान बाहर से आ जाए। स्टार्टर से लेकर आइसक्रीम और मीठे तक घर में ही लाकर खाने का माहौल बदलिए। गारण्टी है कि बाहर की तुलना में कुछ तो पैसे बचेंगे ही बचेंगे।
अपना घरेलू थियेटर
उपाय थोड़ा मुश्किल है, लेकिन मजेदार भी। घर में अपना द्यबॉक्स ऑफिस’ बनाने के लिए समय तय कर लें। मान लें कि आपको इस शनिवार घर में पिक्चर देखनी है। बच्चों की पसन्द-नापसन्द पूछ लें। डीवीडी ले आएं। बाकायदा टिकट बना लें। बोर्ड पर फिल्म की सूचना दे दें- शनिवार शाम 6 बजे, अमुक फिल्म दिखाई जाएगी। सारे काम 6 बजे से पहले निपटा लिए जाएं। फिल्म के वक्त ड्राइंग रूप में अन्धेरा। कोई फोन कॉल नहीं, कोई दूसरे काम नहीं। इण्टरवल में बाकायदा कोल्ड ड्रिंक, कुरकुरे। यकीन मानिए मजा आ जाएगा। पैसे बचेंगे सो अलग।
बातें कम, किफायत ज्यादा
कम बातें करके अगर पैसे बचते हैं तो क्यों न बचाएं। अगर आपने फोन का पोस्ट पेड कनेक्शन लिया हुआ है तो उसे प्रीपेड करा सकते हैं। कम बातों के लिए प्री पेड ज्यादा फायदेमन्द होता है। जाहिर है यहां कम बोलना आपके लिए जरूरी हो जाएगा। उदाहरण- अगर अपनी बलिया वाली बहन से बात कर रही हैं तो ये बताने में वक्त न जाया करें कि कल भी ट्राई कर रही थी, तुम्हारा फोन द्यनॉट रीचेबल’ आ रहा था। कहने का मतलब ये कि फोन पर सिर्फ जरूरी बातें की जाएं। कुछ तो पैसे बचेंगे।
साभार: नईदुनिया,
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