लंदन। लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के समाजशास्त्रियों का मानना है कि महिलाओं के लिए बड़ी नौकरी व परिवार की देखभाल एक साथ सम्भव नहीं है। समाजशास्त्री डॉ. कैथरीन हाकिम के अनुसार पति व बच्चे के साथ पारिवारिक जीवन को व्यवस्थित रखने वाली महिलाओं को ऊंचे ओहदे पर पहुंचते हुए कम ही देखा गया है। ऊंचे ओहदे पर तैनात महिलाएं नाममात्र का पारिवारिक जीवन जीती हुई पाई गई हैं।
ब्रिटेन में कंपनियों के ऊंचे ओहदे पर कार्यरत महिलाओं में से 50 फीसदी ऐसी हैं, जिन्होंने बच्चे पैदा नहीं किए हैं।
समाजशास्त्रियों ने ब्रिटिश सरकार से मांग की है कि वह कामकाजी महिलाओं के लिए काम की अवधि को लेकर लचीला रुख अपनाए। उन्हें कंपनी के बोर्ड में शामिल करने के लिए अधिक अवसर प्रदान करे।
हाकिम के अनुसार ऊंचे मुकाम पर पहुंचने वाली महिलाएं बच्चों को अपने आगे बढ़ने के मार्ग में बाधा समझती हैं या िफर उन्हें बच्चे पैदा करने का समय ही नहीं मिल पाता है। ऊंचे पदों पर कार्यरत 50 फीसदी महिलाओं को बच्चे ही नहीं है और बांकी बचे में अधिकांश ने केवल एक बच्चे पैदा किए हैं। काफी सारी महिलाएं समयाभाव के कारण अपने बच्चे को पालने के लिए दूसरी महिलाओं के साथ कंट्रेक्ट करती हैं।
हाकिम का कहना है कि महिलाओं के लिए समान अवसर की नीति तभी सफल कही जाएगी जब उन्हें समान अवसर मिले। सामाजिक इंजीनियरिंग के विशेषज्ञ व नारीवादी आन्दोलन की समर्थक हमेशा से महिलाओं के लिए समान अवसर की मांग करती रही हैं, लेकिन समाज इसे लेकर असमंजस में है।