ब्‍वॉय फ्रेंड, गर्ल फ्रेंड और जींस की पॉकेट

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नई दिल्ली। ब्वॉय फ्रेंड-गर्ल फ्रेंड एक-दूसरे के जींस की पिछली पॉकेट में हाथ डालकर चलने के रोमांच से खुद को नहीं रोक पाते। अक्‍सर एक-दसरे की पॉकेट में मौजूद हाथों की छेड़छाड़ सार्वजनिक स्‍थलों पर अश्लीलता का रूप ले लेती है, लेकिन दोस्‍ती के रोमांस में यह आम है। संस्कृति के पारंपरिक रूप में जो अश्लील है, आधुनिक रूप में वही फैशन और स्टेटस सिंबल बन चुका है।

दोस्‍ती की नई भाषा

महानगर के लड़के-लड़कियां दोस्‍ती की नई भाषा गढ़ रहे हैं। लड़की का एक हाथ लड़के के जींस की जेब में और लड़के का हाथ लड़की की जींस की पिछली जेब में रखकर चलने की नई भाषा गढ़ी जा चुकी है। दोनों बातें में खोए एक-दूसरे की जींस की जेब में उंगलियों को अठखेलियां कराते भीड़ में भी बस दो रहते हैं और पुरानी सोच के कई लोग अंदर ही अंदर कुढ़ते रहते हैं। पार्कों, मॉल व दिल्‍ली मेट्रो के अन्दर अक्सर ऐसी जोड़ी मिल जाती है। आधुनिकता के अनुरूप अपनी सोच नहीं ढाल पाने वाले लोगों को आंख उठाने में परेशानियां भी होती है और बार-बार आंख उठाकर उनकी देखने की कोशिश भी चलती रहती है। रसिक वर्ग के लोग तो रसलीन हो बकोध्‍यानम यानी बगुले के समान उसे देखने में तल्‍लीन हो जाते हैं।  और फूहड़ किस्म के लोग हि...हि..हि करते हुए भद्दे कमेंट करने से भी गुरेज नहीं करते।

आंखों देखी एक घटना
ऐसे ही एक दिन... एक-दूजे की आंखों में खोए और हाथ को एक-दूसरे की जींस की बैक पॉकेट में डाले एक जोड़ा दिल्‍ली मेट्रो में सफर के दौरान बात करने में तल्लीन था। उनसे कुछ ही दूरी पर खड़ा एक व्‍यक्ति बड़े गौर से उसे देख रहा था।  अचानक कैमरे के क्लिक की आवाज आई। किसी ने ध्यान नहीं दिया। दोबारा से क्लिक की आवाज आई और उस लड़की का ध्यान उधर चला गया। लड़की ने लड़के से कहा, 'विक्की देखो न, वह व्‍यक्ति हमारी फोटो ले रहा है।' विक्की का हाथ लड़की की जींस से निकला और पलक झपकते ही उस व्‍यक्ति के कॉलर तक पहुंच गया। मेट्रो में शोर मच गया। 'तूने हमारी तस्वीर क्यों ली', लड़के ने कहा।

फोटो लेने वाला व्‍यक्ति पहले हकलाया और बाद में चिल्‍ला उठा, 'जब तुम लोग मेट्रो में अश्लील हरकत करोगे तो क्या कोई तुम्हारी पूजा करेगा।' 'हमने क्या अश्लील हरकत की', लड़की बोली। व्‍यक्ति, 'अभी भी तेरा हाथ लड़के की पिछली जेब में है और कह रही हो क्या अश्लील हरकत कर रही हूं।' लड़की ने फटाक से लड़के की जेब से अपना हाथ निकाला और कहा, 'यह अश्लील हरकत है। तुम 'सिक मेंटलिटी' के लोग, तुम्हें तो हर हरकत ही अश्लील नज़र आती है।'  'मैं सिक हूं? सार्वजनकि स्थलों को तुमलोगों ने बेडरूम बना दिया है, परिवार के साथ निकलना मुश्किल है। बच्चे दस तरह के सवाल करते हैं। मैंने तुम दोनों की फोटो अपनी नज़रों की सन्तुष्टि के लिए नहीं लिया है, बल्कि मेट्रो प्रशासन से इसकी शिकायत करूंगा', उस व्‍यक्ति ने कहा।
बात बढ़ चुकी थी। एक बुजुर्ग महिला उठी और कहा, 'यह ठीक कह रहा है। कुछ तो मर्यादा का पालन करो। कम से कम सार्वजनिक स्थलों को तो बख्श दो। पार्क तो घूमने लायक रहे नहीं,  कम से कम अच्छे वातावरण में मेट्रो की सवारी तो करने दो।' वह फोटो लेने वाले उस व्‍यक्ति से भी मुखातिब हुई, 'बेटा इनकी फोटो डिलीट कर दो। क्या करें, आज जब दोस्‍ती और प्यार जब अश्‍लीलता की भेंट चढ़ चुका है तो कितने लोगों को रोकोगे? यह दिल्‍ली है। यहां की हवा जब घुटन भरी हो चुकी है तो संस्कृति कैसे अछूत रह सकती है...।'

 'यू ओल्ड लेडी' कहते हुए दोनों करोलबाग मेट्रो स्टेशन पर उतर गए। बूढ़ी अम्मा नज़रें झुकाए अपनी सीट पर जा बैठी। एक यात्री ने कहा, 'जिन्हें नज़रें झुकाना चाहिए वह तो रौब में निकले और जिन्हें आंखें उठाकर रखनी चाहिए उनकी नज़रें झुकी हैं।' दूसरे ने कहा, 'अरे यही तो मॉडर्निटी है!'

क्या सचमुच यही मॉडर्निटी  है? सोच-सोच कर थक गया, लेकिन वास्तव में इस मॉडर्निटी को नहीं समझ सका।