तिहाड़ जेल। महिलाएं न केवल अपनी अदाओं से मार सकती हैं बल्कि हकीकत में हत्या करने में भी पीछे नहीं रहतीं। तिहाड़ जेल में हत्या के जुर्म में सजा काट रहे दोषियों में आधी संख्या महिलाओं (women criminals) की है।
वर्ष 2011 के लिए सालाना सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल तिहाड़ जेल में विभिन्न अपराधों की वजह से सजा काट रहे 2,751 कैदियों में 46.15 फीसदी महिलाएं (women criminals) थीं जो हत्या के जुर्म में सजा काट रही थीं। इस अपराध के लिए सजा काटने वाले पुरूष कैदियों की संख्या 33.47 फीसदी थी।
इसके अलावा, 6.37 फीसदी महिलाएं हत्या के प्रयास के जुर्म में सजा काट रही थीं जबकि इस अपराध में सजा काटने वाले पुरुष कैदियों की संख्या 5.93 फीसदी थी।
अपहरण करने, अगवा करने के मामलों में, दहेज हत्या तथा नशीली दवाओं के मामले भी महिलाएं शीर्ष पर थीं। समीक्षा से यह भी पता चला कि बलात्कार के 7.69 फीसदी मामलों में भी महिलाएं दोषी पाई गईं।
सेंट्रल जेल (जेल संख्या 6) में महिला कैदियों को रखा गया है। इस जेल में 401 विचाराधीन कैदी और 104 दोषी बंद हैं जिनमें विदेशी भी शामिल हैं।
तिहाड़ के प्रवक्ता सुनील गुप्ता ने बताया कि जेल में बंद दोषियों के सालाना विश्लेषण में हमने पाया कि हत्या, अपहरण, अगवा करने, नशीली दवाओं और दहेज हत्या के मामलों में वर्ष 2009 तथा 2010 में पुरुषों की तुलना में महिला दोषियों की संख्या अधिक रही।
अपहरण और अगवा करने के मामलों में तिहाड़ में 10.58 फीसदी महिला दोषी बंद है जबकि इसी अपराध में केवल 3.66 फीसदी पुरुष दोषी सजा काट रहे हैं। दहेज हत्या के मामले में महिला दोषियों की संख्या 8.66 फीसदी और पुरूष दोषियों की संख्या 2.64 फीसदी है।
नशीली दवाओं के स्थानीय और विशेष अधिनियमों के तहत सजा काटने वाली महिला दोषियों की संख्या 13.46 फीसदी और पुरूष दोषियों की संख्या 6.99 फीसदी है।
गुप्ता ने कहा कि 30 से 50 साल की उम्र की महिला दोषियों की संख्या सर्वाधिक 57.69 फीसदी है। वर्ष 2009 में ऐसी दोषी महिलाएं 779 थीं। (भाषा)