प्रेमियों की हिफाजत, चंडीगढ़ प्रशासन के लिए मुसीबत

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चंडीगढ़। घर से भागकर शादी करने वाले प्रेमी जोड़ों की सुरक्षा इन दिनों चंडीगढ़ प्रशासन के लिए चुनौती साबित हो रहा है। पंजाब-हरियाणा से भागे प्रेमी जोड़े इन दिनों हाईकोर्ट के आदेश पर चंडीगढ़ प्रशासन के आश्रय गृह में ही ठहरे हुए हैं। इस समय ऐसे 60 प्रेमी जोड़े चंडीगढ़ प्रशासन के आश्रम गृह में रुके हुए हैं, जिसमें सर्वाधिक हरियाणा के हैं। प्रेमियों के लिए खाप पंचायतों के तुगलकी फरमान और उसकी वजह से बढ़ते ऑनर किलिंग की घटना को देखते हुए हाईकोर्टने चंडीगढ़ प्रशासन से ऐसे आश्रम गृह बनाने का निर्देश दिया था।


यहां रुकने के लिए हर जोड़े को 100 रुपए किराए के रूप में और 30 रुपए भोजन के लिए देना पड़ता है। जिस प्रेमी जोड़े के पास इसका सामर्थ्‍य नहीं है उससे प्रशासन पैसे नहीं लेता है।

चंडीगढ़ प्रशासन के काउंसलर के मुताबिक,आश्रय गृह में आने वाले अधिकतर प्रेमी जोड़ों के पास भविष्य की कोई योजना नहीं होती। थोड़ा बहुत पैसा होता है, वह विवाह व वकीलों की फीस देने में खर्च हो जाता है। हालांकि शुरुआती दौर में वे यहां खुश रहते हैं, लेकिन बाद में नियम-कायदों के कारण परेशानी महसूस करने लगते हैं। कुछ बाहर जाने की मांग भी करते हैं, लेकिन मामला अदालत में होने के कारण उन्हें इजाजत नहीं दी जाती।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, एक प्रेमी जोड़ा रसीद खान व रसीमा का था। रसीमा को कम उम्र के चलते नारी निकेतन भेज दिया गया। रसीद कुछ दिन तक आश्रय गृह में रहा, फिर मौका देखकर प्रेमिका को लिए बिना ही भाग गया।

काउंसलर ने कहा, आश्रय केंद्र में घर से भागकर शादी करने वाले इन प्रेमी जोड़ों और उनके परिजनों को बुलाकर काउंसिल भी की जाती है, ताकि दोनों के परिवार वाले लड़का-लड़की के रिश्ते को स्वीकार लें। कुछ मामलों में सफलता भी मिली है।

हाईकोर्ट के वकील व रनवे कपल के मामलों को देख रहे अशोक शर्मा का कहना है कि आश्रय गृह इस समस्या का हल नही है। बदलते सामाजिक परिदृश्य में दो पीढ़ी के विचारों की सोच का टकराव इस तरह के मामलों को बढ़ावा दे रहा है। सोच बदल कर ही इस समस्या से निपटा जा सकता है, नहीं तो समाज व कानून में इस विषय को लेकर टकराव जारी रहेगा।

साभार: दयानंद शर्मा, दैनिक जागरण