पति व ब्‍वॉयफ्रेंड महिलाओं के साथ यौन हिंसा में सबसे आगे

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संदीप देव, नई दिल्‍ली। दिल्‍ली पुलिस के आंकड़ों में यह हर बार साबित होती है कि दो तिहाई महिलाएं अपने रिश्‍तेदारों द्वारा ही बलात्‍कार की शिकार होती हैं, लेकिन यह जानकर और भी ताज्‍जुब होगा कि उनके साथ यौन अपराध करने वालों में बड़े पैमाने पर पति शामिल हैं। जबरन शारीरिक संबंध बनाना और उनके साथ यौन हिंसा पर उतारू हो जाने वाले पतियों के विरुद्ध मामले कम ही दर्ज होते हैं। यही नहीं, दिल्‍ली जैसे महानगर में लड़कियों के ब्‍वॉयफ्रेंड द्वारा उनके साथ डेट रेप, जबरन शारीरिक संबंध बनाने और सेक्‍स से मना करने पर मारपीट करने तक के मामले सामने आ रहे हैं।


नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्‍यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के मुताबिक दिल्‍ली सहित पूरे देश में वर्ष 2009 में महिलाओं के पति व अन्‍य रिश्‍तेदारों द्वारा किए गए यौन अपराध के 89 हजार 546 मामले सामने आए हैं। ये वो मामले हैं, जो विभिन्‍न थानों में दर्ज किए गए हैं जबकि नहीं दर्ज होने वाले मामले इससे कई गुना अधिक हैं।

एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक दर्ज किए गए 89 हजार 546 मामलों में से सबसे अधिक 21 हजार 397 मामले बलात्‍कार के हैं। ये वो आंकड़े हैं, जिसमें पति द्वारा जबरन सेक्‍स करने से लेकर रिश्‍तेदारों द्वारा किए गए बलात्‍कार को शामिल किया गया हैं। इसके अलावा 11 हजार से अधिक मामले यौन हिंसा के और 8 हजार 383 मामले दहेज हत्‍या के हैं। यौन हिंसा में शारीरिक छेड़छाड़, प्रताड़ना, मारपीट आदि शामिल है।

पॉपुलेशन काउंसिल ने पूरे दक्षिण एशिया में एक अध्‍ययन किया। इसमें पति द्वारा बलात्‍कार( जबरदस्‍ती बनाए गए शारीरिक संबंध) की शिकायत पर पुलिस के व्‍यवहार का अध्‍ययन किया गया। अध्‍ययन में यह सामने आया कि जब एक महिला पति द्वारा बलात्‍कार की शिकायत लेकर थाने पहुंचती है तो पुलिस उन पर हंसती है। 74 से 94 फीसदी जवाबदेने वालों ने कहा कि पति को अपनी पत्‍नी से जबरदस्‍ती शारीरिक संबंध बनाने का अधिकार है। इसमें कुछ भी बुरा नहीं है। भारत के आंकड़ों को देखें तो पता चलता है कि यहां पति द्वारा बलात्कार के मामले दर्ज़ होने की दर डकैती के मामले दर्ज़ होने से भी बहुत कम है।

यूएन वुमन की हालिया रिपोर्ट दर्शाती है कि भारत में 35 फीसदी महिलाएं अपने ब्‍वॉय फ्रेंड या करीबी दोस्‍त द्वारा ही यौन हिंसा की शिकार हो रही हैं। इसमें से 10 फीसदी को तो बलात्‍कार का सामना करना पड़ता है। यूएन वुमन की सहायक महासचिव व उप कार्यकारी निदेशक लक्ष्मी पुरी के अनुसार, यह स्थिति केवल दिल्‍ली या भारत की नहीं है, बल्कि  127 देश ऐसे हैं जो बलात्कार की सजा भी नहीं दे पाते हैं। दिल्‍ली के बारे में उनका कहना है कि यह महिलाओं के लिए एक असुरक्षित शहर बनता जा रहा हैा घर, दफ्तर और सार्वजनिक स्‍थान, कहीं भी महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं।

Sandeep Deo