सवाल: मेरा अपनी पत्नी से विवाद चल रहा है। हमारी तलाक की अर्जी पिछले कई सालों से कोर्ट में पेण्डिंग पड़ी है। मेरी पत्नी न तो मेरे साथ रहना चाहती और न ही तलाक देने को तैयार है। ऐसे में क्या मैं किसी और औरत के साथ लिवइन रिलेशन में रह सकता हूं? कानून की नज़र में मेरे इस सम्बन्ध का क्या स्टेटस होगा?
जवाब: यदि आपका अपनी पत्नी के साथ विवाद है और आप उससे अलग रहते हैं। ऐसे में आप यदि लिवइन रिलेशन में रहते हैं तो आपके खिलाफ आईपीसी की धारा 497 के तहत अडलट्री का मुकदमा दर्ज कराया जा सकता है। यह मुकदमा आपकी पत्नी या उस औरत जिसके साथ लिवइन में हैं, उसका पति ही दर्ज करा सकता है, जिसके साथ आप लिवइन में हैं। यदि वह कुंआरी लड़की है तो आपकी पत्नी ही मुकदमा दर्ज करा सकती है।
यह यह गैर संज्ञेय अपराध है। इस मामले में मुकदमा कोर्ट के निर्देश पर ही दर्ज हो सकता है। ऐसे में यह मुकदमा दर्ज कराना इतना आसान नहीं हैं। इसमें शिकायतकर्ता को आपके और उस महिला के बीच होने वाले शारीरिक सम्बन्धों को साबित करना होगा, जो आसान काम नहीं है। यही स्थिति महिलाओं के बारे में भी हैं। महिलाओं के खिलाफ अडलट्री का मुकदमा भी दर्ज नहीं किया जा सकता। हां, उसके साथ लिवइन में रहने वाले पुरुष के खिलाफ कोर्ट में शिकायत की जा सकती है, लेकिन प्रक्रिया उसमें भी वही रहेगी, जो पहले वाले मामले में है।
सवाल: मैं पिछले कई साल से अपने पति से अलग रह रही हूं। अभी हमारा तलाक नहीं हुआ है। मैं अपने पति से नियमित रूप से गुजारा भत्ता प्राप्त कर रही हूं। मैं चाहती हूं कि भविष्य में मेरा साथ देने के लिए एक बच्चा हो। यदि मैं कृत्रिम गर्भधारण करके बच्चा पैदा करूं तो उसका कानूनी स्टेटस क्या होगा। कानूनी दृष्टि से क्या यह मेरे खिलाफ जाएगा। क्या मुझे उसका भी गुजारा भत्ता मेरे वर्तमान पति से मिल सकता है?
जवाब: आप अपने पति से अलग रह कर कृत्रिम तरीके से गर्भधारण करके बच्चा पैदा करती हैं तो वह सिंगल पेरेण्ट की श्रेणी में आएगा। कानूनी रूप से आपके खिलाफ किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं बनती है। लेकिन उस बच्चे को गुजारा भत्ता उस पुरुष से मिल सकेगा, इसमें सन्देह है। गुजारा भत्ता कोई भी व्यक्ति अपनी पत्नी और अपनी उस सन्तान को देता है, जो उसके वीर्य से उत्पन्न हुई हो। किसी दूसरे के वीर्य से उत्पन्न सन्तान को गुजारा भत्ता देने के लिए वह आसानी से तैयार नहीं होगा।
मेरी निजी राय में वह बच्चा गुजारा भत्ता प्राप्त करने का पूर्ण अधिकारी है। किसी भी देश के नियम और कानून वहां के रीति रिवाजों के अनुसार ही तैयार किए जाते हैं। यदि हम पौराणिक ग्रन्थों का अध्ययन करते हैं तो आप महाभारत काल में जाएं। वहां पर महर्षि वेदव्यास का उदाहरण है, जिन्होंने अम्बे और अम्बालिके को पुत्र के रूप में धृतराष्ट्र और पाण्डु जैसे पुत्र दिए। इतना ही नहीं एक दासी को भी जो पुत्र दिया, उसे भी भारतवर्ष ने सहर्ष स्वीकार किया। इसके बाद पाण्डु की पत्नी कुन्ती को भी विभिन्न देवताओं ने अपना वीर्य देकर पुत्र प्रदान किए। वह आज के समय में सीरम ट्रांसप्लाण्ट तकनीक से कम नहीं है।
इसके अलावा बलराम के बारे में कहा जाता है कि उसे देवकी से वासुदेव की पहली पत्नी जेल से ले गई थी। यदि देखे तो वह सोरोगेट मदर का पहला उदाहरण है हो सकता है। मेरा आपको सुझाव है कि आप इस तकनीक से बच्चा पैदा करें और उसके गुजर बसर के लिए दावा ठोंके। यदि आपको न्याय मिलता है तो ठीक है। यदि आवश्यकता हुई तो सुप्रीम कोर्ट में इन तथ्यों को आधार बनाकर मैं आपकी सहायता करूंगा।
सवाल: मैं पिछले कई साल से अपनी पत्नी से अलग रह रहा हूं। अभी हमारा तलाक नहीं हुआ है। यदि मैं किराए की कोख लेकर कृत्रिम तरीके से बच्चा पैदा कराता हूं, तो उसका कानूनी स्टेटस क्या होगा। कानूनी दृष्टि से क्या यह मेरे खिलाफ जाएगा।
जवाब: हमारे देश में इस सम्बन्ध में अभी तक कोई नियम नहीं हैं। विदेशों में बने नियम के अनुसार सोरोगेट मदर या किराये की कोख के लिए पति और पत्नी दोनों की सहमति जरूरी है। लेकिन वर्तमान कानून के हिसाब से आप अपने वीर्य का किसी दूसरी महिला के अण्डे इस्तेमाल करके किराए की कोख से बच्चे पैदा करते हैं, तो इण्डियन पीनल कोड में इसके लिए किसी प्रकार के जुर्म का प्रावधान नहीं है। चूंकि आपकी सन्तान उस महिला से बिना शारीरिक सम्बन्ध किए हो रही है। ऐसे में आपके खिलाफ अडलट्री का भी मुकदमा दर्ज नहीं किया जा सकता।
सिविल दृष्टि से देखे तो वह आपकी अवैध सन्तान कहलाएगी। पुशतैनी संपत्ति में वह अपने अधिकार का दावा नहीं कर सकती। लेकिन यदि आपके बुजुर्ग उसे अपनाते हैं और उसे अपनी संपत्ति में से हिस्सा देते हैं तो उन्हें कोई रोक भी नहीं सकता। हमें उम्मीद है कि आने वाले समय में भारत सरकार हिन्दू विवाह अधिनियम को संशोधित करके जल्दी ही कोई नियम बनाएगी।
नोट: हमें आवश्यकता है आपके गम्भीर सवालों की। आप हमें अपने सवाल अंग्रेजी या हिन्दी में ई मेल कर सकते हैं। हमें पत्र लिख सकते हैं? छोटी मोटी सलाह फोन पर ले सकते हैं। आप चाहें तो समय लेकर हमसे मिल सकते हैं।
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