एक समय वह था कि जब युवा वर्ग के लोग अपने विवाह या प्रेम को अधिक महत्व देते थे, लेकिन आज की युवा पीढ़ी इनके स्थान पर अपने कैरियर को अधिक महत्व देने लगी है। इन युवाओं का कहना है कि वर्तमान समय प्रतियोगिता का समय है और इसमें वही युवा सफल हो सकता है जो अपनी समस्त शक्ति एवं क्षमता को एकत्रित कर अपने कैरियर में लगा दे। आज के युवक-युवतियां बहुत महत्वाकांक्षी हैं। ये अपने कैरियर को लेकर न केवल गम्भीर हैं, बल्कि उतावले भी हैं।
आज के जीवन में एक तो पैसे का महत्व बहुत बढ़ गया है और दूसरे आज के युवा अपने विवाह को लेकर अधिक चिन्तित भी नहीं हैं। इनके लिए विवाह या प्रेम का महत्व गौण होता जा रहा है। ये युवा मानते हैं कि प्रेम या विवाह एक उम्र के बाद कभी भी किया जा सकता है, परन्तु नौकरी एक उम्र के बाद कभी नहीं मिलेगी। वर्तमान परिस्थितियां देखते हुए माता-पिता भी यही चाहने लगे हैं कि उनके बच्चे पहले अपने कैरियर पर ध्यान देकर आत्मनिर्भर हो जाएं और उसके बाद ही विवाह के बंधन में बंधें। शायद यही कारण है कि आज के युवा प्रेम या विवाह के स्थान पर अपने कैरियर के प्रति अधिक सजग रहने लगे हैं और इस विषय में इन युवाओं की कमोबेश एक सी राय नज़र आ रही है।
युवाओं की राय
दिल्ली विश्वविद्यालय से एम.ए. कर रहे 24 वर्षीय रोहण गुप्ता कहते हैं, ``मेरे विचार से तो आज के दौर में हरेक युवा की पहली पसन्द उसका कैरियर ही होगा। आजकल कंपटीशन का जो रूख है उसे देखते हुए हमें पहले अपने कैरियर पर ही ध्यान देना चाहिए। मैरिज या लव अफेयर करने के बाद कैरियर बनाना और भी मुश्किल हो जाता है। कैरियर के बिना मैरिज या अफेयर करने को तो मैं अपने पैरों पर अपने आप कुल्हाड़ी मारना कहुंगा और ऐसी गलती कम से कम मैं तो कभी नहीं करना चाहूंगा।´´
जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से बी.ए. कर रहे के.एम. कुरैशी भी ऐसा ही कुछ कहते हैं कि अपना कैरियर छोड़कर प्यार-मोहब्बत में पड़ना बेवकूफी है। लेकिन मेरे कहने का मतलब यह नहीं है कि युवाओं को प्यार करने का हक ही नहीं है, बल्कि मैं तो यह कहना चाहता हूं कि युवाओं की पहली पसन्द उनका कैरियर ही होना चाहिए। प्यार-मोहब्बत की जगह कैरियर के बाद ही आनी चाहिए। तभी उनका कैरियर और प्यार कामयाब हो सकता है। मैंने खुद कुछ ऐसे लोगों को देखा है जिन्होंने प्यार-मोहब्बत के चक्कर में मजनू बनकर अपना सारा कैरियर बर्बाद कर लिया और अब उन्हें अपनी गलती का अहसास भी हो रहा है। जहां तक मेरा सवाल है, मैं तो ऐसा कभी नहीं करूंगा।
एक प्रतिष्ठित बहुराष्ट्रीय कंपनी में कार्यरत 27 वर्षीय दीप्ति सेठ अपनी बेबाक राय प्रकट करती हैं। उनके अनुसार,``वर्तमान पीढ़ी पहले की तुलना में बहुत समझदार हो गई है। पहले अगर माता-पिता विवाह के लिए कहते थे, तो उनके युवा बच्चे चुपचाप उनकी आज्ञा का पालन कर लेते थे। और फिर उस समय आज की तरह कैरियर, जॉब या बिजनेस को लेकर इतनी मारा-मारी भी नहीं होती थी, लेकिन आज जमाना बदल गया है। मुझे नहीं लगता कि आज का कोई भी पढ़ा-लिखा समझदार युवा बिना अपना कैरियर संवारे शादी-विवाह जैसी भयानक भूल करेगा। हां, वह कुछ समय के लिए किसी के प्रति आकर्षित तो जरूर हो सकता है, लेकिन अगर उसके पास बहुत ज्यादा दौलत और विकल्प नहीं है, तब तो वह शादी के बारे में सोचेगा भी नहीं। और उसे सोचना भी नहीं चाहिए।´´
34 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर सिद्धार्थ गौतम के मुताबिक, ``वर्तमान समाज की परिस्थितियों को देखते-समझते हुए ऐसा कौन सा समझदार युवा होगा जो अपने कैरियर को ताक पर रखकर प्रेम या शादी को प्राथमिकता देना चाहेगा। आज के युवक-युवतियां आज की परिस्थितियों के हिसाब से चलते हुए बहुत प्रतिस्पर्धी और प्रतियोगी हो गए हैं। आज शादी से ज्यादा जरूरी है आत्मनिर्भर होना।
शादी या प्रेम के बिना तो जीवन चल सकता है, लेकिन नौकरी या व्यवसाय के बिना जीवन नहीं चल सकता। जीवन में प्रेम या शादी भी जरूरी है, लेकिन उनका स्थान कैरियर के बाद ही आना चाहिए। एक न्यूनतम आयु सीमा के बाद जीवन में कभी भी प्रेम और शादी की जा सकती है, किन्तु कैरियर के सम्बंध में यह बात विपरीत है। नौकरी आदि एक अधिकतम आयु सीमा तक ही मिल पाती हैं। उसके बाद आपके लिए नौकरी के रास्ते बन्द हो जाते हैं।´´
मनोविज्ञानी की राय
मनोविज्ञानी डॉ. सी.एस. अग्रवाल इस विषय में बताती हैं कि आज के पढ़े-लिखे शहरी युवाओं के लिए उनका कैरियर अधिक महत्व रखता है। आज के ये युवा अपने कैरियर के प्रति काफी संवेदनशील रहने लगे हैं। उनके लिए उनका कैरियर, भविष्य, पद और पैसा ज्यादा महत्व रखता है। अगर आप ध्यान दें, तो पाएंगे कि आज के पढ़े-लिखे शहरी युवाओं में कम पढ़े-लिखे या ग्रामीण परिवेश के युवाओं की तुलना में महत्वाकांक्षाएं भी अलग हैं। परीक्षाओं या उनके परिणाम वाले दिनों में आत्महत्या करने जैसी जो दु:खद घटनाएं सामने आती हैं उनके पीछे भी कारण भिन्न होते हैं।
जहां ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं में प्रेम को लेकर आत्महत्याएं अधिक देखने-सुनने को मिलती हैं, वहीं शहरों के पढ़े-लिखे युवाओं के आत्महत्या करने वाली ज्यादातर घटनाओं का कारण कैरियर से सम्बंधित होता है। हालांकि आत्महत्या हताशा को प्रकट करती है और युवाओं को ऐसा गलत कदम कभी भी नहीं उठाना चाहिए फिर भी इस उदाहरण से इतना तो पता चल ही जाता है कि आज के पढ़े-लिखे शहरी युवाओं में अपने कैरियर को लेकर कितना तनाव है और कितनी जबरदस्त चाह है।
अभिभावकों की भूमिका
एक बैंक में कार्यरत 52 वर्षीय श्रीमती सुधा पाठक 3 युवा बच्चों की मां हैं। वे मानती हैं, ``आज की युवा पीढ़ी में आ रहे इस बदलाव के पीछे उनके माता-पिता की भी मुख्य भूमिका है। वे भी अपने बच्चों पर शादी के लिए नहीं, बल्कि कैरियर बनाने के लिए दबाव डालने लगे हैं। जबकि पहले बच्चों पर इस बात के लिए दबाव डाला जाता था कि वे एक निश्चित उम्र या पढ़ाई के बाद शादी करके अपना घर बसा लें।
माता-पिता के लिए यह जरूरी नहीं था कि उनके बच्चे अपने पैरों पर खड़े हुए हैं या नहीं। उस समय आज जैसी महंगाई भी नहीं थी। लेकिन आज के समय में ये सारी चीजें एकदम बदली हुई हैं। अब न केवल बच्चे, बल्कि उनके माता-पिता भी यही चाहते हैं कि शादी से पहले बच्चे आत्मनिर्भर हो जाएं। और यह ठीक भी है। अब महंगाई ही इतनी बढ़ चुकी है कि अकेले आदमी की कमाई में घर चलाना बहुत मुश्किल हो जाता है।´´