तलाक पर सुप्रीम कोर्ट: एक की भी असहमति तलाक में बाधक

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार 28 अप्रैल 2011 को अपने एक फैसल में कहा कि न्यायिक आदेश दिए जाने से पहले हिंदू पति-पत्नी में से किसी एक द्वारा सहमति वापस ले लेने पर तलाक की अनुमति नहीं दी जा सकती। न्यायमूर्ति डी.के. जैन और एच.एल. दत्तू की पीठ ने कहा कि तलाक दिए जाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण दोनों पक्षों की मुक्त सहमति है। अपने फैसले में न्यायमूर्ति दत्तू ने कहा, 'जब तक विवाह तोड़ने के लिए पति और पत्नी के बीच पूर्ण सहमति नहीं हो और जब तक कोर्ट पूर्ण रूप से संतुष्ट नहीं हो, तब तक आपसी रजामंदी के आधार पर तलाक का आदेश नहीं दिया जा सकता।'

कोर्ट ने हितेश भटनागर की अपील खारिज करते हुए यह व्यवस्था दी। हितेश ने फैमिली कोर्ट और पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा आपसी सहमति के आधार पर तलाक की अपील ठुकराए जाने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हितेश की पत्नी ने हालांकि वैवाहिक संबंध बनाए रखने की इच्छा जताई थी।