ड्राइवर और हेल्पर के बीच का `दोस्ताना'

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ट्रक ड्राइवरों की जिन्दगी बहुत कुछ एक यायावर की जिन्दगी सरीखी होती है। उनके लिए सिर्फ रास्ता होता है। कोलतार या सीमेंट से बनी सड़क...जिसकी मंजिल हर सफर में बदलती रहती है। उनकी आधी जिन्दगी तो गाड़ी की स्टेयरिंग, क्लच और ब्रेक के साथ ही गुजर जाती है। परिवार होते हुए भी उनकी नियति में परिवार से अलगाव लिखा होता है। उनका एक घर भी होता है, लेकिन कांक्रीट, ईंट या पत्थरों से बने घर की जगह ट्रक के केबिन और ढाबा में वह अपनी जिन्दगी के अहम पल गुजारने को विवश होते हैं। ऐसे में ट्रक ड्राइवरों और उनके हेल्परों के बीच एक 'दोस्ताना' सम्बंध विकसित हो जाता है। यह दोस्‍ताना या समलैंगिक संबंध एचआईवी संक्रमण की एक बड़ी वजह है।

हेल्‍पर से लेकर वेश्‍या तक की श्रृंखला

दुनिया भर के सर्वेक्षण दिखाते हैं कि किसी भी अन्य पेश की अपेक्षा ट्रकर्स (ड्राइवर व हेल्पर) के बीच सबसे अधिक समलैंगिक सम्बंध पनपते हैं। इनके सम्बंधों को लेकर किए गए कई सर्वेक्षणों में यह बात उभर कर सामने आई है कि यात्रा के दौरान 75 फीसदी से अधिक ड्राइवर व हेल्पर आपस में सेक्स सम्बंध स्‍थापित कर लेते हैं। हेल्परों को ड्राइविंग सिखाने और उनकी नौकरी को बरकरार रखने के नाम पर ड्राइवर पहले उनसे जबरदस्ती सम्बंध बनाते हैं और फिर समयान्तराल पर यह स्वभाविक सम्बंध में तब्‍दील होता चला जाता है। ऐसा नहीं है कि ड्राइवरों का यह दोस्ताना सिर्फ हेल्परों तक ही सीमित रहता है, बल्कि इस दायरे में हिजड़ा, वेश्या, लौण्डा, भिखारिन, छक्का, ढाबे का लड़का, छोकरी, धंधे वाला पुरुष, मालिशवाला-सभी धीरे-धीरे शामिल होते चले जाते हैं।

सर्वे में हुआ खुलासा

ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन ऑफ इण्डिया फाउण्डेशन एवं पोपुलेशन काउंसिल ने कुछ वर्ष पूर्व देश के 11 शहरों में ट्रकर्स के बीच पनपते समलैंगिक सम्बंधों को लेकर एक अध्ययन किया। इसमें ड्राइवरों एवं उसके हेल्परों का साक्षात्कार लिया गया, जिससे एक ऐसी सच्चाई सामने आई जो अभी तक केवल चर्चाओं में ही रही है।

ड्राइवरों ने बताया कि यात्रा की वजह से लंबे समय तक पत्नियों से दूर होने और कार्य की वजह से वह अवैध, समलैंगिक और द्विलिंगी सम्बंध में संलग्न हो जाते हैं। ट्रक इंजन की गर्मी और केबिन के गर्म तापमान की वजह से उनके अन्दर सेक्स की इच्छाएं कुलबुलाती रहती है।  लंबी दूरी से उत्पन्न थकान उनके शरीर को तोड़ देता है। ऐसे में वह सेक्स सम्बंध बनाने से खुद को  रोक नहीं पाते हैं।

पेड व कैजुअल, दोनों तरह का सेक्‍स

90 फीसदी ड्राइवरों ने माना कि अपने शरीर की गर्मी और थकान से निजात पाने के लिए  वह 'पेड' व 'कैजुअल', दोनों तरह के सेक्स का सहारा लेते हैं। राष्ट्रीय राजमार्गों और बड़े सड़क किनारे स्थित ढाबों पर पेड सेक्स वर्कर उपलब्ध होते हैं। यहां ड्राइवर व हेल्पर कुछ घंटों से लेकर कई दिनों तक रुकते हैं। ये लोग उन्हीं पेड सेक्‍स वर्कर के संबंध बनाते हैं, जिन्हें पहले से जानते रहते हैं। ऐसे में पकड़े जाने की संभावना नहीं रहती है।  हेल्पर के साथ तो ट्रक के केबिन में भी सम्बंध बनाया जाता है।

हिजड़े हैं पहली पसंद

पेड सेक्स वर्करों में ड्राइवरों की पहली पसन्द हिजड़े हैं, जो अप्राकृतिक यौनाचार जैसे गुदा व मुख मैथुन के लिए आसानी से तैयार हो जाते हैं।  ट्रक ड्राइवरों ने बताया कि हेल्परों और हिजड़ों के अलावा 15 तरह के सेक्स वर्कर ऐसे हैं, जिनसे वह सेक्‍स संबंध बनाते हैं। सबसे आश्चर्य की बात तो यह है कि इसमें केवल तीन सेक्स पार्टनर ही महिलाएं हैं।

स्त्रियों में कम रुचि

स्त्रियों को पार्टनर नहीं मनाने के पीछे इन ड्राइवरों का तर्क है कि उन्हें एचआईवी पीड़ित होने का डर सताता रहता है। महिला सेक्स वर्करों की योनि इतनी ढीली हो चुकी होती है कि उन्‍हें यौन संबंध में मजा नहीं आता है। ढीली योनी की वजह से उनकी यौन उत्तेजना समाप्त हो जाती है। महिला सेक्स पार्टनर पैसे भी अधिक मांगती हैं, जबकि अन्य पार्टनरों से सम्बंध मुफ़्त या कम पैसे में बन जाते हैं।

गुदा व मुख मैथुन का संबंध

ड्राइवर हेल्पर और हिजड़े के बीच गुदा और मुख मैथुन का संबंध बनता है। ड्राइवरों के अनुसार यह हर तरह से सुरक्षित और अधिक मस्‍ती वाला होता है। सर्वेक्षण में शामिल एक 25 वर्षीय ड्राइवर ने बताया कि शारीरिक सम्बंध बनाना प्राकृतिक है। जब हम घर से लंबे समय के लिए दूर होते हैं। ऐसे में शरीर की गर्मी बेचैन करने लगती है। यदि इस गर्मी से निजात पाने का तरीका नहीं ढूंढ़ा तो गर्मी की बीमारी हो जाएगी।

कंडोम के उपयोग को लेकर अज्ञानता

इस सर्वेक्षण में यह बात भी खुलकर सामने आया कि ट्रक ड्राइवर सेक्स वर्करों के साथ शारीरिक सम्बंध बनाने से पहले कण्डोम का उपयोग करने लगे हैं। वहीं गुदा मैथुन के प्रति उनकी अज्ञानता पूरी तरह से बनी हुई है। सर्वे में शामिल एक फीसदी ड्राइवरों ने भी गुदा मैथुन में कण्डोम की उपयोगिता की बात नहीं स्वीकारी। एचआईवी संक्रमण के लिहाज से योनि संभोग से अधिक खतरनाक गुदा मैथुन है। गुदा क्षेत्र के मेंमरेंस को इससे काफी क्षति पहुंचती है। इससे वीर्य के शरीर के खून के संपर्क में आने का खतरा बढ़ जाता है और एचआईवी वायरस के फैलने की आशंका बढ़ जाती है।

कवच योजना
ट्रकर्स की इन आदतों या मजबूरी से उत्पन्न खतरे को देखते हुए दी ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन ऑफ इण्डिया फाउण्डेशन इनके बीच `कवच` नामक परियोजना चला रही है। फाउंउेशन का अनुमान है कि देश में 1.5 मिलियन ट्रकर्स एवं उसके पार्टनरों की सुरक्षा के लिए कवच परियोजना एक बेहतर स्वास्थ्य परियोजना है। सर्वेक्षण में शामिल ड्राइवरों का जब स्वास्थ्य परीक्षण किया गया तो अधिकांश ट्रकर्स यौन संचारी रोगों के शिकार पाए गए। इसमें काफी एचआईवी के शिकार भी हो चुके थे। अवैध सम्बंधों की वजह से धात गिरना, सूजन होना, पेशाब में जलन, नसों में सूजन, घाव होने जैसी बीमारी तो ट्रकर्स में सामान्य बात है। कवच परियोजना का मकसद सुरक्षित सम्बंधों को बढ़ाने के लिए ट्रकर्स में जागरूकता अभियान चलाना और एड्स के खतरों से उन्हें आगाह करना है। यौन संचारी रोगों को गुप्त रोग मानकर इलाज कराने से झिझकने वाले ट्रकर्स की पहचान कर उन्हें इलाज के लिए प्रेरित करना है। ड्राइवर व हेल्पर ऐसे रोग होने पर अक्सर झोला छाप डाक्टरों या नीम-हकीम के चक्कर में फंस जाते हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य में सुधार की जगह और नुकसान ही होता है। कवच परियोजना के तहत इन्हें प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
 
ट्रकर्स द्वारा किए जा रहे दस सेक्सुअल एक्ट

*एनल सेक्स      86 फीसदी

*किसिंग          53 फीसदी

*ओरल सेक्स    46 फीसदी

*हस्तमैथुन        40 फीसदी

*शरीर को नोंचना-खसोटना   34 फीसदी

*नाखुन व दांत से स्‍त्री स्तन को नोंचना  27 फीसदी

*पुरुष लिंग को खरोंचना   23 फीसदी

*एक-दूसरे के लिंग से छेड़छाड़     19 फीसदी

* चाटना                   17 फीसदी

*योनि संभोग          09 फीसदी