नई दिल्ली। राजधानी में एचआईवी एड्स सहित यौन संचारी रोगों का एक बड़ा कारण ड्रग्स और सेक्स का कॉकटेल है। यौन संचारी रोगों को एचआईवी का सबसे बड़ा कारण माना जाता है, जिसकी दर पिछले पांच वर्षों में भयंकर रूप से बढ़ी है। यही नहीं, ड्रग लेने वाले और धन देकर सेक्स खरीदने वाले लोगों की संख्या भी लगातार बढ़ी है।
बढ़ रहे हैं ड्रग यूजर
वर्ष 1999 में यौन संचारी रोगों के शिकार लोगों में एचआईवी पीड़ितों की संख्या महज 0.8 फीसदी थी, जो वर्ष 2004 में बढ़कर 7.4 हो गई थी। ड्रग यूजर का तो यह हाल है कि राजधानी में वर्ष 2000 में जहां इनकी संख्या पांच फीसदी के आसपास सिमटी थी, वहीं वर्ष 2004 आते-आते 17.5 फीसदी तक पहुंच गई। इन ड्रग यूजरों में पांच फीसदी से अधिक लोग ऐसे हैं, जो एचआईवी के लिहाज से हाई रिस्क जोन में हैं।
हाई रिस्क जोन: तीन श्रेणी
दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन(डीएमए) के सचिव डॉ. अश्विनी डालमिया के मुताबिक एचआईवी के शिकार होने वाले हाई रिस्क लोगों को तीन श्रेणी में बांटा जा सकता है। पहली श्रेणी में वे लोग हैं, जो (करीब 8.71) सूईयों से ड्रग लेते हैं, दूसरी श्रेणी में वे पुरुष हैं (करीब 5.69) जिनका अन्य पुरुषों के साथ समलैंगिक सम्बंध है और तीसरी श्रेणी में (करीब 5.38) वे पुरुष हैं जो सेक्स वर्करों से सम्बंध बनाते हैं।
पुनर्वास कॉलोजी व ड्रग्स
दिल्ली एड्स कंट्रोल सोसायटी के आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में 42 पुनर्वासित कालोनियां हैं और 1200 झुग्गी बस्तियां हैं। दिल्ली की 45 फीसदी से अधिक आबादी इन्हीं जगहों पर बसी है। यहां बड़ी संख्या में अप्रवासी मजदूर, स्ट्रीट चिल्ड्रन और सेक्स वर्कर रह रही हैं। अपने घर व पत्नी से दूर यहां रहकर मजदूरी करने वाले अकेले पुरुषों का सेक्स वर्करों, बच्चों व अन्य पुरुषों से असुरक्षित यौन सम्बंध बन रहा है। यहां सूईयों से ड्रग लेने वाले लोगों की संख्या भी काफी है। पूरी दिल्ली में 50 हजार से अधिक लोग ऐसे हैं जो सूईयों से ड्रग लेते हैं। ऐसे में असुरक्षित यौन सम्बंध, अनेक लोगों से यौन सम्बंध और ड्रग का घालमेल यौन रोगों को बढ़ा रहा है।
युवा आबादी चपेट में
दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन(डीएमए) के अध्यक्ष डॉ.नरेश चावला के अनुसार नेशनल एड्स कंट्रोल आर्गेनाइजेशन और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंटिस्ट के अध्ययन से यह स्पष्ट है कि इस देश में 20 से 30 लाख एचआईवी एड्स की चपेट में हैं। एचआईवी की चपेट में महिलाओं से अधिक पुरुषों की संख्या है। यह महिलाओं से करीब दो गुनी है। एचआईवी की चपेट में आने वाले 88.7 फीसदी लोग 15 से 49 आयु वर्ग के हैं, जो देश के विकास के लिहाज से सर्वाधिक उत्पादक जनसंख्या है।
दिल्ली: एड्स में चौथा स्थान
आंकड़े के मुताबिक दिल्ली में 50 से 60 हजार लोग एचआईवी पोजिटिव हैं। वहीं करीब एक से डेढ़ हजार लोग एड्स से पीड़ित हैं। दिल्ली देश का चौथा ऐसा राज्य है जहां एड्स के शिकार लोगों की संख्या सर्वाधिक है। इसमें महाराष्ट्र, तमिनाडु और मणीपुर पहले, दूसरे व तीसरे नंबर पर हैं।