नई दिल्ली। राजधानी स्थित तिहाड़ जेल में सिर्फ दो साल में दो सौ से अधिक कैदी एचआईवी पोजिटिव पाए गए हैं। यही नहीं, एचआईवी की वजह से पिछले दो साल में दिल्ली के 16 लोगों ने आत्महत्या की है, जिसमें से 15 पुरुष व एक महिला शामिल है। जेल में समलैंगिक संबंध (homosexual relation) की समस्या आम है। ऐसे में जो लोग बाहर नशे और असुरक्षित यौन (unsafe sex) संबंध की वजह से एचआईवी के शिकार रहे हैं, वो जेल के अंदर अपने साथियों से समलैंगिक संबंध बनाकर उन्हें एचआईवी पोजिटिव (hiv aids) बना रहे हैं।
राजधानी के ही तिहाड़ जेल (tihar jail) में एड्स पीड़ितों की संख्या लगातार बढ़ रही है।जून 2008 से फरवरी 2010 तक 2540 कैदियों की जांच की गई, जिसमें से 201 कैदियों को एचआईवी पोजिटिव (hiv aids) पाया गया है। इनमें से 55 कैदियों को एड्स (hiv aids) हो चुका है, जिसमें से 14 कैदी रिट्रोवायरल रोधी चिकित्सा (retroviral drugs) पर जी रहे हैं।
जेल अधिकारियों के मुताबिक जेल में पहली बार प्रवेश करने पर सभी कैदियों की इंट्राविनिस ड्रग एब्यूज, नशे की दवा लेने की लत, स्वच्छन्द यौन सम्बंध और खून की जांच कराई जाती है। इसके अलावा एचआईवी संक्रमण और क्षय रोग संक्रमण आदि की विशेष जांच होती है ताकि अन्य कैदियों के साथ एहतियात बरती जा सके। जो लोग एचआईवी पोजिटिव हैं उनके लिए जागरूकता कार्यक्रम तो चलाए ही जाते हैं, जो नेगेटिव हैं उन्हें भी एचआईवी संक्रमण के बारे में बताया जाता है। जेल अधिकारी जेल में यौन संबंध से इनकार करते हैं, लेकिन जेल से बाहर निकलने वाले कई कैदी यह स्वीकार कर चुके हैं कि दादा टाइप कैदी उनसे जबरदस्ती यौन संबंध बनते थे।
तिहाड़ जेल से बाहर यदि झांकें तो दिल्ली में 10 हजार से अधिक एचआईवी के मरीज रिट्रोवायरल रोधी (retroviral drugs) उपचार के लिए पंजीकृत हैं। इसमें भी इलाज के लिए करीब छह हजार लोग ही पहुंच रहे हैं, बाकी के चार हजार एचआईवी पोजिटिव मरीज इलाज के लिए आते ही नहीं हैं। बिना पंजीकृत एचआईवी पोजिटिव मरीजों की संख्या इससे भी कई गुना अधिक है।
संदीप देव