गे कपल बने मां बाप

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नई दिल्ली। देश में पहली बार एक गे कपल को मातृत्‍व सुख मिला। समलैंगिक मॉरो व जुआन की जोड़ी को पिता बनने का यह सुख किराए के कोख (सेरोगेसी) की वजह से हासिल हुआ। in vitro fertilization (IVF) तकनीक से यह सम्भव हो सका। स्पेन की समलैंगिक जोड़ी मॉरो व जुआन के शुक्राणु (sperm) को आईवीएफ तकनीक के जरिए किराए पर कोख (सेरोगेट मदर) उपलब्ध कराने वाली महिला के अण्डाणु (women egg production) से पहले निषेचित (fertilization) कराया गया और बाद में उसके गर्भ में प्रत्यारोपित कर दिया गया। नौ महीने बाद उस सेरोगेट मदर (surrogate mother) ने जुड़वा बच्चियों को जन्म दिया, जिसके जैविक पिता मॉरो व जुआन हैं।

कैसे हुआ यह
दिल्ली के बंगोली मार्केट स्थित आईवीएफ सेंटर के निदेशक डॉ. अनूप गुप्ता ने बताया कि एक समलैंगिक जोड़े को सन्तान सुख का यह पहला अनुभव है। स्पेन की यह जोड़ी पिछले साल हमारे पास आए थे। इन्हें किराए पर कोख उपलब्ध कराने वाली एक महिला से मिलाया गया। दोनों में जब अनुबंध होने के बाद मॉरो व जुआन के शुक्राणु को उस महिला के अण्डाणु से परखनली में निषेचित कराया गया। बाद में उस भ्रूण को सेरोगेट मदर के गर्भ में प्रत्यारोपित कर दिया गया। पहली फरवरी 2011 को उस महिला ने जुड़वा बच्चियों को जन्म दिया। उसके एवज में गे जोड़ी ने उस महिला को साढ़े तीन लाख रुपए दिए। जन्म के तुरन्त बाद बच्चियों को मॉरो व जुआन के हवाले कर दिया गया। भारतीय मां की कोख से पैदा होने वाली बच्चियों का नाम स्पेनिश मॉरो व जुआन ने खांटी भारतीय, उमा व दीया रखा है।

गे जोड़ी में जुआन है मां की भूमिका में
मॉरो व जुआन की समलैंगिक जोड़ी में जुआन स्त्री की भूमिका में है। बच्चा पालने में भी उसकी यह भूमिका दिख जाती है।  एक मां की तरह जुआन बच्चियों को अपने सीने से चिपकाए रखता है। जुआन के शब्दों में, भले ही मैंने इन्हे जन्म नहीं दिया है, लेकिन इनके लालन-पालन में मुझे एक मां का सुख मिल रहा है। दोनों को दूध पिलाने, रोने पर चुप कराने, नैपकीन बदलने आदि में असीम सुख मिलता है।

 

अभी स्‍पेन ले जाने में कानूनी अड़चन
अभी मॉरो व जुआन बच्चियों को स्पेन नहीं ले जा सकते हैं। इसमें कम से कम एक महीने का समय लगेगा। डॉ. अनूप गुप्ता के अनुसार किसी बच्चे के यहां जन्म लेते ही भारत की नागरिकता मिल जाती है। ऐसे में इन बच्चियों  को यहां से ले जाने में कागजी कार्रवाई पूरी करनी होगी। इसके लिए स्पेन के दूतावास को बड़ी भूमिका निभानी होगी। दोनों बच्चियों के डीएनए जांच के बाद ही इन्हें स्पेन ले जाने के लिए हरी झण्डी मिलेगी।

सेरोगेट मदर (surrogate mother) का दर्द
किराए पर कोख उपलब्ध कराने वाली महिला ने बताया कि उसने आर्थिक तंगी की वजह से बच्चे को अपने गर्भ में पालने का निर्णय लिया। नौ महीने तक गर्भ में पालने के बाद बच्चे को दूर करने में पीड़ा महसूस होती है, लेकिन यही अनुबंध की शर्त होती है। तीसरी बार सेरोगेट मदर बनी उस महिला ने कहा, मेरे खुद के दो बच्चे हैं। उनके लालन-पालन के लिए ऐसा निर्णय लेना पड़ा। हमें तो दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं होती थी, लेकिन किराए पर कोख देने की वजह से आज मेरे दोनों बच्चे निजी स्कूल में पढ़ रहे हैं।