शॉपिंग की बात हो और खुले बाजारों का जिक्र न हो ऐसा तो हो ही नहीं सकता। हलांकि देश के सभी बड़े और छोटे शहरों में मॉल खुलते जा रहे हैं, लेकिन अभी भी महिलाओं का एक बड़ा वर्ग खुले बाजार में ही शॉपिंग का आनंद लेता है। आज भी दिल्ली का दिल कनॉट प्लेस हों या फिर जनपथ के बाजार, ये देशी-विदेशी पर्यटकों के पसंदीदा ओपन मार्केट हैं।
शॉपिंग की शॉपिंग और कुल्फी-गोले, चाट-पकौड़े, गोलगप्पे और भेल की रेड़ी- इन सबका एक साथ मजा तो खुले बाजार में ही मिलता है। वैसे मॉल की अपनी खुबियां है और बाजार की अलग आसानियां हैं। दोनों विकल्पों को एक-दूसरे की खूबियों के साथ देखा जाए तो व्यक्ति के स्वाभाव के अनुसार खरीददारी के दोनों जगह अलग-अलग अवसर हैं। औरतों के लिए विशेशत: होम मेकर महिलाओं के लिए तो शॉपिंग ही उनका स्ट्रेस बस्टर यानी तनाव से मुक्ति का प्रिय साधन है। ऐसे में खुले बाजार में शॉपिंग बड़ा राहत देता है।
मॉल में ना वो खुला माहौल मिलता ना ही आम परिवेश की आजादी। मॉल की शॉपिंग में जमाने के साथ चलने की होड़ लगी रहती है । ऐसे चलना है, अच्छे कपड़े पहनने हैं, ऐसे बात करनी है आदि-आदि। रोजमर्रा के जीवन में गृहणियां पड़ोसी के बच्चे से ज्यादा अंक लाने में अपने बच्चे के साथ दौड़ लगाती हैं, बेस्ट एम्प्लॉयर के अवार्ड के लिए पति के टिप-टाप होने में या ऐसी ही तमाम चीजों में इतनी व्यस्त हो जाती हैं कि याद ही नहीं रहता कि अपनी भी कोई जिन्दगी है।
ऐसे में वह थोड़ा वक्त निकाल कर शॉपिंग करने चली जाती है और यदि इस वक्त मॉल में प्रवेश करते ही टेंशन हो जाए कि मिसेज वर्मा की साड़ी मेरी साड़ी से सफेद कैसे या फिर ब्राण्ड के शो में कौन कितना आगे है तो फिर उसी चक्रव्यूह में फंसी रह जाएंगी जिससे बाहर निकलने के लिए वो शॉपिंग करने गई हैं।
खुले बाजारों की खासीयत यह है कि इसमें हर स्तर, हर कीमत और हर किस्म की चीजें मिल जाती हैं जिससे खरीददारी आसान हो जाती है। कुछ चीजें मंहगी लेने से काम चल जाता है पर कुछ चीजें ऐसी भी होती हैं जिनमें ज्यादा खर्च करने पर बाद में अफसोस होता है, जैसे पूजा का सामान,सब्जियां, राशन, किसी को कुछ देने के लिए इत्यादि। मॉल से लेने पर ये चीजें पैकिंग या टैक्स इत्यादि की वजहों से महंगी आती हैं जबकि खुले बाजारों में ये चीजें विभिन्न प्रकार की और काफी सस्ती मिल जाती हैं। कभी-कभी तो फुटकर में इन चीजों को खरीदने पर कुछ छोटी-मोटी चीजें मुफ्त में भी मिल जाती है। और बार्गेन यानी माल-तोल कर भाव पक्का करने में भी आसानी होती है।
मॉल में शॉपिंग के भी खुब फायदे हैं। बच्चे का खिलौना, कपड़ा, या इलेक्ट्रॉनिक आइटम सब एक छत के नीचे एक साथ बिना किसी परेशानी के उपलब्ध हो जाती है। इससे वक्त की बचत हो जाती है और सामान भी बिना झंझट के आ जाते हैं यदि आप अपने बच्चे के साथ अकेले शॉपिंग पर जा रही हैं तब मॉल से अच्छा विकल्प कोई नहीं हो सकता, बच्चे के साथ चलने पर बच्चे का ध्यान रखेंगी या पर्स का जिसमें क्रेडिट कार्ड्स और पैसे वगैरह हैं। ऐसे में मॉल बेहतरीन जगह है ना भीड़ में बच्चे के खोने का डर और ना ही पर्स चोरी होने का डर।
साथ में घर के राशन से लेकर बच्चे के ड्राइंग बुक तक यहीं से मिल जाएंगी, हां ये थोड़ी महंगी जरूर हो सकती हैं। इसके अलावा किसी भी चीज में सेल लगी होने पर डिसकाउंट मिलेगा यानी विजडम शॉपिंग और वक्त की बचत ही बचत। ना परेशानी ना चिढ़चिढ़ाहट बस युं गए और युं ले आए महीने भर का सारा सामान। मॉल का फायदा यह भी है कि अगर कपड़े पसन्द आ गए हों और साइज का पंगा हो रहा है तब ट्रायलरूम में ट्राय करके देख सकते हैं और फिर फैसला आपके हाथ में है।
प्रीतीबाला
सॉफ्टवेयर असोसिएट,
आईबीएम, पुणे