हीरेंद्र एस राठौड़, नई दिल्ली। अत्याधुनिक सुविधाओं वाले राष्ट्रमंडल खेल गांव (cwg games village) में अपने सपनों का घर लेने वाले लोग सावधान हो जाएं। यहां बने मकानों की दीवारें उखड़ने लगी हैं। बेसमेंट में पानी रिस रहा है। अगले बीस साल में यह ताश के पत्तों के महल की तरह ढह जाएगा। यह दावा केंद्रीय भवन अनुसंधान केंद्र रुड़की (CBRI) ने किया है।
यह सनसनीखेज खुलासा भारत के नियंत्रक महालेखापरीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में किया गया है। सीबीआरआई ने खेल गांव के निर्माण के दौरान जून 2008 से अक्टूबर 2010 के बीच दी गई 13 रिपोर्टों में निर्माता कंपनी द्वारा निर्माण कार्य में जानबूझ कर की गई लापरवाही के बारे में बताया था। लेकिन दिल्ली विकास प्राधिकरण ने इस ओर न तो कोई ध्यान दिया और न ही ठेकेदार कंपनी के खिलाफ कोई कार्रवाई की।
करोड़ों रुपए की लागत से 100 एकड़ क्षेत्रफल में बनाए गए खेल गांव (cwg games village) में आवासीय परिसरों का ज्यादातर बुनियादी काम पूरा हो जाने के बाद डीडीए ने सीबीआरआई को निर्माण कार्य के गुणवत्ता परीक्षण के लिए स्वतंत्र एजेंसी के रूप में नियुक्त किया था।
CBRI ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि खेल गांव का निर्माण करने वाली कंपनी एम्मार एमजीएफ कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड ने द्वितीय रेन्फोर्समेंट में कमी, रीइनफोर्सिंग स्टील के ऊपर पर्याप्त कंक्रीट कवर की कमी, बीम स्तंभों के गलत जोड़, स्तंभों और पतले स्तंभों का गलत एलाइनमेंट (सीबीआरआई की सलाह के विपरीत कंपनी ने गलतियों को छिपाने के लिए इनके ऊपर प्लास्टर कर दिया) जैसे गंभीर कमियों की वजह से भवन कमजोर हो गए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक ग्रेड स्लैब्स में अंतर की वजह से खेल गांव की इमारत के बेसमेंट में रिसाव हो गया। कंक्रीट के कम प्रयोग और रीइनफोर्सिंग स्टील के इस्तेमाल के चलते खेल गांव के टावर 20 साल से ज्यादा नहीं टिक पाएंगे। गौरतलब है कि एम्मार ने गैरकानूनी तरीके से पार्किंग के लिए बनाए गए भूमिगत खंड में 17 फ्लैट गैरकानूनी तरीके से बना दिए। एफएआर के मामले में कंपनी ने खेल गांव के निर्माण में मास्टर प्लान 2021 के प्रावधानों का खुला उल्लंघन किया गया।
ठेका देने में डीडीए की घपलेबाजी
कैग के मुताबिक खेल गांव के निर्माण का ठेका देने में भी डीडीए द्वारा अनियमितता बरती गई। निर्माण का ठेका लेने वाली कंपनी एम्मार एमजीएफ कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड निर्धारित मानदंडों को पूरा ही नहीं करती थी। डीडीए को एम्मार और डीएलएफ लिमिटेड की ओर से दो निविदाएं मिली थीं। डीएलएफ की निविदा को बिना किसी विचार के निरस्त कर दिया गया। यही नहीं, बाद में बेल आउट पैकेज देकर डीडीए ने एम्मार एमजीएफ कंस्ट्रक्शन को 7.66 अरब रुपए का फायदा भी पहुंचाया।
cwg 2010 scam