नई दिल्ली। वर्तिका एक मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब करती है । अक्सर उसे नाइट शिफ़्ट करनी पड़ती है । कुछ समय पहले जॉब ज्वान करते वक्त जब उसने नाइट शिफ़्ट के बारे में पेरेंट्स को बताई तो वो एकदम से बिफर गए । उसके पेरेंट्स ये बात कतई मानने को तैयार नहीं थे कि वो नाइट शिफ़्ट करे लेकिन उसने अपने परेंट्स समझा कर जॉब ज्वाइन कर लिया । आज वो आसानी से नाइट शिफ़्ट कर रही हैं।
एक न्यूज चैनल में रिपोर्टिंग करने वाली किरण के शिफ़्ट का कोई पता ही नहीं होता है। हर दिन उसकी शिफ़्ट बदलती रहती है। कई बार नाइट शिफ़्ट भी करनी पड़ती है । जब उसने पत्रकारिता करने के बारे में फैसला किया था तब उसके पेरेंट्स भी इस बात को मानने को तैयार नहीं थे कि उनकी बेटी घर से दूर जाकर पढ़ाई या जॉब करे, लेकिन उसने अपने पेरेंट्स को राजी कर कर लिया था । आज घर से हजारों किलोमीटर दूर रहकर किरण अपनी मनपसन्द जॉब कर रही है । वह बहुत खुश है। उसकी खुशी से उसके पेरेंट्स भी खुश हैं । ये कहानी सिर्फ वर्तिका और किरण की नहीं, बल्कि उन जैसी हजारों लड़कियों की है जो अपनी मर्जी का करिअर चुन रही है और आसानी से नाइट शिफ़्ट जॉब कर रही हैं ।
समय बदल रहा है
कुछ समय पहले तक लड़कियों के करिअर क्षेत्र का चुनाव माता-पिता ही करते थे। ज्यादातर माता-पिता यही चाहते थे कि उनकी बेटी घर के पास ही पढ़ाई करे और भागदौड़ भरी जॉब नहीं करे । करिअर के नाम पर मेडिकल, बैंकिंग और टीचिंग जैसे कुछ गिने-चुने क्षेत्र ही थे लड़कियों के लिए । आउट ऑफ स्टेशन जाकर पढ़ाई या जॉब का नाम सुनते ही पेरेंट्स एकदम से मना कर देते थे । नाइट शिफ़्ट जॉब का तो नाम भी सुनना पसन्द नहीं करते थें । लाख कोशिशों के बाद भी पेरेंट्स अपनी लाड़लियों को इनके लिए अनुमति नहीं देते थे, लेकिन आज पेरेंट्स की सोच बहुत हद तक बदल चुकी है । आज लड़कियों को पता है कि उनको क्या करना है, किस क्षेत्र को चुनना है और कौन सा क्षेत्र उनके लिए सही है । पेरेंट्स को समझा कर अपनी मर्जी से वो अपने मनपसन्द क्षेत्र को चुन रही हैं। बदलते जमाने की रफ़्तार को स्वीकारते हुए पेरेंट्स भी इस बदलाव को स्वीकार रहे हैं और अपनी बेटियों को उनकी पसन्द के जॉब व करिअर को चुनने में उनकी मदद कर रहे हैं ।
कंपनियों की भूमिका सकारात्मक
पेरेंट्स की सोच बदलने में जॉब देने वाली सभी कंपनियों ने बहुत बड़ी भूमिका निभाई है । नाइट शिफ़्ट के दौरान कंपनियां लड़कियों की पूरी सुरक्षा की जिम्मेवारी लेती है और उन्हें घर से ऑफिस लाने और छोड़ने के लिए निजी गाड़ी भेजती है । ऐसे में पेरेंट्स को किसी तरह का तनाव नहीं लेना पड़ता है । और वो खुशी-खुशी बेटियों को नाइट शिफ़्ट जॉब की अनुमति दे रहे हैं ।
दबाव डालना हित में नहीं
आरके पुरम में रहने वाले महेन्द्र सिंह कहते हैं कि मेरी बेटी नाइट शिफ़्ट जॉब कर रही है और वह उसे इंज्वॉय कर रही है । उनका कहना है कि आज के इस जमाने में किसी भी जगह नाइट शिफ़्ट में जॉब करना या घर से दूर जाकर पढ़ाई करने में कोई दिक्कत नहीं है । करिअर के मामले में कभी भी बच्चों पर दबाव नहीं डालना चाहिए क्योंकि कोई भी इंसान उसी क्षेत्र में अच्छा करता है जिसमें उसकी रुचि हो । आखिर जिन्दगी भी तो उन्हें ही बितानी है , ऐसे में जबरदस्ती कोई करिअर लादने से क्या फायदा ।
परिवार वालों के दबाव में किसी करिअर को चुन लेने पर बच्चे घोट-घोट कर पाठ्यक्रम पूरा करते हैं । भविष्य में उस क्षेत्र में वो शायद ही कभी अच्छा कर पाते है। कई बार वो आत्महत्या जैसे गलत कदम को उठा लेते हैं । मनोवैज्ञानिकों का भी मानना है कि करिअर के मामले में किसी पर दबाव नहीं डालना चाहिए । उन्हें अपने पसन्द का करिअर चुनने देना चाहिए तभी वो खुश रहेंगे और जीवन में अच्छा करेंगे । आज जो बदलाव हो रहा है वो बहुत सही है, पेरेंट्स अपने बच्चों को उनके मनपसन्द करिअर चुनने में उनकी मदद कर रहे हैं और उन्हें आगे बढ़ा रहे हैं । ये वाकई में काबिले तारीफ है ।
प्रसन्न कुमार
(लेखक पत्रकार हैं)