इन दिनों बैंकों के अलावा कई कंपनियां भी फिक्स्ड डिपॉजिट स्कीम लेकर आ
रही हैं। इन पर काफी अच्छा रिटर्न भी आपको ऑफर किया जाता है। लेकिन इसमें
पैसा लगाने से पहले आपको कई पहलुओं पर गौर करना जरूरी है। मसलन ये
कंपनियां यानी नॉन बैंकिंग फाइनांस कंपनियों का फिक्स्ड डिपॉजिट बैंकों
के फिक्स्ड डिपॉजिट से कैसे अलग होगा? ये कैसे काम करता है? इसमें पैसा
लगाना कितना सुरक्षित है?
आमतौर पर इन कंपनियां का फिक्स्ड डिपॉजिट भी बैंके फिक्स्ड डिपॉजिट की
तरह ही होता है। हालांकि कई कंपनियों की शर्तें थोड़ी बहुत अलग-अलग होती
हैं। इसलिए इसमें पैसे लगाने से पहले इन शर्तों को अच्छी तरह अध्ययन कर
लें।
कम सुरक्षित होते हैं निवेश
हालांकि नॉन बैंकिंग कंपनियों के फिक्स्ड डिपॉजिट में पैसे लगाना बैंकों
के फिक्स्ड डिपॉजिट के मुकाबले थोड़ा कम सुरक्षित होता है। क्योंकि मोटे
तौर पर बैंकों को केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक का समर्थन प्राप्त होता
है। जबकि नॉन बैंकिंग फाइनांस कंपनियों को सरकार और रिजर्व बैंक का सीधे
तौर पर कोई समर्थन प्राप्त नहीं होता है। हालांकि इन पर RBI की नजर जरूर
होती है। अगर कंपनी आर्थिक रूप से दिवालिया हो जाए या फिर आर्थिक संकट आ
जाए तो रिटर्न पर असर पड़ता है।
कंपनी का रिकॉर्ड जरूर देखें
इसका मतलब ये नहीं कि कंपनियों के फिक्स्ड डिपॉजिट में पैसे लगाने ही
नहीं चाहिए। निवेश को सुरक्षित बनाने के लिए ये देखना जरूरी है कि कंपनी
का पिछला रिकॉर्ड कैसा रहा है। आर्थिक रूप से कंपनी कितनी मजबूत है। अगर
इसमें पैसे लगाते हैं तो ये जरूर देख लें कि उस कंपनी की रेटिंग कैसी है।
CRISIL, ICRA, जैसी प्रमुख रेटिंग एजेंसियां से अमूमन इनकी रेटिंग होती
है। ये रेटिंग अक्सर A, AA, AAA होती हैं। मसलन अगर किसी कंपनी FD की
रेटिंग AA है तो यहां पैसा लगाना अच्छा निवेश साबित हो सकता है।
ज्यादा रिटर्न
जोखिम ज्यादा होने के साथ-साथ फायदा ये भी है कि कंपनी के फिक्स्ड
डिपॉजिट बैंकों के फिक्स्ड डिपॉजिट के मुकाबले ज्यादा ब्याज देते हैं। या
फिर ऐसे कह सकते हैं जितना ज्यादा रिटर्न का दावा उतना जोखिम भी रहता है।
इसलिए अगर कोई कंपनी 18%- 20% रिटर्न की बात करे तो थोड़ा सावधान होकर ही
पैसा लगाना बेहतर होगा।
लक्ष्मण राय,
(लेखक सीएनबीसी आवाज से जुड़े हैं)