एमबीए बनाम चार्टड एकाउंटेंट

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एकाउंटेंसी, ऑडिटिंग, कराधान जांच और कंसलटेंसी जैसे कुछ विशेष विभाग हैं  जो आपको आमतौर पर हर कार्यालय में देखने को मिल जाएगें। सरकारी हो या प्राइवेट, इस विभागों में काम करने वाले लोगों के रूतबे से हर कोई वाकिफ है। अब जब स्टेट्स भी अच्छा और वेतन भी तो छात्र इस क्षेत्र में जाने से कतराते क्यों हैं? हाल ही में हुए एक सर्वेक्षण के अनुसार कॉर्मस  इंडस्‍ट्री में उच्च शिक्षा के 2 पाठ्यक्रमों को लेकर छात्रों के बीच हमेशा से तनातनी रहती है। ये दो पाठ्यक्रम हैं- एमबीए और सीए।

सीए की पढ़ाई से दूर भागने का कारण
राजधानी दिल्ली स्थित अकादमी ऑफ कॉमर्स (एओसी) से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि चाटर्ड एकाउंटेंसी (सीए) की पढ़ाई को लेकर छात्रों के मन में कहीं ना कहीं एक भय बना रहता है कि ये पाठ्यक्रम बहुत मुश्किल है। ये भय बनाया हुआ होता है उन लोगों द्वारा जो काफी समय पहले यह कोर्स कर चुके होते हैं या फिर उन लोगों द्वारा जिन्होनें सीए बनने की कोशिश तो की, परन्तु बन नहीं पाए।


कुछ वर्ष पूर्व हमारे समाज के एक बड़े वर्ग में माता-पिता अपने बच्चे की उच्च शिक्षा में 4 वर्ष नहीं लगाना चाहते थे। एक आम धारणा यह बनी रही के छात्र स्नातक हो गया, बस अब कमाने लग जाऐ। ऐसे में उच्च शिक्षा के नाम पर एमबीए एक नई चीज सामने निकलकर आयी जिसने छात्रों को काफी प्रभावित किया। तुलनात्मक रूप से देखा जाए तो आधे से भी कम अवधी की पढ़ाई ! बस फिर क्या है, गली गली इंस्टीट्यूट तथा यूनिवर्सिटी खुलने लगे। आज हर 4 में से 3 छात्र आपको एमबीए करते नज़र आ जाएगें।

जबकि सीए की अगर बात की जाए, तो भारत में चार्टड आकउंटेट का मात्र एक संस्थान है जो कि आवश्यकता के अनुसार प्रशिक्षिण आयोजित करता है और परिणाम घोषित करता है। भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान (इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टड एकाउंट ऑफ इण्डिया) एक ऐसा संस्थान है जहां आपको शून्य प्रतिशत बेरोजगारी देखने को मिलेगी।

तुलनात्मक अध्यन
अकादमी ऑफ कॉमर्स के निदेशक के.एम गुप्ता के अनुसार ``सीए एक शून्य निवेश वाला पाठ्यक्रम है, जबकि एमबीए कोर्स की फीस आज आसमान छूती नज़र आ रही है। आपको ऐसे भी कॉलेज और यूनिवसिर्र्टी  मिल जाएगीं जहां एमबीए की फीस 8 लाख से 20 लाख रुपए तक है। इसकी तुलना में सीए की पढ़ाई पर कुछ खास खर्चा नहीं है।
1.    कोई कंपनी एमबीए के बिना तो चलाई जा सकती है, परन्तु सीए के बिना नहीं।
2.    एक ट्रेनी सीए को लगभग 4000 रुपए प्रति माह प्रशिक्षु वजीफा (ट्रेनी स्टीपेण्ड) मिलता है, जो के तीन वर्ष में हो गया लगभग 1.4 लाख रुपए। यदि देखा जाए तो इतनी ही फीस सीए की बैठती है।
3. एक सीए का वेतन भी एमबीए की  तुलना में कहीं अधिक होता है। आईसीएआई के कैंपस प्लेसमेंट में 7 लाख रुपए सालाना का वेतन बहुत आराम मिलता है ।
4.    यदि समाज में प्रतिष्ठा की बात की जाए तो एक सीए अपने नाम से पहले सीए लिख सकता है, परन्तु एक एमबीए अपने नाम से पहले एमबीए नहीं लिख सकता।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य
वर्ष 2008 के बाद से भारत में चार्टड एकाउंटेंट की मांग बहुत तेजी से बढ़ रही है। विकसित होती अर्थव्यवस्था में इस पाठ्यक्रम की काफी आवश्यकता है। के.एम गुप्ता का मानना है कि ``आज भारत में किसी भी अन्य पाठ्यक्रम के योग्य पेशवरों की तुलना में सीए का महत्व बहुत ऊंचा हो गया है। वित्त और लेखा आउटसोसिøग की भी यदि बात की जाए तो केपीओ और बीपीओ के बढ़ते बजार में आगे चाटर्ड अकाउंट के वारे न्यारे होने वाले हैं।
फिलहाल भारत में प्रतिवर्ष 9000 से 10,000 छात्र सीए की परीक्षाएं उतीर्ण करते हैं। एक आंकलन के अनुसार वर्ष 2010 के अन्त तक भारत में सीए की मांग 50,000 सालाना हो जाएगी।


अवसर
सीए का कोर्स करने के बाद आप किसी भी प्रख्यात कंपनी में बतौर फाइनेंस मैनेजर, फाइनेसियल कंट्रोलर, फाइनेंसियल एडवाइसर या फाइनेंस डायरेक्टर की हैसियत से काम कर सकते हैं। एकाउंटेंसी, ऑडिटिंग, कॉस्ट एकाउंटेसी, टैक्सटेशन, इंवेस्टीगेशन तथा कंसलटेंसी जैसे क्षेत्रों में आगे काफी अवसर हैं।  

दीपिका शर्मा
लेखिका कैरियर काउंसलर हैं

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