गीता व बबीता ने वो कर दिखाया जो महाबीर सिंह के लिए शायद उनका बेटा भी नहीं कर पाता । बड़ी बहन गीता ने कॉमनवेल्थ गेम्स में कुश्ती में स्वर्ण जीता तो छोटी बहन ने रजत पर कब्जा जमाया । भिवानी के गांव बलाली निवासी महाबीर सिंह को अपनी बेटियों पर गर्व है । महाबीर सिंह के परिवार में सिर्फ ये दो ही नहीं, बल्कि पांच लड़कियां हैं जो अंतरराष्ट्रीय कुश्ती में अपना जलवा दिखा रही हैं । पांचों ही एशियन कैडेट कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच चुकी हैं ।
गीता, बबीता, प्रियंका, रितु व विदेश पांच बहनें हैं । बड़ी गीता 22 साल की है और छोटी विनेश 14 साल की । इनमें से गीता, बबीता व रितु महाबीर सिंह की बेटियां हैं और प्रियंका व विनेश उनके स्वर्गीय बड़े भाई की ।
गीता कहती है, जो लोग पहले मेरे पिता की आलोचना करते थे, आज वे ही उनकी तारीफ करते नहीं थकते । मेरे पिता व दादा जी दोनों पहलवान रह चुके हैं । वह चाहते थे कि पहलवानी को आगे बढ़ाया जाए, लेकिन हम लड़कियां थीं । वर्ष 2000 में सिडनी ओलंपिक में कर्णम मल्लेश्वरी ने कांस्य पदक जीतने का कारनामा किया । मेरे पिता इससे बहुत अधिक प्रेरित हुए । उन्होंने हमें अखाड़े में उतारने का फैसला किया । शुरू में गांव में सभी ने भला-बुरा कहा । कहा, भला लड़कियों को कुश्ती लड़वा कर क्या मिलेगा, लेकिन मेरे पिता ने किसी की परवाह नहीं की । मैंने सात साल की उम्र में ही अभ्यास करना शुरू कर दिया था । गीता ने कहा, शुरु में दिक्कतें बहुत आईं । गांव में सामाजिक आलोचना के अलावा आधारभूत सुविधाओं की भी कमी है, लेकिन हमने हार नहीं मानी । मेरे पिता ने गांव व देश से वादा किया है कि मेरी बेटियां एक दिन ओलंपिक पदक जीतेंगी और मैं इस सपने को हर हाल में साकार करूंगी ।
कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक जीतने वाली गीता की छोटी बहन बबीता दिखने में लड़के की तरह लगती है, लेकिन वह भी गीता की तरह एशियन कैडेट चैंपियनशिप में सोना जीत चुकी है । इसके अलावा जूनियर विश्व चैंपियनशिप में भी उसने रजत पदक जीता है । बबीता ने कहा, हमारे परिवार को देखकर गांव की अन्य लड़कियां भी कुश्ती में कैरियर बनाना चाहती है । यही हमारे पिता की जीत है ।
साभार: नईदुनिया