आज भी बेटी का ब्‍वॉयफ्रेंड खटकता है मां-बाप की आंखों में

COUPLE4.jpg

दिल्‍ली, मुंबई जैसे महानगरों में भले ही लड़का-लड़की एक-दूसरे को बाहों में भरे, सार्वजनिक स्‍थलों पर प्रेम का इजहार करते दिख जाएं, लेकिन अधिकांश भारतीय परिवार आज भी अपनी बेटी के ब्‍वॉयफ्रेंड होने की बात को पचा नहीं पा रहा है। केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ने छह राज्यों में 51 हजार लोगों पर एक सर्वे किया, जिसमें यह पता चला कि आज भी अभिभावक लड़का-लड़की की दोस्‍ती, प्रेम और प्रेम विवाह के खिलाफ हैं।

स्‍कूलों, कॉलेजों में लड़का-लड़की के साथ-साथ पढ़ने के बावजूद अधिकांश मां-बाप को बच्चों के विपरीत सेक्स से दोस्ती पर ऐतराज है। ज्यादातर माता-पिता लव मैरिज के खिलाफ हैं। इसे मां-बाप का खौफ ही कर लें कि 69 फीसदी लड़कों को लगता है कि अगर वो गर्लफ्रेंड को घर ले जाएंगे तो उनके अभिभावक नाराज होंगे।

करीब 84 फीसदी लड़कियों को लगता है कि अगर वो ब्वायफ्रेंड को घर ले जाएंगी तो मां-बाप के गुस्‍से का शिकार होना पड़ेगा। इसकी पुष्टि भी इसी सर्वे में हो जाती है। 84 प्रतिशत लड़कों के मां-बाप उनकी लव मैरिज के खिलाफ हैं। वहीं 94 प्रतिशत लड़कियों के मां-बाप नहीं चाहते कि उनकी बेटी लव मैरिज करे। समाज में आए बदलाव के कारण लड़के-लड़कियों में आपसी खुलापन, शादी से पहले सेक्‍स और सार्वजनिक स्‍थलों पर खुलेआम किस और प्रेम का प्रदर्शन जरूर बढ़ा है, लेकिन समाज आज भी पुराने विचारों पर कायम लग रहा है।