आपका दिमाग बता देगा कि आप कितना यौन संबंध बनाएंगे
नई दिल्ली। नए साल पर सिगरेट छोड दूंगा...गुस्सा नहीं करूंगा...समय पर घर पहुंच जाऊंगा..अपना वजन कम करूंगी... और न जाने खुद से ऐसे कितने ही वायदे, लेकिन साल के शुरुआती सप्ताह या 15 दिन होते-होते ये वायदे हिरण हो जाते हैं!
सीमोन द बोउवार। स्त्री का पूरा भविष्य उसके प्रथम काम अनुभव के प्रति हुई प्रतिक्रिया से अत्यधिक प्रभावित होता है। मनोचिकित्सकों ने स्त्री के प्रथम काम अनुभव पर विशेष जोर दिया है।
सीमोन द बोउवार। स्त्रियां प्राय: बल प्रयोग से अपरिचित रहती है। जिस प्रकार बचपन और युवाकाल में पुरुष भिड़ते रहते हैं, उस तरह स्त्रियां नहीं। संभोगकाल के शारीरिक संघर्ष में पुरुष स्वभावत: अधिक शक्तिशाली सिद्ध होता है।
सीमोन द बोउवार। शारीरिक संबंध के दौरान स्त्री की लज्जा उसे परेशान रखती है। पहली बार तो स्त्री पुरुष की आंखों से आंखें नही मिलाना चाहती। ये भावनाएं गहराई से जमी रहती है। पुरुष और स्त्री अपने शरीर के नग्न प्रदर्शन में लज्जा का अनुभव करत
सीमोन द बोउवार। स्त्री दो भावनाओं के बीच पिसती रहती है। वह ऐसे आलिंगन में जकड़ जाना चाहती है, जिसमें कांपती रहे, किंतु व अपने साथ बल प्रयोग पसंद नहीं करती। शारीरिक मिलन में स्त्री संभव सीमा तक पुरुष के साथ सामंजस्य चाहती है।
नई दिल्ली। उम्र के हर पड़ाव में शरीर में होते हार्मोनल परिवर्तन, हर माह पीरियड की अनिवार्यता, घर और दफ़्तर के काम का दोहरा दबाव, सभी रिश्तों को निभाने की पूरी जिम्मेदारी और बढ़ते एकल परिवार की वजह से नारी मन और उदासी एक-दूसरे के पूरक होते हैं। इसका सीधा असर न केवल उनकी जिंदगी पर, बल्कि उनके परिवारिक
गर्भपात कराने वाली महिलाओं में मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं होने की आशंका अन्य महिलाओं के मुकाबले ज्यादा होती है। ब्रिटिश जर्नल ऑफ साइकाइट्री में प्रकाशित शोध के मुताबिक मानसिक समस्याओं के दस मामलों में से एक मामला गर्भपात की वजह से होता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिस्आर्डर (ocd) विकलांगता की दस बड़ी वजहों में से एक है। यह मानसिक विकलांगता की श्रेणी में आता है। ओसीडी एक ऐसी बीमारी है, जो व्यक्ति को एक ही क्रिया को बार-बार दोहराने को विवश करता है। पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं इसकी अधिक शिकार होती हैं, जिसके परिणामस्वरूप उनका अत्यधिक धार्मिक हो जाना
दुनिया भर में महिलाएं इस वक्त खुद को बेहद तनाव और दबाव में महसूस करती हैं। यह समस्या आर्थिक तौर पर उभरते हुए देशों में ज्यादा दिख रही है। एक सर्वे में भारतीय महिलाओं ने खुद को सबसे ज्यादा तनाव में बताया।