नई दिल्ली। मां बनने वाली महिलाओं के लिए भारत उपयुक्त स्थान नहीं है। मंगलवार को मदर्स डे के मौके पर जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में मांओं की स्थिति से संबंधित सूचकांक में 80 विकासशील देशों में भारत 76वें स्थान पर है। भारत से नीचे के पायदान पर अफ्रीका महाद्वीप के कुछ गरीब देशों ने अपनी जगह बनाई है।
नई दिल्ली। मेडिकल शॉपिंग के लिए दिल्ली सबसे मुफीद जगह है। टेस्टयूब बेबी हो या सरोगेसी मदर, बाजार यहां सजा हुआ है। जेब में पैसे लेकर आइए और स्पर्म व एग बैंक से स्वस्थ्य शुक्राणुओं व अंडाणुओं का चुनाव कर लीजिए। यदि आपके गर्भ की दीवारें कमजोर हैं तो कुछ रकम और खर्च कीजिए और इसे धारण करने के लिए गर्भ का पैकेज (सरोगेट मदर) भी बुक कर लीजिए। फिर नौ महीने इंतजार कीज
डॉ रेणू मिश्रा, नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली सहित देश के करीब-करीब हर महानगर में पांच में से एक व्यक्ति बांझपन (infertility) का शिकार है। 35 वर्ष की उम्र से अधिक का हर तीन में से एक दंपत्ति बांझपन की समस्या से जूझ रहा है। अधिक उम्र में शादी, मोटापा, शराब व ड्रग्स का सेवन, धूम्रपान, तनाव, लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर काम करना, कंप्यूटर पर रात-दिन लगे रहना और नियमित कस
महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान खुद की देखभाल की समुचित जानकारी नहीं होती। वे अपने से बड़ी किसी भी महिला की सलाह मान लेती हैं। कई बार सलाह देने वाली महिला को ही ठीक जानकारी नहीं होती। आइए जानते हैं कि गर्भवती महिला के लिए क्या सही और क्या ग़लत है।
गर्भावस्था को तीन भागों में बांटा गया है
लंदन। पाकिस्तान और बांग्लादेश में हुए दो नए अध्ययनों के अनुसार बच्चों के जन्म के समय और उसके बाद गर्भनाल की सफाई से गरीब देशों में संक्रमण और नवजात बच्चों की मौत के मामलों में कमी आ सकती है।
नई दिल्ली। शादी का सीजन है। यदि आप किसी की शादी में जा रहे हैं तो सोचिए कि नवदंपत्ति को सबसे बढ़िया दिया जाने वाला स्वस्थ उपहार क्या हो सकता है। नवदंपत्ति के लिए सबसे उचित और प्यारा उपहार हो सकता है कंडोम (condoms) और पांच मिलीग्राम की फोलिक एसिड (folic acid) का पैकेट। यह समझदारी से भरा स्वस्थ्य उपहार है।
नई दिल्ली। पुरुष और महिलाएं दोनों ही मोटापे के शिकार हैं और उन्हें कई कोशिशों के बावजूद बच्चा पैदा नहीं हो रहा है तो वे अपना वजन घटाकर देखें। मोटापे की वजह से उनमें नपुंसकता और बांझपन की समस्या हो सकती है। पहली बार में वजन में कमी करने से इस समस्या से निजात पाया जा सकता है।
लंदन। भले ही चर्च अपनी ननों के लिए गर्भनिरोधक गोलियों के बिल्कुल खिलाफ है लेकिन एक नए अनुसंधान में ननों के लिए गर्भनिरोधक गोलियों की सलाह दी गई है ताकि उन्हें कैंसर होने का जोखिम कम हो।
नई दिल्ली। इमरजेंसी कंट्रासेप्टिव पिल्स (i pill) के प्रभाव-दुष्प्रभाव को जानने के लिए सरकार अध्ययन कराएगी। दिल्ली, मुंबई जैसे मेट्रो सिटी की स्कूली लड़कियों, किशोरियों व नाबालिग युवतियों द्वारा i pill
लंदन। अत्यधिक वजन वाली महिलाएं सावधान हो जाएं। मोटापे का असर आपके बच्चों पर भी पड़ता है। हालिया शोध के मुताबिक मोटापे से पीडि़त महिलाओं के बच्चे भी मोटे होते हैं।